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Kajari Teej 2026 Wishes: कजरी तीज के इन शानदार हिंदी WhatsApp Messages, Quotes, Facebook Greetings के जरिए दें शुभकामनाएं

अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ मनाया जाने वाला 'कजरी तीज' (सातुड़ी या कजली तीज) का पावन पर्व इस वर्ष 31 अगस्त 2026, सोमवार को मनाया जा रहा है. भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ने वाला यह व्रत रक्षाबंधन के तीन दिन बाद और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से पांच दिन पहले आता है.

Kajari Teej 2026 Wishes: कजरी तीज के इन शानदार हिंदी WhatsApp Messages, Quotes, Facebook Greetings के जरिए दें शुभकामनाएं
कजरी तीज 2026 (Photo Credits: File Image)

Kajari Teej 2026 Wishes in Hindi:  सनातन परंपरा में सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला कजरी तीज (Kajari Teej) का व्रत वर्ष 2026 में 31 अगस्त, सोमवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. इसे उत्तर और पश्चिमी भारत के कई क्षेत्रों में बड़ी तीज, कजली तीज और सातुड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है.

सावन की हरियाली तीज के बाद भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को यह पर्व मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान से व्रत और पूजन करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है और कुंवारी कन्याओं को सुयोग्य जीवनसाथी का आशीर्वाद मिलता है.

कजरी तीज का धार्मिक महत्व और तिथियां

पंचांग के अनुसार, कजरी तीज का व्रत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है. यह पर्व आमतौर पर रक्षाबंधन के तीसरे दिन और जन्माष्टमी से पहले पड़ता है.

  • व्रत का संकल्प: सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और पारिवारिक सुख-शांति के लिए पूरे दिन निर्जला या फलाहारी उपवास रखती हैं.
  • शिव-पार्वती उपासना: धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन माता पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था.
  • क्षेत्रीय विस्तार: यह त्योहार राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और गुजरात में विशेष लोक परंपराओं, कजरी गीतों और पारंपरिक व्यंजनों के साथ मनाया जाता है.

सखी-सहेलियों और प्रियजनों को भेजने के लिए शुभकामना संदेश (Wishes & Greetings)

इस पावन पर्व पर महिलाएं और परिजन एक-दूसरे को डिजिटल माध्यमों से शुभकामनाएं प्रेषित कर सकते हैं.

1- तीज का व्रत है बहुत ही मधुर प्यार का,
दिल की श्रद्धा और सच्चे विश्वास का,
बिछिया पैरों में हो,
माथे पर बिंदिया...
कजरी तीज की शुभकामनाएं

कजरी तीज 2026 (Photo Credits: File Image)

2- सुहागनों का जोड़ा बना रहे,
कन्याओं को उनका मनचाहा जीवनसाथी मिले,
निर्जला व्रत कर करें कजरी तीज का पाठ,
घर-परिवार सदा रहेगा खुशहाल.
कजरी तीज की शुभकामनाएं

कजरी तीज 2026 (Photo Credits: File Image)

3- चूड़ी की खनक, बिंदी की चमक,
हवा में घुली खुशबू की दमक,
सोलह श्रृंगार से सज गई हर गोरी की मांग,
आज तीज पर दिखेगी सभी की शान.
कजरी तीज की शुभकामनाएं

कजरी तीज 2026 (Photo Credits: File Image)

4- कजरी तीज का पावन त्योहार है,
सुहागन ने किया सोल​ह श्रृंगार है,
अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला व्रत है,
आप को माता पार्वती का वरदान है,
रहें सदा सुहागन, हमेशा शिव का आशीर्वाद है.
कजरी तीज की शुभकामनाएं

कजरी तीज 2026 (Photo Credits: File Image)

5- तीज आई, हर्ष छाया,
रंग-बिरंगे परिधान सजाए,
सखियों संग नाचे गाएं,
सपनों में भी तीज मनाएं.
कजरी तीज की शुभकामनाएं

कजरी तीज 2026 (Photo Credits: File Image)

  • "माता पार्वती और भगवान शिव का आशीर्वाद आपके दांपत्य जीवन में सदैव मिठास और खुशहाली बनाए रखे. कजरी तीज 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं!"
  • "हाथों में रची रहे मेहंदी, मांग में सजता रहे सिंदूर; कजरी तीज का यह पावन पर्व आपके जीवन में लाए अपार खुशियां."
  • "सत्तू की मिठास, नीमड़ी माता की कृपा और शिव-गौरी का वरदान आपके परिवार को अखंड सौभाग्य प्रदान करे. शुभ कजली तीज!"

शाम के समय नीमड़ी माता और शिव-पार्वती की पूजा विधि

कजरी तीज के दिन शाम (गोधूलि बेला) के समय सामूहिक रूप से पूजा का विशेष विधान है:

  1. पूजा स्थल की तैयारी: पूजा स्थल पर चौकी स्थापित कर उस पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं और भगवान शिव-माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें.
  2. नीम की टहनी (नीमड़ी माता) की स्थापना: कई क्षेत्रों में मिट्टी की पाल बनाकर उसमें पानी और कच्चा दूध भरा जाता है और नीम की डाल रोपी जाती है.
  3. श्रृंगार और अर्पण: नीमड़ी माता और माता पार्वती को कुमकुम, हल्दी, अक्षत, काजल और मेहंदी की तेरह-तेरह बिंदियां लगाई जाती हैं तथा लाल चुनरी और सुहाग सामग्री अर्पित की जाती है.
  4. कथा श्रवण: पूजा के बाद कजरी तीज/सातुड़ी तीज की पारंपरिक व्रत कथा का श्रवण किया जाता है.

चंद्रमा को अर्घ्य और सत्तू से पारण के नियम

कजरी तीज का व्रत सूर्यास्त के तुरंत बाद नहीं, बल्कि रात में चंद्रोदय के बाद खोला जाता है:

  • चंद्र दर्शन और अर्घ्य: रात्रि में चंद्रमा के उदय होने पर चांदी के सिक्के, दूर्वा, अक्षत और जल से चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है.
  • सातुड़ी (सत्तू) का भोग: राजस्थान और मध्य भारत में सत्तू (चने, जौ या गेहूं के आटे में घी और खांड मिलाकर बना पिंड) का विशेष भोग लगाया जाता है.
  • पारण: चंद्रमा की पूजा और परिवार के बड़ों का आशीर्वाद लेने के बाद महिलाएं सत्तू या फलाहार ग्रहण कर व्रत का पारण करती हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 30, 2026 03:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).