World Sanskrit Diwas 2026 Wishes: श्रावण पूर्णिमा पर मनाया जा रहा विश्व संस्कृत दिवस; शेयर करें ये Shlokas, Quotes, WhatsApp Messages और ग्रीटिंग्स
हिंदू पंचांग के अनुसार प्रतिवर्ष श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) के पावन अवसर पर 'विश्व संस्कृत दिवस' मनाया जाता है. वर्ष 2026 में यह दिवस 28 अगस्त को मनाया जा रहा है. इसका उद्देश्य भारत की सबसे प्राचीन शास्त्रीय भाषा संस्कृत के ऐतिहासिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक गौरव को संरक्षित व पुनर्जीवित करना है.
World Sanskrit Diwas 2026 Wishes: वैदिक ज्ञान, प्राचीन दर्शन और भारतीय सभ्यता की मूल आधारशिला मानी जाने वाली संस्कृत भाषा को समर्पित 'विश्व संस्कृत दिवस' (World Sanskrit Diwas) इस वर्ष 28 अगस्त 2026 (श्रावण पूर्णिमा) को देशभर में मनाया जा रहा है. इसे अंतरराष्ट्रीय संस्कृत दिवस और 'विश्व संस्कृत दिनम्' के रूप में भी जाना जाता है.
यह दिन प्राचीन इंडो-आर्यन भाषा संस्कृत के संरक्षण, आधुनिक समाज में इसके प्रचार-प्रसार और अकादमिक जगत में इसके वैज्ञानिक व साहित्यिक योगदान को रेखांकित करने का अवसर प्रदान करता है.
विश्व संस्कृत दिवस का ऐतिहासिक संदर्भ
विश्व संस्कृत दिवस मनाने की परंपरा की शुरुआत वर्ष 1969 में हुई थी.
- महर्षि पाणिनि को श्रद्धांजलि: भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने संस्कृत भाषा के महान व्याकरणविद और 'अष्टाध्यायी' के रचयिता महर्षि पाणिनि के योगदान को सम्मानित करने के लिए श्रावण पूर्णिमा के दिन संस्कृत दिवस मनाने की घोषणा की थी.
- प्रथम दिवस की थीम: 1969 में पहले संस्कृत दिवस का मुख्य विषय (Theme) 'संस्कृत: ज्ञान की भाषा' निर्धारित किया गया था.
- श्रावण पूर्णिमा का चयन: प्राचीन भारत में गुरुकुलों में श्रावण पूर्णिमा के दिन 'उपाकर्म' और 'श्रावणी' संस्कारों के साथ नए शैक्षणिक सत्र व वेदों के अध्ययन की शुरुआत होती थी, इसलिए इस पावन तिथि को संस्कृत दिवस के लिए चुना गया.
संस्कृत में दें शुभकामनाएं: लोकप्रिय श्लोक और अर्थ
विश्व संस्कृत दिवस के उपलक्ष्य में लोग सोशल मीडिया, वॉट्सऐप और संदेशों के माध्यम से संस्कृत के कालजयी श्लोक साझा कर एक-दूसरे को बधाई देते हैं.





- वसुधैव कुटुम्बकम्:
अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥
भावार्थ: यह मेरा है और यह पराया है, ऐसी सोच संकीर्ण मन वालों की होती है। उदार हृदय वाले व्यक्तियों के लिए तो संपूर्ण पृथ्वी ही एक परिवार है.
- विद्या और विनम्रता:
विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम्॥
भावार्थ: विद्या विनय प्रदान करती है, विनय से योग्यता आती है, योग्यता से धन की प्राप्ति होती है, और धर्म के मार्ग पर चलकर सुख मिलता है.
- कल्याणकारी कामना:
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥
भावार्थ: सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त रहें, सभी का कल्याण हो और कोई भी दुख का भागी न बने.
प्राचीन भाषा के संरक्षण और संवर्धन का मंच
आधुनिक तकनीकी और डिजिटल युग में संस्कृत दिवस का महत्व और अधिक बढ़ गया है:
- अकादमिक संस्थानों में प्रोत्साहन: यह दिवस स्कूलों, विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को संस्कृत पाठ्यक्रम और भाषा शिक्षण को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए प्रेरित करता है.
- सांस्कृतिक संगोष्ठियां: देशभर में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए संगोष्ठियां, वाद-विवाद प्रतियोगिताएं और सेमिनार आयोजित किए जाते हैं.
- विद्वानों का सम्मान: इस अवसर पर संस्कृत साहित्य, दर्शन, गणित और आयुर्वेद में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले भाषाविदों और विद्वानों को सम्मानित किया जाता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 28, 2026 07:00 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

