Fact Check: क्या E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कार इंश्योरेंस क्लेम हो जाएगा खारिज? सरकार ने सोशल मीडिया के दावों की खोली पोल
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस दावे को सरकार ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है कि E20 (20% इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल का उपयोग करने वाले वाहनों के बीमा क्लेम रिजेक्ट हो जाएंगे. पीआईबी (PIB) फैक्ट चेक यूनिट ने इसे 'फर्जी' करार देते हुए स्पष्ट किया है कि मोटर बीमा पॉलिसी पूरी तरह वैध रहेगी.
नई दिल्ली, 16 जून। सोशल मीडिया (Social Media) प्लेटफॉर्म पर पिछले कुछ दिनों से तेजी से प्रसारित हो रहे उस दावे को भारत सरकार ने पूरी तरह भ्रामक और फर्जी करार दिया है, जिसमें कहा जा रहा था कि वाहनों में E20 ईंधन (E20 Fuel) (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) का उपयोग करने से मोटर इंश्योरेंस क्लेम (Motor Insurance Claim) खारिज हो सकते हैं. मंगलवार को पत्र सूचना कार्यालय (PIB) की फैक्ट चेक (Fact Check) यूनिट ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक आधिकारिक पोस्ट के जरिए इस दावे की पोल खोली. सरकार ने स्पष्ट किया है कि वाहनों में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने से कार या दोपहिया वाहनों की बीमा पॉलिसियों की वैधता पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ता है और वे पूरी तरह प्रभावी रहेंगी. यह भी पढ़ें: VIDEO: क्या नितिन गडकरी ने डीजल वाहनों के लिए 15% आइसोबुटेनॉल ब्लेंडिंग की घोषणा की है? वीडियो में सुने उनकी बातें
भ्रामक दावों से वाहन मालिकों में बढ़ी थी चिंता
यह स्पष्टीकरण सोशल मीडिया पर उन वायरल पोस्ट्स के बाद आया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि यदि कोई वाहन मालिक E20 ईंधन का उपयोग करता है, तो बीमा कंपनियां किसी दुर्घटना या इंजन क्षति की स्थिति में क्लेम सेटलमेंट करने से इनकार कर सकती हैं. इन अपुष्ट खबरों ने विशेष रूप से पुराने वाहन मालिकों के बीच भारी चिंता पैदा कर दी थी.
अफवाहों का खंडन करते हुए पीआईबी ने कहा कि ईंधन के रूप में E20 पेट्रोल के उपयोग और मोटर बीमा दावों की मंजूरी के बीच कोई नकारात्मक संबंध नहीं है. इसके साथ ही, फैक्ट-चेकिंग यूनिट ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसी किसी भी संवेदनशील तकनीकी जानकारी पर विश्वास करने या उसे आगे शेयर करने से पहले आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों से उसकी सत्यता की जांच अवश्य कर लें.
बीमा कंपनियों ने भी साफ किया रुख
इस वायरल भ्रम के बीच केवल सरकार ही नहीं, बल्कि देश की प्रमुख निजी सामान्य बीमा कंपनियों (जैसे आईसीआईसीआई लोम्बार्ड) ने भी अपने स्तर पर स्पष्टीकरण जारी किया है. बीमा कंपनियों के अनुसार, किसी भी मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत क्लेम की मंजूरी दुर्घटना, चोरी या पॉलिसी में कवर्ड अन्य जोखिमों (Insured Perils) के आधार पर तय होती है. वाहन में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त E20 ईंधन में से किसका इस्तेमाल हो रहा है, यह क्लेम पास करने या रोकने का पैमाना नहीं होता है.
देश भर में बढ़ रहा है इथेनॉल ब्लेंडिंग का दायरा
हाल ही में जारी केपीएमजी (KPMG) की एक रिपोर्ट पर गौर करें तो भारत का इथेनॉल ब्लेंडिंग (मिश्रण) कार्यक्रम काफी बड़े पैमाने पर सफल रहा है और अब पूरे देश में E20 ईंधन चालू स्थिति में है. सरकार इस कार्यक्रम को बढ़ावा दे रही है ताकि कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता को कम किया जा सके, विदेशी मुद्रा की बचत हो और पर्यावरण स्थिरता (Environmental Sustainability) को मजबूत किया जा सके.
इसी रणनीति के तहत, चालू महीने की शुरुआत में 'विश्व पर्यावरण दिवस 2026' के अवसर पर सरकार ने इंडियनऑयल के एक रिटेल आउटलेट से अधिक इथेनॉल वाले 'E85 ईंधन' को भी लॉन्च किया है. वर्तमान में यह पायलट प्रोजेक्ट के तहत सरकारी तेल कंपनियों के 48 आउटलेट्स पर उपलब्ध है. सरकार की योजना दिसंबर 2026 तक इसकी उपलब्धता को बढ़ाकर 500 आउटलेट्स और दिसंबर 2027 तक लगभग 5,000 आउटलेट्स तक ले जाने की है.