गुरु पूर्णिमा 2026: अयोध्या के सरयू तट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, भक्तों ने लगाई आस्था की पवित्र डुबकी; देखें VIDEO

गुरु पूर्णिमा 2026 के अवसर पर उत्तर प्रदेश की धर्मनगरी अयोध्या में सरयू नदी के तट पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा. श्रद्धालुओं ने सरयू में आस्था की पवित्र डुबकी लगाकर गुरुजनों और भगवान राम का आशीर्वाद प्राप्त किया.

(Photo Credits ANI)

Guru Purnima 2026:  गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी अयोध्या में आध्यात्मिक उत्साह का माहौल है. बुधवार को तड़के से ही देश और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र सरयू नदी के घाटों पर पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाई. स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिरों में दर्शन-पूजन कर अपने गुरुओं और भगवान श्रीराम का आशीर्वाद लिया.

वैष्णव परंपरा और गुरु सेवा का विशेष महत्व

गुरु पूर्णिमा के दिन अयोध्या की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं का विशेष महत्व देखा जाता है. समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत करते हुए वैष्णव संप्रदाय के एक स्थानीय संत ने बताया कि गुरु की सेवा ही ईश्वर की सेवा के समान है.  यह भी पढ़े: http://Guru Purnima 2026 Wishes: गुरु पूर्णिमा पर गुरुजनों को इन हिंदी Quotes, WhatsApp Messages, Facebook Greetings के जरिए दें शुभकामनाएं

सरयू तट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

संत के अनुसार, अयोध्या में गुरुद्वारों व आश्रमों में जाकर अपने गुरुओं का दर्शन और पूजन करने की प्राचीन वैष्णव परंपरा है. श्रद्धालु आज अपने गुरुओं के समक्ष उपस्थित होकर गुरुमंत्र लेते हैं और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हैं.

आस्था की डूबकी

प्राण प्रतिष्ठा के बाद बढ़ा आध्यात्मिक उल्लास

इस वर्ष राम मंदिर में भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही पूरी धर्मनगरी राममय बनी हुई है. स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि शहर में आध्यात्मिक ऊर्जा चरम पर है. जिस प्रकार प्रभु राम की सेवा की जा रही है, उसी प्रकार गुरु और शिष्य के बीच के अटूट संबंध का उत्सव भी मनाया जा रहा है.

यह गुरु-शिष्य परंपरा अनादि काल से चली आ रही है और इस पावन अवसर पर शिष्य अपने गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं.

व्यास पूर्णिमा और धार्मिक मान्यताएं

गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. यह दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जिन्होंने वेदों का संकलन किया और महाभारत की रचना की. महर्षि वेदव्यास को आदिगुरु माना जाता है.

यह पर्व केवल सनातन धर्म में ही नहीं, बल्कि बौद्ध, जैन और सिख धर्म में भी पूरे सम्मान के साथ मनाया जाता है. बौद्ध धर्म में मान्यता है कि आज ही के दिन भगवान बुद्ध ने अपना पहला 'धर्मचक्र प्रवर्तन' यानी पहला उपदेश दिया था.

दान-पुण्य और वाराणसी की परंपरा

आषाढ़ पूर्णिमा के दिन स्नान और दान करने का विशेष फल बताया गया है. धार्मिक नगरी वाराणसी सहित देश के विभिन्न हिस्सों में इस दिन गुरु मंत्र लेने और गुरुओं को सामर्थ्य अनुसार उपहार भेंट करने की परंपरा है.

भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है, क्योंकि गुरु ही जीवन में अज्ञानता का अंधकार दूर कर सफलता और ज्ञान का मार्ग दिखाता है.

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