Parsi New Year 2026: कब मनाया जाएगा पारसी नववर्ष नवरोज? जानें शाहंशाही कैलेंडर, इतिहास और परंपराएं
भारत में पारसी समुदाय रविवार, 16 अगस्त 2026 को नवरोज़ का पर्व मनाएगा। शाहंशाही कैलेंडर के अनुसार मनाए जाने वाले इस नववर्ष के इतिहास, धार्मिक महत्व और प्रमुख परंपराओं के बारे में विस्तार से जानें.
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Parsi New Year 2026: भारत में पारसी समुदाय रविवार, 16 अगस्त 2026 को अपना नया साल यानी नवरोज़ (Navroz) मनाएगा。 यह पर्व मुख्य रूप से महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में उत्साह के साथ आयोजित किया जाता है.
वैश्विक स्तर पर मार्च में वसंत विषुव (Spring Equinox) के दौरान मनाए जाने वाले नवरोज़ के विपरीत, भारत में पारसी समाज प्राचीन शाहंशाही कैलेंडर (Shahenshahi Calendar) का पालन करता है, जिसके कारण यहां यह त्योहार अगस्त के महीने में पड़ता है. यह भी पढ़ें: Sawan Shivratri 2026 Wishes: सावन शिवरात्रि पर अपनों को इन भक्तिमय WhatsApp Messages, Quotes, Facebook Greetings के जरिए दें शुभकामनाएं
नवरोज़ का इतिहास और धार्मिक महत्व
'नवरोज़' शब्द फ़ारसी भाषा के दो शब्दों 'नव' (नया) और 'रोज़' (दिन) से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है "नया दिन". इस पर्व का इतिहास लगभग 3,000 वर्ष पुराना है और यह जोरोस्ट्रियन धर्म (पारसी धर्म) के संस्थापक पैगंबर ज़राथुस्त्र की शिक्षाओं से जुड़ा हुआ है.
यह त्योहार नवीनीकरण, पुनर्जन्म और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. पारसी समुदाय के लोग इस दिन बीते वर्ष के प्रति आभार व्यक्त करते हैं और नए साल में सकारात्मकता व नई शुरुआत का संकल्प लेते हैं. पौराणिक मान्यता के अनुसार, फ़ारस के राजा जमशेद की याद में भी यह कैलेंडर मनाया जाता है.
मुख्य रीति-रिवाज और परंपराएं
नवरोज के अवसर पर पारसी समुदाय द्वारा कई पार पारंपरिक अनुष्ठान किए जाते हैं:
घर की सफाई और सजावट: नए साल से पहले घरों की गहन सफाई की जाती है और प्रवेश द्वारों पर रंगोली व फूलों के तोरण लगाए जाते हैं.
अग्नि मंदिर (अग्यारी) में पूजा: लोग पारंपरिक नए वस्त्र पहनकर अग्यारी (Fire Temple) जाते हैं. वहां चंदन, फल और फूल अर्पित कर पवित्र अग्नि की उपस्थिति में जशन (Jashan) प्रार्थना आयोजित की जाती है.
हफ़्त-सीन टेबल: कई परिवारों में 'हफ़्त-सीन' मेज सजाई जाती है, जिस पर फ़ारसी भाषा के 'S' अक्षर से शुरू होने वाली सात प्रतीकात्मक वस्तुएं (जैसे सेब, लहसुन, सिरका आदि) रखी जाती हैं, जो स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक हैं.
पारंपरिक व्यंजन: इस दिन घरों में धनसाक (Dhansak), पात्रा नी माछी (Patra ni Machhi), सेव और रावो जैसे पारंपरिक पारसी व्यंजन तैयार किए जाते हैं.
पतेती (Pateti) का महत्व
नवरोज से ठीक एक दिन पहले 'पतेती' का पर्व मनाया जाता है. पतेती मूल रूप से पश्चाताप का दिन होता है, जिसमें व्यक्ति वर्ष भर में हुई अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगता है और शुद्ध मन से नए साल में प्रवेश करने का संकल्प लेता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 10, 2026 08:36 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

