Ganga Dussehra 2026 Wishes: गंगा दशहरा पर इन हिंदी WhatsApp Messages, Quotes, Facebook Greetings को भेजकर अपनों को दें शुभकामनाएं
सनातन धर्म में विशेष स्थान रखने वाला गंगा दशहरा का पर्व इस साल 25 मई 2026 को मनाया जा रहा है. मान्यता है कि इसी पावन तिथि पर मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था. इस विशेष अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए गंगा स्नान, पूजा-अर्चना और दान का विशेष विधान है. प्रियजनों को बधाई देने के लिए यहां खूबसूरत संदेश भी साझा किए गए हैं.
Ganga Dussehra 2026 Wishes In Hindi: हिंदू धर्म में वर्षभर मनाए जाने वाले तमाम त्योहारों और व्रतों में गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) का एक अत्यंत विशिष्ट और पावन महत्व बताया गया है. हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है. इस साल यह पवित्र त्योहार आगामी 25 मई 2026, सोमवार को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पतितपावनी और मोक्षदायिनी मां गंगा (Maa Ganga) इसी दिन स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, इसलिए इस दिन गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाने से मनुष्यों के कायिक, वाचिक और मानसिक पापों का नाश होता है.
पौराणिक कथाओं और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हस्त नक्षत्र के शुभ संयोग में मां गंगा का पृथ्वी पर आगमन हुआ था. सूर्यवंश के प्रतापी राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों (कपिल मुनि के श्राप से भस्म हुए राजा सगर के 60 हजार पुत्रों) की आत्मा की शांति और उनके मोक्ष के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की थी.
उनकी अनन्य भक्ति और तप से प्रसन्न होकर ही मां गंगा धरती पर आने के लिए तैयार हुई थीं. चूंकि मां गंगा को पृथ्वी पर लाने का श्रेय पूरी तरह से राजा भागीरथ को जाता है, इसलिए उन्हें 'भागीरथी' के नाम से भी संबोधित किया जाता है. पृथ्वी पर उनके तीव्र वेग को संभालने के लिए देवाधिदेव महादेव ने उन्हें अपनी जटाओं में स्थान दिया था.





गंगा दशहरा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को दान देने का विशेष महत्व है. इस दिन की मुख्य धार्मिक गतिविधियां इस प्रकार हैं:
- पवित्र स्नान: श्रद्धालु सूर्योदय के समय गंगा नदी में स्नान करते हैं. जो लोग किन्हीं कारणों से गंगा तट पर नहीं पहुंच पाते, वे अपने घर पर ही सामान्य पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करते हैं.
- अभिषेक और पूजन: स्नान के पश्चात घर के मंदिर में देवी-देवताओं का गंगाजल से अभिषेक किया जाता है. इसके बाद मां गंगा की प्रतिमा या चित्र के समक्ष धूप-दीप प्रज्वलित कर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.
- महाआरती और भोग: इस दिन गंगा घाटों पर भव्य महाआरती का आयोजन होता है. मां गंगा को मौसमी फलों और मिठाइयों का भोग अर्पित करके पूजा संपन्न की जाती है. इस दिन सत्तू, मटका, तरबूज और पंखे जैसी शीतलता प्रदान करने वाली वस्तुओं का दान अत्यंत शुभ माना गया है.
(The above story first appeared on LatestLY on May 24, 2026 03:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

