Fact Check: कर्नाटक के मडिकेरी में पहाड़ों पर गिरी 'रहस्यमयी' बिजली? जानें वायरल वीडियो का पूरा सच और असली लोकेशन
ग्वाटेमाला का बिजली गिरने का वीडियो भ्रामक दावे के साथ वायरल (Photo Credits:X/@brijeshkalappa)

बैंगलोर, 3 जून: भारतीय सोशल मीडिया नेटवर्क (Indian Social Media Network) पर पिछले 24 घंटों से एक बेहद हैरान करने वाला वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है. इस हाई-डेफिनिशन फुटेज में एक अंधेरी पहाड़ी की चोटी पर नदी की तरह बहती और मकड़ी के जाले जैसी शाखाओं वाली अनोखी आकाशीय बिजली को कड़कते हुए दिखाया गया है. कई बड़े सोशल मीडिया हैंडल, स्थानीय पेजों और खेल प्रशंसकों द्वारा दावा किया जा रहा है कि यह दुर्लभ नजारा कर्नाटक के कोडागु जिले के मडिकेरी (Madikeri) में मानसून पूर्व (Pre-monsoon) मौसम के दौरान देखा गया. हालांकि, जब इस वीडियो की प्रामाणिकता की तकनीकी जांच की गई, तो सच कुछ और ही निकला. भौगोलिक ट्रैकिंग और फॉरेंसिक ऑडिट से पुष्टि हुई है कि यह वीडियो भारत का नहीं, बल्कि मध्य अमेरिका (Central America) के ग्वाटेमाला में हुए एक ज्वालामुखी विस्फोट का है. यह भी पढ़ें: Fact Check: क्या सच में मिला आग उगलने वाला 'ड्रैगन'? जानें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे छिपकली के वीडियो का पूरा सच

हाई-प्रोफाइल सोशल मीडिया हैंडल से फैली अफवाह

मडिकेरी के नाम पर इस वीडियो को प्रसारित करने का सिलसिला मंगलवार को उस समय तेज हुआ, जब एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कुछ प्रमुख क्षेत्रीय हस्तियों ने इसे साझा किया. सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता बृजेश कलप्पा ने इस नाटकीय क्लिप को अपने फॉलोअर्स के साथ साझा करते हुए कैप्शन में लिखा, "मडिकेरी, कोडागु जिले का एक दृश्य". इसके तुरंत बाद, स्थानीय कंटेंट क्रिएटर्स और क्षेत्रीय पेजों ने भी इसी विजुअल को कर्नाटक के पश्चिमी घाट का मानसूनी मौसम बताकर री-सर्कुलेट करना शुरू कर दिया.

वीडियो को चंद घंटों में हजारों व्यूज और लाइक्स मिल गए. हालांकि, तकनीक-प्रेमी नेटिजन्स और कर्नाटक के स्थानीय निवासियों ने तुरंत इस पर आपत्ति जताई. उन्होंने रेखांकित किया कि वीडियो में दिखने वाली खड़ी, नुकीली और पथरीली पहाड़ियां कोडागु या मडिकेरी की पहाड़ियों (Kodagu Hills) के भूगोल और परिदृश्य से बिल्कुल मेल नहीं खाती हैं.

मडिकेरी में भारी बिजली गिरने का दावा करने वाला वायरल वीडियो है फेक

ग्वाटेमाला का बिजली गिरने का वीडियो भ्रामक दावे के साथ वायरल (Photo Credits:X/@brijeshkalappa)

असली सच: ग्वाटेमाला के 'फायर ज्वालामुखी' का है वीडियो

जब इस वायरल वीडियो के की-फ्रेम्स को इंटरनेट पर रिवर्स इमेज सर्च के जरिए खंगाला गया, तो इसके मूल स्रोत का पता चला. यह फुटेज असल में मध्य अमेरिका के ग्वाटेमाला में ऐतिहासिक शहर एंटीगुआ के पास स्थित 'वोल्कैन डी फुएगो' (Volcán de Fuego - यानी आग का ज्वालामुखी) का है. यह वीडियो एक दुर्लभ वायुमंडलीय घटना को दर्शाता है जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'वोलकेनिक लाइटनिंग' (Volcanic Lightning) या 'डर्टी थंडरस्टॉर्म' कहा जाता है, जो ज्वालामुखी से राख के गुबार और आकाशीय बिजली के एक साथ मिलने से पैदा होती है.

