Pakistan Viral Video Scam: फेक 'एमएमएस लीक' और अश्लील वीडियो का रीसायकल, जानें कैसे फ़िशिंग स्कैम का शिकार बना रहे हैं साइबर अपराधी
कमर्शियल अडल्ट वीडियो को 'असली लीक' या 'एमएमएस स्कैंडल' का नाम देकर सोशल मीडिया पर वायरल करने का नया ट्रेंड सामने आया है. यह ट्रेंड यूजर्स को फ़िशिंग साइट्स और साइबर हमलों का शिकार बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.
Pakistan Viral Video Scam: सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर कमर्शियल अडल्ट वीडियो को 'असली लीक' या 'रियल-लाइफ स्कैंडल' बताकर शेयर करने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के भ्रामक दावों का उद्देश्य इंटरनेट यूजर्स की उत्सुकता का फायदा उठाकर उन्हें फ़िशिंग स्कैम और साइबर हमलों में फंसाना है.
झूठे कैप्शन और स्क्रिप्टेड रोलप्ले का सहारा
हाल के दिनों में टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर "पाकिस्तान के टीचर-स्टूडेंट एमएमएस लीक" के नाम से वीडियो क्लिप्स काफी वायरल हुईं. जांच में सामने आया कि यह कोई वास्तविक लीक या स्कूल की घटना नहीं थी, बल्कि साल 2023 में रजिस्टर्ड एक अडल्ट वेबसाइट पर अपलोड की गई स्क्रिप्टेड वीडियो थी.
इसी तरह, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक वीडियो इस दावे के साथ शेयर किया गया कि इसमें एक इराकी महिला अमेरिकी सैनिक के साथ बातचीत कर रही है. फैक्ट-चेक से यह स्पष्ट हुआ कि यह क्लिप भी एक अडल्ट साइट से ली गई थी और इसे वायरल करने के लिए फर्जी कहानी जोड़ी गई थी.
क्लिकबेट और भ्रामक ट्रेंड के पीछे का तंत्र
साइबर अपराधी इस ट्रेंड को फैलाने के लिए सोचे-समझे तरीके का इस्तेमाल करते हैं.
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मनगढ़ंत कहानियां: कमर्शियल क्लिप्स को 'एमएमएस लीक', 'एमएमएस स्कैंडल' या संवेदनशील सांस्कृतिक संदर्भ देकर पेश किया जाता है ताकि लोग तुरंत शेयर करें.
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विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर प्रसार: बंद मैसेजिंग ग्रुप्स और सोशल मीडिया फीड्स में ऐसी खबरें बिना किसी वेरिफिकेशन के तेजी से फैलती हैं.
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ट्रैफिक और फॉलोअर्स का खेल: इन भ्रामक शीर्षकों का मुख्य उद्देश्य बाहरी वेबसाइटों पर ट्रैफिक बढ़ाना, फॉलोअर्स जुटाना और व्यूज से कमाई करना होता है.
फ़िशिंग और साइबर सुरक्षा के गंभीर खतरे
डिजिटल सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह के अभियानों में सबसे बड़ा खतरा फ़िशिंग साइट्स से जुड़ा होता है. वायरल पोस्ट्स के साथ अक्सर संदेहास्पद थर्ड-पार्टी लिंक्स दिए जाते हैं.
जब यूजर्स पूरा वीडियो देखने के लिए इन लिंक्स पर क्लिक करते हैं, तो उन्हें ऐसी वेबसाइटों पर रीडायरेक्ट कर दिया जाता है जहां फ़िशिंग फॉर्म, मालवेयर डाउनलोड या खतरनाक एडवेयर इंस्टॉल होने का जोखिम होता है.
ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के उपाय
डिजिटल सुरक्षा संस्थाएं इंटरनेट यूजर्स को सलाह देती हैं कि 'प्राइवेट लीक' या 'हिडन कैमरा' के नाम से प्रसारित होने वाली सामग्री पर तुरंत विश्वास न करें.
अडल्ट प्लेटफॉर्म्स के वॉटरमार्क, आधिकारिक समाचार स्रोतों में खबर की अनुपस्थिति और बाहरी लिंक पर क्लिक करने का दबाव इस तरह के कंटेंट के फर्जी होने के प्रमुख संकेत हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अनधिकृत या संवेदनशील मीडिया सामग्री को आगे शेयर न करना ही ऑनलाइन प्राइवेसी और सुरक्षा बनाए रखने का सबसे प्रभावी उपाय है.
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचनात्मक और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है. हमारा उद्देश्य अश्लील सामग्री, लीक वीडियो या पायरेटेड कंटेंट को बढ़ावा देना या लिंक प्रदान करना नहीं है. लेख में इस्तेमाल किए गए शब्द केवल वायरल ट्रेंड्स और उनसे जुड़े खतरों को समझाने के लिए हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 02, 2026 02:53 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

