Eid Milad-Un-Nabi 2026: भारत में ईद मिलाद-उन-नबी कब, क्यों और कैसे मनाया जाएगा? यहां पढ़ें खबर
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, सुन्नी समुदाय के लोग रबी-उल-अव्वल महीने की 12वीं तारीख को पैगंबर साहब का जन्मोत्सव मनाते हैं, जबकि शिया समुदाय 17वीं रबी-उल-अव्वल को यह पर्व मनाता है. इस वर्ष रबी-उल-अव्वल महीने की शुरुआत 15 अगस्त से होने के कारण 12वीं तारीख 26 अगस्त को पड़ रही है.
Eid Milad-Un-Nabi 2026: पैगंबर साहब का जन्मोत्सव मनाते हैं, जबकि शिया समुदाय 17वीं रबी-उल-अव्वल को यह पर्व मनाता है. इस वर्ष रबी-उल-अव्वल महीने की शुरुआत 15 अगस्त से होने के कारण 12वीं तारीख 26 अगस्त को पड़ रही है. यह भी पढ़े: http://Eid Milad-Un-Nabi 2025 Wishes: ईद-मिलाद-उन-नबी मुबारक! प्रियजनों संग शेयर करें ये हिंदी WhatsApp Messages, Shayaris और Facebook Greetings
ईद मिलाद-उन-नबी का महत्व और उद्देश्य
यह अवसर ईस्वी सन 570 में मक्का में जन्मे पैगंबर मोहम्मद साहब के जीवन, उनकी शिक्षाओं और आध्यात्मिक विरासत को याद करने का दिन है. मुस्लिम समुदाय के लिए यह दिन केवल उत्सव का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और भक्ति का प्रतीक है.
इस्लामिक विद्वान इस दिन पैगंबर साहब के बताए आदर्शों—जैसे दया, दान (सदका), ईमानदारी, न्याय और भाईचारे को अपने दैनिक जीवन में उतारने पर जोर देते हैं.
देशभर में इस तरह आयोजित होंगे कार्यक्रम
भारत में ईद मिलाद-उन-नबी का पर्व धार्मिक सादगी और सामुदायिक परंपराओं के साथ मनाया जाता है:
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विशेष इबादत और मिलाद महफिलें: मस्जिदों और सामुदायिक केंद्रों में रात भर विशेष प्रार्थना सभाएं, कुरान की तिलावत और 'मिलाद महफिलें' आयोजित की जाती हैं, जिनमें धर्मगुरु पैगंबर साहब के जीवन और उनके संदेशों पर प्रकाश डालते हैं.
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नात ख्वानी: श्रद्धालु दिन और रात के दौरान पैगंबर साहब की शान में नातें (प्रशंसा काव्य) गुनगुनाते हैं.
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शांतिपूर्ण जुलूस: देश के विभिन्न शहरों में जुलूस निकाले जाते हैं, जिनमें हरे झंडे, बैनर और सजी हुई झांकियां शामिल होती हैं, जो शांति और आध्यात्मिक नवीनीकरण का संदेश देती हैं.
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दान-पुण्य और लंगर: इस दिन दान-पुण्य (सदका) करने का विशेष महत्व है. विभिन्न कमेटियों और परिवारों द्वारा गरीबों व जरूरतमंदों के बीच मुफ्त भोजन, फल और मिठाइयां बांटी जाती हैं.
पर्व के मुख्य दिन से पहले ही देश भर की प्रमुख मस्जिदों, इमारतों और घरों को हरी लाइटों व सजावटी झंडियों से रोशन किया जाता है.