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Solar Eclipse Do's and Don'ts: सूर्य ग्रहण के दौरान श्रावण अमावस्या पर करें ये खास काम, बरतें सावधानियां

12 अगस्त 2026 को श्रावण अमावस्या पर दुर्लभ पूर्ण सूर्य ग्रहण लग रहा है। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा। फिर भी, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ विशेष नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण माना जाता है। इस लेख में जानें सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें, साथ ही श्रावण अमावस्या के पावन अनुष्ठानों और ज्योतिषीय प्रभावों.

Solar Eclipse Do's and Don'ts: सूर्य ग्रहण के दौरान श्रावण अमावस्या पर करें ये खास काम, बरतें सावधानियां
(Photo Credits Pixabay)

Surya Grahan Do's and Don'ts: खगोल विज्ञान और भारतीय ज्योतिष के अनुसार 12 अगस्त 2026 का दिन बेहद खास होने वाला है। इस दिन श्रावण मास की हरियाली अमावस्या के साथ-साथ साल का दूसरा सूर्य ग्रहण, जो कि एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लगने जा रहा है। यह एक दुर्लभ संयोग है, जो धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से026  महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन फिर भी, कई भारतीय परिवार पारंपरिक मान्यताओं और नियमों का पालन करते हैं। आइए जानते हैं इस खास दिन पर क्या करें और क्या न करें, साथ ही श्रावण अमावस्या के प्रमुख अनुष्ठानों के बारे में।

सूर्य ग्रहण 2026: कब और कहां दिखेगा?

12 अगस्त 2026 को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार रात 09 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगा। ग्रहण अपने चरम पर रात 11 बजकर 17 मिनट के आसपास होगा। यह 13 अगस्त 2026 की सुबह 04 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगा। यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन भारत में रात का समय होने के कारण यह अदृश्य रहेगा। इसलिए, भारत में इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।

यह पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से ग्रीनलैंड, आइसलैंड, अटलांटिक महासागर, आर्कटिक, उत्तरी स्पेन, पुर्तगाल और उत्तरी रूस के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। कनाडा, उत्तरी-पश्चिमी अफ्रीका और यूरोप के कई क्षेत्रों में इसे आंशिक रूप से देखा जा सकेगा।

श्रावण अमावस्या 2026: तिथि और महत्व

श्रावण मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या या श्रावणी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष यह 12 अगस्त, बुधवार को मनाई जाएगी। वैदिक पंचांग के अनुसार, श्रावण कृष्ण अमावस्या तिथि 12 अगस्त 2026 को देर रात 01 बजकर 53 मिनट पर शुरू होगी और इसी दिन रात 11 बजकर 07 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर हरियाली अमावस्या 12 अगस्त को ही मनाई जाएगी।

यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना, पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और पितरों का तर्पण करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हरियाली अमावस्या प्रकृति और पर्यावरण से प्रेम का भी प्रतीक है, जिस दिन वृक्षारोपण का विशेष महत्व है।

सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें (भारत में अदृश्य होने पर भी)

भले ही भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई न दे और सूतक काल मान्य न हो, फिर भी जो लोग धार्मिक आस्था रखते हैं, वे अपनी परंपराओं के अनुसार कुछ नियमों का पालन कर सकते हैं।

क्या न करें:

  • ग्रहण काल के दौरान भोजन पकाने या खाने से बचें। खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालकर रखें।
  • गर्भवती महिलाएं इस दौरान घर से बाहर न निकलें, नुकीली वस्तुओं का प्रयोग न करें और सोने से बचें।
  • देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श न करें।
  • बिना सुरक्षा के सीधे सूर्य ग्रहण को देखने का प्रयास न करें। (हालांकि भारत में यह दिखेगा नहीं)
  • गुस्से में कोई बड़ा फैसला न लें और बेवजह के विवादों से बचें।
  • बड़े आर्थिक फैसले सोच-समझकर करें।

क्या करें:

  • ग्रहण काल के दौरान मंत्र जाप, ध्यान और ईश्वर का स्मरण करना शुभ माना जाता है।
  • गर्भवती महिलाएं अपने पास कुश और गंगाजल रखें और भगवान का नाम जपें।
  • ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें और घर की शुद्धि करें।
  • अगले दिन सुबह जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र दान करना शुभ फलदायी होता है।
  • ग्रहण के समय मन को शांत रखने और सकारात्मक संकल्प लेने का प्रयास करें।

श्रावण अमावस्या के विशेष अनुष्ठान

श्रावण अमावस्या के दिन किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठान इस प्रकार हैं:

  • पवित्र स्नान: इस दिन पवित्र नदियों, सरोवरों या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना विशेष फलदायी माना जाता है।
  • पितृ तर्पण: पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करना चाहिए।
  • शिव-पार्वती पूजा: भगवान शिव को जल अर्पित करें और बेलपत्र चढ़ाएं। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जाप करें। माता पार्वती की पूजा भी करें।
  • वृक्षारोपण: हरियाली अमावस्या होने के कारण पीपल, बरगद, नीम, तुलसी या केले का पौधा लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • दान-पुण्य: अपनी क्षमतानुसार गरीब और जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।
  • जीव सेवा: आटे की गोलियां बनाकर मछलियों को खिलाएं और चींटियों के लिए शक्कर मिश्रित आटा डालें।
  • सुहाग सामग्री का वितरण: सुहागिन स्त्रियां एक-दूसरे को हरी चूड़ियां, सिंदूर और बिंदी बांट सकती हैं।

ज्योतिषीय प्रभाव और सावधानियां

भले ही ग्रहण भारत में अदृश्य हो, ज्योतिषीय गणना के अनुसार इसका कुछ राशियों पर प्रभाव देखा जा सकता है। विशेष रूप से कर्क, मकर, मेष और तुला राशि के जातकों को इस अवधि में वाणी, निवेश और आर्थिक मामलों में अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। ज्योतिष शास्त्रियों का मानना है कि इस दौरान भावनाओं में बहकर कोई बड़ा निर्णय लेने से बचना चाहिए। धैर्य और सूझबूझ से काम लेना हितकर होगा।

श्रावण अमावस्या और सूर्य ग्रहण का यह दुर्लभ संयोग हमें आध्यात्मिक चिंतन और पारंपरिक मूल्यों को बनाए रखने का अवसर प्रदान करता है। भले ही ग्रहण प्रत्यक्ष रूप से दिखाई न दे, अपनी आस्था और संस्कृति के प्रति जागरूक रहना और नियमों का पालन करना हमेशा ही शुभ फलदायी होता है।

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 11, 2026 08:51 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).