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Solar Eclipse 2024: चैत्र नवरात्रि से कुछ समय पूर्व सूर्य ग्रहण लगना क्या दर्शाता है? क्या नवरात्रि-पूजा को सूर्य ग्रहण बाधित करेगा?

हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष 9 अप्रैल 2024 से चैत्र नवरात्रि प्रारंभ हो रही है, 17 अप्रैल 2024 को नवमी पूजन के साथ सम्पन्न हो जायेगी. लेकिन नवरात्रि से एक दिन पहले साल का पहला सूर्य ग्रहण भी लग रहा है.

Solar Eclipse 2024: चैत्र नवरात्रि से कुछ समय पूर्व सूर्य ग्रहण लगना क्या दर्शाता है? क्या नवरात्रि-पूजा को  सूर्य ग्रहण बाधित करेगा?
Solar Eclipse 2024

हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष 9 अप्रैल 2024 से चैत्र नवरात्रि प्रारंभ हो रही है, 17 अप्रैल 2024 को नवमी पूजन के साथ सम्पन्न हो जायेगी. लेकिन नवरात्रि से एक दिन पहले साल का पहला सूर्य ग्रहण भी लग रहा है. गौरतलब है कि इससे पूर्व साल का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन माह की पूर्णिमा यानी होली के दिन (25 मार्च 2024) लगा था. साल के इस पहले सूर्य ग्रहण को लेकर लोगों में तमाम भ्रांतियां हैं कि क्या सूर्य ग्रहण से किसी प्रकार का असर नवरात्रि पर्व पर पड़ सकता है या नहीं? साथ ही यह भी जानने की उत्कंठा है कि सूर्य ग्रहण भारत में दिखेगा या नहीं? अथवा क्या सूर्य ग्रहण के सूतक काल के नियम भारत में प्रभावी होंगे या नहीं? आइये जानते हैं, इन तमाम सवालों पर ज्योतिष शास्त्री संजय शुक्ला का क्या कहना है.

भारत में सूर्य ग्रहण का असर

ज्योतिष शास्त्री संजय शुक्ल के अनुसार इस वर्ष पूर्ण सूर्य ग्रहण रहेगा. यह सूर्य ग्रहण मीन राशि और रेवती नक्षत्र पर लग रहा है, भारतीय समयानुसार साल का यह पहला सूर्य ग्रहण 8 अप्रैल 2024 को 09.12 PM बजे शुरू होकर 02.22 AM (09 अप्रैल 2024) तक रहेगा. ग्रहण की कुल अवधि 5 घंटे 10 मिनट की होगी. लेकिन भारत में यह सूर्य ग्रहण नहीं दिखेगा. यह सूर्य ग्रहण मैक्सिको, कनाडा, पूरे अमेरिका, आयरलैंड, इंग्लैंड के कुछ हिस्सों तथा पश्चिम युरोप, अटलांटिक, आर्कटिक, में देखा जा सकता है. यह भी पढ़ें : Somvati Amavasya 2024: कब है सोमवती अमावस्या? जानें इसका महत्व, पूजा-विधि एवं कुछ उपाय जो आपकी मनोकामनाएं कर सकती हैं पूरी!

भारत में सूतक काल के नियम लागू होंगे

चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत के किसी हिस्से में भी नहीं दिखेगा, इसलिए यहां सूतक काल के कोई नियम लागू नहीं होंगे. हमारे धर्म शास्त्रों में सूतक काल को आध्यात्मिक मानदंडों के अनुसार अशुद्ध काल माना जाता है. इसमें किसी भी प्रकार के शुभ मंगल कार्य मसलन शुभविवाह, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश, जनेऊ संस्कार आदि नहीं किये जाते. सूतक काल के नियमों के अनुसार भगवान का मंदिर अथवा देवी-देवताओं का स्पर्श भी प्रतिबंधित होता है. इसके अलावा भी कई कार्य वर्जित होते हैं.

सूर्य ग्रहण का साया नवरात्रि अथवा कलश-पूजन पर पड़ेगा?

ज्योतिषाचार्य पंडित संजय शुक्ला के अनुसार साल 2024 का पहला सूर्य ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन चूंकि यह भारत में कहीं नहीं दिखेगा, इसलिए इससे संबंधित सूतक काल के नियम भी यहां लागू नहीं होंगे. ऐसे में किसी भी तरह की पूजा अथवा शुभ कार्य आदि किये जा सकते हैं. 8 अप्रैल 2024 की चैत्र अमावस्या की पूजा अथवा अगले दिन 9 अप्रैल 2024 की कलश स्थापना एवं चैत्र नवरात्रि के पहले दिन की पूजा भी निर्विरोध की जा सकती है. अलबत्ता गर्भवती महिलाओं को इस ग्रहण काल में भी संभल कर रहना चाहिए. उन्हें ग्रहण काल में लोहे अथवा किसी भी नुकीले धातु से दूर रहना चाहिए.

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 04, 2024 10:59 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).