What Is Samudra Manthan Scheme? क्या है 'समुद्र मंथन' योजना? जानें कैसे भारत हर साल बचाएगा 1 लाख करोड़ रुपये और घटाएगा तेल आयात पर निर्भरता

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह योजना भारत को 'आत्मनिर्भर ऊर्जा' (Energy Self-Reliance) की दिशा में आगे ले जाएगी. वर्तमान में कई घरेलू तेल और गैस क्षेत्रों का उत्पादन घट रहा है, ऐसे में नए ऑफशोर क्षेत्रों की खोज देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होगी.

Samudra Manthan Scheme Explained: केंद्र सरकार ने देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 'समुद्र मंथन राष्ट्रीय अपतटीय (ऑफशोर) अन्वेषण योजना' को मंजूरी दे दी है. केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना से भारत को हर साल करीब 1 लाख करोड़ रुपये की ऊर्जा आयात लागत बचाने में मदद मिलेगी. सरकार का लक्ष्य घरेलू स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन को बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना है.

भारत फिलहाल हर साल लगभग 150 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक) का कच्चा तेल और अन्य हाइड्रोकार्बन आयात करता है. सरकार का मानना है कि देश में तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए घरेलू संसाधनों का दोहन बेहद जरूरी हो गया है.

क्या है समुद्र मंथन योजना? (What Is Samudra Manthan Scheme?)

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 84,084 करोड़ रुपये की लागत वाली समुद्र मंथन राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को मंजूरी दी है. इस योजना के तहत अगले चार वर्षों में भारत के गहरे समुद्री (Deepwater) और अति-गहरे समुद्री (Ultra Deepwater) क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को बड़े स्तर पर बढ़ाया जाएगा. योजना के प्रमुख कार्यों में समुद्र के भीतर सीस्मिक सर्वे, एक्सप्लोरेटरी ड्रिलिंग, समुद्री भूगर्भीय मानचित्रण (Seabed Mapping) और साझा ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास शामिल है.

कैसे मिलेगा भारत को फायदा?

सरकार के अनुसार इस योजना से देश के उन समुद्री क्षेत्रों में भी तेल और गैस की खोज संभव होगी, जहां अब तक पर्याप्त अन्वेषण नहीं हुआ है. इससे सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की ऊर्जा कंपनियों को निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और घरेलू उत्पादन बढ़ेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक और विस्तृत समुद्री सर्वेक्षण के जरिए भारत अपने अपतटीय हाइड्रोकार्बन भंडार का बेहतर उपयोग कर सकेगा.

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह योजना भारत को 'आत्मनिर्भर ऊर्जा' (Energy Self-Reliance) की दिशा में आगे ले जाएगी. वर्तमान में कई घरेलू तेल और गैस क्षेत्रों का उत्पादन घट रहा है, ऐसे में नए ऑफशोर क्षेत्रों की खोज देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होगी.

क्यों है यह योजना अहम?

सरकार का मानना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ने से:

कच्चे तेल और गैस के आयात पर निर्भरता कम होगी.

विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत होगी.

वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर कम पड़ेगा.

ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.

देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता मजबूत होगी.

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