Priti Paswan Viral Video: क्या है प्रीति पासवान वायरल वीडियो कांड का सच?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भोजपुरी डांसर प्रीति पासवान के नाम से एक कथित '1 मिनट 48 सेकंड' का वीडियो तेजी से ट्रेंड कर रहा है. हालांकि, इस वायरल ट्रेंड की आड़ में साइबर अपराधी सक्रिय हो गए हैं और यूजर्स को वित्तीय तथा डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार बना रहे हैं.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स (पूर्व में ट्विटर), टेलीग्राम और रेडिट पर इन दिनों 'प्रीति पासवान वायरल वीडियो' (Priti Paswan Viral Video) सर्च टर्म तेजी से ट्रेंड कर रहा है. इंटरनेट यूजर्स के बीच इस कथित 1 मिनट 48 सेकंड की वीडियो क्लिप को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा रही है. हालांकि, इस पूरे मामले में अब एक गंभीर मोड़ सामने आया है. साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस वायरल क्लिप की आड़ में स्कैमर्स और हैकर्स ने मासूम यूजर्स को ठगने के लिए एक बड़ा जाल बिछाया है.

क्या है प्रीति पासवान वायरल वीडियो कांड का सच?

इंटरनेट पर लोकप्रियता हासिल करने और व्यूज बटोरने के लिए कुछ शरारती तत्वों ने एक आपत्तिजनक वीडियो क्लिप को भोजपुरी स्टेज डांसर प्रीति पासवान के नाम से जोड़कर वायरल कर दिया है. शुरुआती जांच और विशेषज्ञों का मानना है कि यह वीडियो या तो पूरी तरह से मॉर्फ्ड (बदला हुआ) है या फिर इसमें दिख रही महिला केवल प्रीति पासवान जैसी हमशक्ल है. खुद को इस विवाद से दूर रखते हुए और इस ट्रेंड की सच्चाई को समझते हुए यूजर्स को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है.

स्कैमर्स कैसे उठा रहे हैं उत्सुकता का फायदा?

जैसे ही कोई ट्रेंडिंग टॉपिक इंटरनेट पर आता है, लोग उसकी वीडियो लिंक तलाशने लगते हैं. हैकर्स ने इसी मानवीय उत्सुकता का फायदा उठाया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 'फुल वीडियो लिंक' या 'एमएमएस डाउनलोड' जैसे भ्रामक और आकर्षक कैप्शन लिखकर हजारों फर्जी लिंक्स शेयर किए जा रहे हैं. जब कोई यूजर इन लिंक्स पर क्लिक करता है, तो वह किसी वीडियो पेज पर जाने के बजाय सीधे साइबर अपराधियों द्वारा बनाई गई असुरक्षित वेबसाइटों पर पहुंच जाता है.

फिशिंग और मालवेयर का बड़ा खतरा

प्रीति पासवान वीडियो के नाम पर फैलाई जा रही अधिकांश लिंक्स असल में 'फिशिंग' (Phishing) स्कैम का हिस्सा हैं. इन संदिग्ध कड़ियों (Links) पर क्लिक करने से यूजर्स के स्मार्टफोन या कंप्यूटर में चुपके से खतरनाक मालवेर (Malware) या वायरस डाउनलोड हो सकते हैं. इतना ही नहीं, कई लिंक्स यूजर्स को उनके सोशल मीडिया अकाउंट के पासवर्ड, गूगल क्रेडेंशियल्स या बैंकिंग डिटेल्स डालने के लिए मजबूर करती हैं, जिससे बैंक खाते खाली होने या पर्सनल डेटा लीक होने का बड़ा खतरा बढ़ गया है.

डिजिटल सुरक्षा के लिए क्या करें यूजर्स?

इस तरह के इंटरनेट ट्रेंड्स से खुद को सुरक्षित रखने के लिए यूजर्स को बेहद सावधान रहने की जरूरत है. टेलीग्राम ग्रुप्स, व्हाट्सएप फॉरवर्ड्स या एक्स (ट्विटर) के कमेंट सेक्शन में आने वाले किसी भी अज्ञात लिंक पर भूलकर भी क्लिक न करें. किसी भी वायरल वीडियो को खोजने के चक्कर में अपनी निजी जानकारी को दांव पर लगाना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. डिजिटल सुरक्षा और सतर्कता ही इस तरह के ऑनलाइन घोटालों से बचने का एकमात्र प्रभावी जरिया है.

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