FCRA Amendment Bill 2026: एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 क्या है? जानें मुख्य प्रावधान, बदलाव और विरोध के कारण

संसद के मानसून सत्र में चर्चा में आए 'विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026' को लेकर बहस छिड़ गई है. सरकार इसे विदेशी दान में पारदर्शिता लाने का कदम बता रही है, जबकि विपक्षी दल, चर्च संगठन और नागरिक संस्थाएं एनजीओ पर सरकारी नियंत्रण बढ़ने की आशंका जता रही हैं.

संसद (Photo Credits: ANI)

FCRA Amendment Bill 2026: संसद के मानसून सत्र में प्रस्तुत 'विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' (FCRA Amendment Bill, 2026) इस समय सबसे अधिक चर्चा में रहने वाले विधेयकों में से एक बन गया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा संचालित इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य विदेशी दान (Foreign Funding) प्राप्त करने वाली संस्थाओं के कामकाज में पारदर्शिता लाना और फंड के दुरुपयोग को रोकना है.

हालांकि, विपक्षी दलों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और कई धार्मिक व नागरिक संगठनों ने विधेयक के कड़े प्रावधानों पर चिंता व्यक्त की है. यह भी पढ़ें: Parliament Panel on Meta: पीएम मोदी की फेसबुक पोस्ट हटने पर भड़की संसदीय समिति, मेटा को समन जारी कर मांगा जवाब

FCRA कानून क्या है और यह क्या नियंत्रित करता है?

'विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम' (FCRA) भारत में गैर-सरकारी संगठनों, धर्मार्थ ट्रस्टों, शैक्षणिक और शोध संस्थानों द्वारा विदेशी योगदान प्राप्त करने और उसके उपयोग को विनियमित करता है.

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 15 जुलाई 2026 तक 14,449 सक्रिय एफसीआरए प्रमाणपत्र थे. वहीं, 22,498 पंजीकरण रद्द किए जा चुके हैं और 15,212 की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है. वर्ष 2019 से 2022 के बीच एफसीआरए-पंजीकृत संस्थाओं ने ₹55,741 करोड़ का विदेशी योगदान प्राप्त किया था.

FCRA संशोधन विधेयक 2026 के मुख्य प्रावधान

विधेयक और उसके साथ अधिसूचित 'एफसीआरए नियम 2026' में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं:

नामित प्राधिकरण (Designated Authority) का गठन: यदि किसी संगठन का एफसीआरए पंजीकरण रद्द होता है, आत्मसमर्पण किया जाता है या नवीनीकृत न होने पर समाप्त हो जाता है, तो केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त 'नामित प्राधिकरण' उस संस्था की विदेशी संपत्ति व फंड का प्रबंधन और अधिग्रहण कर सकेगा.

न्यूनतम खर्च की अनिवार्यता: एफसीआरए प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के लिए संस्था को पिछले दो वित्तीय वर्षों में विदेशी योगदान से कम से कम ₹10 लाख का खर्च दर्शाना अनिवार्य होगा.

सजा में कमी: विधेयक में एफसीआरए के नियमों के उल्लंघन पर अधिकतम जेल की सजा को 5 साल से घटाकर 1 साल करने का प्रस्ताव है.

कड़े प्रकटीकरण नियम (Disclosure Norms): संगठनों को विदेशी दान के उपयोग का उद्देश्य, परियोजनाओं का स्थान, गतिविधियों का विवरण और अपनी वेबसाइट व सोशल मीडिया खातों की जानकारी साझा करनी होगी.

धर्म परिवर्तन पर प्रतिबंध: नए नियमों के तहत विदेशी फंड का उपयोग धर्मांतरण (Proselytisation) की गतिविधियों में करने पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है.

अमेरिकी कांग्रेस सदस्य ने चेतावनी दी है कि FCRA बिल भारत-अमेरिका संबंधों पर असर डाल सकता है

विपक्षी दलों और नागरिक समाज का विरोध क्यों?

विपक्षी दलों और चर्च संगठनों ने विधेयक के दो मुख्य पहलुओं पर सबसे ज्यादा आपत्ति जताई है:

संपत्ति पर अधिकार की चिंता: तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन, सीपीआई(एम) के जॉन ब्रिटास और कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि किसी संस्था का लाइसेंस रद्द होने पर उसकी संपत्ति सरकार द्वारा गठित प्राधिकरण के नियंत्रण में जाना उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है.

छोटे एनजीओ और धर्मार्थ संस्थानों पर प्रभाव: केरल में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने आशंका जताई कि प्रक्रियात्मक कमियों के कारण स्कूलों, अस्पतालों, अनाथालयों और चर्चों के पंजीकरण रद्द हो सकते हैं.

चर्च संगठनों की प्रतिक्रिया: मिजोरम में 'बैपटिस्ट चर्च' और अन्य धार्मिक निकायों ने तर्क दिया कि दशकों से विदेशी दान की मदद से बने स्कूलों और अस्पतालों की स्वायत्तता पर सरकारी हस्तक्षेप का असर पड़ेगा.

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: अमेरिकी सांसद राइली मूर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ये संशोधन ईसाई धार्मिक संस्थाओं और धर्मार्थ कार्यों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ सकता है.

सरकार का पक्ष और आगे की राह

केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय का कहना है कि ये संशोधन वैध नागरिक समाज के कार्यों को रोकने के लिए नहीं हैं. सरकार के अनुसार, वित्तीय जोखिमों को कम करने, राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने और विदेशी धन के अवैध मोड़ने (Diversion) को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को आधुनिक बनाना अनिवार्य है.

Share Now