Eid al-Adha 2026 Mubarak Wishes: बकरीद के इन हिंदी Quotes, WhatsApp Messages, Facebook Greetings के जरिए अपनों को दें ईद-उल-अजहा की मुबारकबाद
ईद-उल-अजहा मुबारक 2026 (Photo Credits: File Image)

Eid al-Adha 2026 Mubarak Wishes In Hindi: पवित्र महीने रमजान (Ramzan) के समापन और मीठी ईद (ईद-उल-फितर) मनाए जाने के करीब 70 दिन बाद दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय के लोग बकरीद (Bakrid) का त्योहार बेहद धूमधाम से मनाते हैं. इसे इस्लामिक जगत में ईद-उल-अजहा (Eid-al-Adha), बकरा ईद या कुर्बानी की ईद भी कहा जाता है. इस साल भारत में यह पर्व  28 मई 2026 को मनाया जा रहा है. यह त्योहार मुख्य रूप से पैगंबर इब्राहिम के अद्वितीय त्याग, गहरे विश्वास और अल्लाह के प्रति उनके समर्पण की याद में मनाया जाता है, जिसका इस्लाम धर्म में अत्यधिक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व है. इस्लामिक चंद्र कैलेंडर के अनुसार, साल के 12वें और आखिरी महीने 'धू-अल-हिज्जाह' (Dhu al-Hijjah) के चांद का दीदार होने के बाद इस महीने के 10वें दिन ईद-उल-अजहा का पर्व मनाया जाता है.

इस दिन सुबह के समय मुस्लिम समाज के लोग मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष नमाज (सलात अल-ईद) अदा करने के लिए एकत्रित होते हैं. नमाज के संपन्न होने के बाद सभी लोग एक-दूसरे के गले मिलकर पारंपरिक रूप से "बकरीद मुबारक" कहते हैं और सुख-शांति की दुआ मांगते हैं.

1- ईद लेकर आती है ढ़ेर सारी खुशियां,
ईद मिटा देती है इंसान में दूरियां,
ईद है खुदा का एक नायाम तबारोक,
इसीलिए कहते हैं ईद मुबारक.
ईद-उल-अजहा मुबारक

ईद-उल-अजहा मुबारक 2026 (Photo Credits: File Image)

2- मुबारक मौका अल्‍लाह ने अता फरमाया,
एक बार फिर बंदगी की राह पे चलाया,
अदा करना अपना फर्ज तुम खुदा के लिए,
खुशी से भरी हो ईद-उल-अजहा आपके लिए.
ईद-उल-अजहा मुबारक

ईद-उल-अजहा मुबारक 2026 (Photo Credits: File Image)

3- जिंदगी का हर पल खुशियों से कम न हो,
आप का हर दिन ईद के दिन से कम न हो,
ऐसा ईद का दिन आपको हमेशा नसीब हो,
जिसमे कोई दुख और कोई गम न हो.
ईद-उल-अजहा मुबारक

ईद-उल-अजहा मुबारक 2026 (Photo Credits: File Image)

4- समंदर को उसका किनारा मुबारक,
चांद को सितारा मुबारक,
फूलों को उसकी खुशबू मुबारक,
दिल को उसका दिलदार मुबारक,
आपको और आपके परिवार को ईद मुबारक.
ईद-उल-अजहा मुबारक

ईद-उल-अजहा मुबारक 2026 (Photo Credits: File Image)

5- चुपके से चांद की रौशनी छू जाए आपको,
धीरे से ये हवा कुछ कह जाए आपको,
दिल से जो चाहते हो मांग लो खुदा से,
हमारी दुआ हैं इस ईद वो मिल जाए आपको.
ईद-उल-अजहा मुबारक

ईद-उल-अजहा मुबारक 2026 (Photo Credits: File Image)

बकरीद के इस पावन पर्व के पीछे एक बेहद ऐतिहासिक और प्रेरणादायक कथा जुड़ी हुई है. इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, अल्लाह ने पैगंबर इब्राहिम के विश्वास और निष्ठा की परीक्षा लेने के लिए उनसे उनकी सबसे प्रिय वस्तु की कुर्बानी मांगी थी. पैगंबर इब्राहिम अपने बेटे हजरत इस्माइल से बेपनाह मोहब्बत करते थे, लेकिन अल्लाह के आदेश को सर्वोपरि मानते हुए उन्होंने अपने बेटे की ही कुर्बानी देने का कठिन फैसला कर लिया.

कहा जाता है कि जब पैगंबर इब्राहिम आंखों पर पट्टी बांधकर अपने बेटे की कुर्बानी देने जा रहे थे, तब उनकी अटूट निष्ठा को देखकर अल्लाह ने उनके बेटे को सुरक्षित बचा लिया और उसकी जगह एक बकरे (दुंबे) को प्रतिस्थापित कर दिया. पैगंबर इब्राहिम के इसी महान त्याग, समर्पण और बलिदान को याद रखने के लिए तब से इस पर्व को मनाने और सांकेतिक रूप से जानवरों की कुर्बानी देने की परंपरा चली आ रही है.

कुर्बानी के बाद मिलने वाले गोश्त (मांस) को लेकर भी इस्लाम में विशेष सामाजिक नियम बनाए गए हैं. इस गोश्त को अनिवार्य रूप से तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है:

  • पहला हिस्सा: अपने परिवार और सगे-संबंधियों के लिए रखा जाता है.
  • दूसरा हिस्सा: दोस्तों, परिचितों और पड़ोसियों में वितरित किया जाता है.
  • तीसरा हिस्सा: समाज के गरीब, जरूरतमंद और असहाय लोगों को दान (खैरात) किया जाता है, ताकि त्योहार की खुशी में हर वर्ग शामिल हो सके.