इस घटना के समय अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों और वैज्ञानिक पत्रिकाओं ने भी इस फुटेज को प्रसारित किया था. ज्वालामुखी के भीतर अत्यधिक घर्षण के कारण चट्टान के टुकड़े, राख के कण और बर्फ के क्रिस्टल आपस में टकराते हैं, जिससे सकारात्मक और नकारात्मक इलेक्ट्रिक चार्ज अलग हो जाते हैं. इसी के परिणामस्वरूप पहाड़ों के ऊपर ऊपर की ओर उठती हुई ऐसी अद्भुत बिजली की नदियाँ दिखाई देती हैं. इंस्टाग्राम पर भी यह वीडियो 'चिमाल्टेनांगो, ग्वाटेमाला' के मूल विवरण के साथ मौजूद है.

यह ग्वाटेमाला का है, मडिकेरी का नहीं—एक X यूजर ने कहा

मौसम के वीडियो को रीसायकल करने का पुराना पैटर्न

साइबर सुरक्षा विश्लेषकों और स्वतंत्र फैक्ट-चेकर्स का कहना है कि भारत में प्री-मानसून और सक्रिय मानसून चक्र के दौरान सोशल मीडिया पर ऑनलाइन एंगेजमेंट और व्यूज बटोरने के लिए अक्सर अंतरराष्ट्रीय स्तर के नाटकीय मौसमी वीडियो को रीसायकल (दोबारा इस्तेमाल) करने का एक पुराना पैटर्न है. चूंकि मडिकेरी भारत का एक बेहद प्रसिद्ध हिल स्टेशन है जो भारी बारिश, घने कोहरे और बादलों के लिए जाना जाता है, इसलिए धोखेबाज़ों के लिए इस अंतरराष्ट्रीय वीडियो को मडिकेरी का बताना आसान हो गया.

दिलचस्प बात यह है कि ग्वाटेमाला के इसी वीडियो का भारत में गलत इस्तेमाल करने का यह कोई पहला मामला नहीं है. फैक्ट-चेक डेटाबेस के अनुसार, पूर्व में इसी वीडियो क्लिप को हिमाचल Pradesh के कुल्लू जिले में स्थित प्राचीन 'बिजली महादेव शिव मंदिर' पर गिरी दैवीय बिजली का दावा करके भी वायरल किया जा चुका है.

ग्वाटेमाला में बिजली के ज़बरदस्त तूफ़ानों ने पहाड़ों को रोशन कर दिया

 

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डिजिटल सतर्कता और वेरिफिकेशन बेहद जरूरी

इंटरनेट उपयोगकर्ताओं द्वारा वीडियो के वास्तविक भूगोल और अंतर को उजागर किए जाने के बाद, कई प्रमुख सोशल मीडिया यूज़र्स ने अपने पोस्ट पर कम्युनिटी नोट्स जोड़ दिए हैं या अपने कैप्शन में सुधार कर असली लोकेशन को अपडेट कर दिया है.

डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी ऐसी चमत्कारी या असाधारण पर्यावरणीय घटना के वीडियो को स्थानीय मानकर शेयर करने से पहले बुनियादी सर्च टूल्स के जरिए उसकी प्रामाणिकता की जांच अवश्य करें. अंतरराष्ट्रीय भौगोलिक घटनाओं को घरेलू आपदा या मौसम बताकर पेश करने से क्षेत्रीय मौसम के पैटर्न, भौगोलिक वास्तविकताओं और स्थानीय जोखिम के स्तरों को लेकर आम जनता के बीच भारी भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है.