Kamika Ekadashi 2026: कामिका एकादशी कब है? जानें तिथि, शुभ पूजा मुहूर्त और व्रत पारण का समय

श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। भगवान विष्णु की कृपा और पापों से मुक्ति दिलाने वाले इस पवित्र व्रत की तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और पारण का समय जानें.

नई दिल्ली: सनातन धर्म में श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली कामिका एकादशी (Kamika Ekadashi) का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु की भक्ति को समर्पित यह व्रत वर्ष 2026 में रविवार, 9 अगस्त को रखा जाएगा.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कामिका एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पूर्व जन्म और इस जन्म के सभी पाप मिट जाते हैं तथा उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. पुराणों में वर्णित है कि इस दिन सच्चे मन से किया गया उपवास काशी या गंगा स्नान के समान फल प्रदान करता है. यह भी पढ़ें: Ashadhi Ekadashi 2026 Messages In Marathi: आषाढ़ी एकादशी के इन मराठी WhatsApp Wishes, Quotes, GIF Greetings को भेजकर दें शुभकामनाएं

कामिका एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, कामिका एकादशी तिथि का प्रारंभ और समापन इस प्रकार है:

उदयातिथि के अनुसार, एकादशी का व्रत 9 अगस्त को ही रखा जाएगा.

व्रत पारण का समय (Parana Muhurat)

एकादशी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए द्वादशी तिथि के भीतर ही पारण करना अनिवार्य माना जाता है.

पूजा विधि और नियम

कामिका एकादशी के दिन श्रद्धालु निम्नलिखित धार्मिक अनुष्ठानों का पालन करते हैं:

  1. प्रातः स्नान व संकल्प: सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करें या पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें.
  2. श्री हरि विष्णु पूजन: भगवान विष्णु के 'श्रीधर' स्वरूप की पूजा करें. उन्हें पंचामृत, ताजे फूल, फल, दूध और मुख्य रूप से तुलसी के पत्ते अर्पित करें। भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है.
  3. मंत्र जाप व कथा: दिन भर "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें और कामिका एकादशी की व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें.
  4. रात्रि जागरण: कई श्रद्धालु रात्रि में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करते हुए जागरण करते हैं और भजन-कीर्तन में समय व्यतीत करते हैं.

कामिका एकादशी का धार्मिक महत्व

कामिका एकादशी के महत्व का वर्णन स्वयं ब्रह्मा जी ने देवर्षि नारद को तथा भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाया था. इस दिन दान-पुण्य करने, ब्राह्मणों को भोजन कराने और गरीबों की सहायता करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.

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