Ganesh Chaturthi 2026 Wishes: गणेश चतुर्थी के इन भक्तिमय हिंदी Quotes, WhatsApp Messages, Facebook Greetings को भेजकर दें शुभकामनाएं
सनातन पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला गणेश जन्मोत्सव यानी 'गणेश चतुर्थी' इस वर्ष 14 सितंबर 2026 से श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हो रहा है. भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है. इस अवसर पर घरों और पंडालों में मूर्ति स्थापना के साथ ही श्रद्धालु एक-दूसरे को पारंपरिक व प्रेरक संदेशों के जरिए गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं प्रेषित करते हैं.
Ganesh Chaturthi 2026 Wishes in Hindi: ज्ञान, बुद्धि और समृद्धि के दाता भगवान श्रीगणेश के जन्मोत्सव का पावन पर्व गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) इस वर्ष 14 सितंबर 2026 को देश भर में धूमधाम से मनाया जा रहा है. हिंदू पंचांग के भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर पड़ने वाला यह पर्व दस दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत का प्रतीक है.
इस महापर्व का समापन 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा की प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ होगा. मान्यता है कि इन दस दिनों के दौरान भगवान गणेश पृथ्वी पर अपने भक्तों के बीच उपस्थित रहकर उनके कष्टों का निवारण करते हैं.
प्रियजनों को भेजने के लिए हिंदी शुभकामना संदेश और कोट्स
गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर अपने परिजनों, मित्रों और शुभचिंतकों को बधाई देने के लिए लोकप्रिय संदेश.





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संदेश 1:
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं!
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संदेश 2:
गणेश जी का आशीर्वाद आपके जीवन के सभी कष्टों को दूर करे,
आपके घर-परिवार में सुख, समृद्धि और शांति का वास रहे.
Happy Ganesh Chaturthi 2026!
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संदेश 3:
रिद्धि-सिद्धि के दाता आपके हर कार्य को सफल बनाएं,
आपके जीवन में नई ऊर्जा और प्रगति का संचार हो.
गणेशोत्सव की कोटि-कोटि मंगलकामनाएं!
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संदेश 4:
पग में फूल खिलें, हर खुशी आपको मिले,
कभी न हो दुखों से सामना, बाप्पा पूरी करें हर मनोकामना.
हैप्पी गणेश चतुर्थी!
प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता के जन्मोत्सव की मान्यता
सनातन परंपरा में भगवान गणेश को सभी देवों में प्रथम पूज्य का स्थान प्राप्त है:
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शुभ कार्यों का आरंभ: किसी भी नए व्यापार, भवन निर्माण, गृह प्रवेश या मांगलिक अनुष्ठान की शुरुआत से पहले गणपति की पूजा अनिवार्य मानी जाती है, ताकि कार्य बिना किसी बाधा के पूर्ण हो सके.
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जन्मोत्सव का प्रसंग: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के पावन दिन ही माता पार्वती ने अपने मैल से बालक गणेश का निर्माण कर उसमें प्राण प्रतिष्ठा की थी, जिसके उपरांत महादेव ने उन्हें समस्त गणों का अधिपति (गणपति) और विघ्नहर्ता घोषित किया.
घरों और पंडालों में 10 दिनों तक उत्सव का माहौल
विशेष रूप से महाराष्ट्र समेत देश के विभिन्न राज्यों में गणेशोत्सव की भव्यता देखते ही बनती है:
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स्थापना और उपासना: चतुर्थी तिथि पर शुभ मुहूर्त में भक्त अपने घरों और सार्वजनिक पूजा पंडालों में गणपति की मिट्टी की प्रतिमाओं की स्थापना करते हैं.
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सेवा और विदाई: लगातार दस दिनों तक विधि-विधान से दैनिक पूजन, मोदक-लड्डू का भोग और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है. इसके बाद अनंत चतुर्दशी पर इस विश्वास के साथ बाप्पा को विदा किया जाता है कि वे अगले वर्ष पुनः जल्दी पधारेंगे.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 13, 2026 02:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

