Income Tax Return Deadline: 31 जुलाई तक ITR दाखिल न करने पर क्या होगा? जानें पेनाल्टी, ब्याज और नियमों में बदलाव

गैर-ऑडिट वाले व्यक्तिगत करदाताओं और वेतनभोगियों के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है. तय समय सीमा चूकने पर करदाताओं को पेनल्टी, बकाया टैक्स पर ब्याज और पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने का विकल्प गंवाना पड़ सकता है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (File Image)

नई दिल्ली: बिना ऑडिट वाले मामलों (Non-Audit Cases) के लिए आयकर रिटर्न (Income Tax Return) (ITR) दाखिल करने की अंतिम समय सीमा 31 जुलाई बेहद करीब है. टैक्स विशेषज्ञों की सलाह है कि करदाता अंतिम समय का इंतजार न करें, क्योंकि इस वर्ष समय सीमा बढ़ाए जाने की संभावना बहुत कम है. समय पर आईटीआर दाखिल न करने पर न केवल जुर्माना लग सकता है, बल्कि कई तरह के टैक्स लाभ भी समाप्त हो सकते हैं.

यह वर्ष इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि देश में नए आयकर अधिनियम, 2025 (Income Tax Act, 2025) की शुरुआत हो चुकी है, हालांकि आकलन वर्ष (AY) 2026-27 के रिटर्न अभी भी आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत ही दाखिल किए जा रहे हैं. यह भी पढ़ें: ITR Filing Deadline: क्या बढ़ेगी आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख? जानें टैक्स एक्सपर्ट की राय

31 जुलाई तक किनके लिए ITR दाखिल करना अनिवार्य है?

31 जुलाई की समय सीमा मुख्य रूप से उन करदाताओं पर लागू होती है जिनके खातों का ऑडिट होना अनिवार्य नहीं है:

वेतनभोगी कर्मचारी (Salaried Employees)

पेंशनभोगी (Pensioners)

निवेशक और शेयर बाजार में लेन-देन करने वाले व्यक्ति

ऐसे अन्य करदाता जिन्हें ऑडिट की आवश्यकता नहीं है

वहीं, गैर-ऑडिट वाले व्यावसायिक या पेशेवर आय वाले करदाताओं और फर्मों के साझेदारों के लिए इस वर्ष रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त रखी गई है.

इस बार का फाइलिंग सीजन क्यों अलग है?

यद्यपि नया आयकर अधिनियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गया है, फिर भी आकलन वर्ष 2026-27 के लिए दाखिल किए जाने वाले रिटर्न वित्तीय वर्ष 2025-26 की आय से संबंधित हैं.

परिणामस्वरूप, यह फाइलिंग सीजन पुराने 'आयकर अधिनियम, 1961' के तहत अंतिम बार संचालित किया जा रहा है। इसके बाद के सभी आकलन वर्षों के लिए नए अधिनियम के तहत रिटर्न दाखिल किए जाएंगे.

फाइलिंग से पहले इन जरूरी बातों की जांच करें

विशेषज्ञों का कहना है कि करदाताओं को केवल पोर्टल पर पहले से भरे (Pre-filled) डेटा पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. जमा करने से पहले निम्नलिखित मिलान अवश्य करें:

फॉर्म 16, एआईएस (AIS) और फॉर्म 26AS का मिलान: अपनी सैलरी स्लिप, वार्षिक सूचना विवरण (AIS) और 26AS को आपस में जांचें.

सभी आय स्रोतों का खुलासा: बैंक ब्याज, लाभांश (Dividend), म्यूचुअल फंड व शेयर बिक्री से हुआ पूंजीगत लाभ (Capital Gains) अवश्य दर्ज करें.

दो फॉर्म 16 वाले करदाता ध्यान दें: यदि वित्तीय वर्ष के दौरान नौकरी बदली है और दो फॉर्म 16 मिले हैं, तो दोनों का सही हिसाब जोड़ें, ताकि दोहरा टैक्स डिडक्शन या मिसमैच का नोटिस न आए.

डेडलाइन मिस करने पर क्या होंगे नुकसान?

यदि आप 31 जुलाई की नियत तिथि तक रिटर्न दाखिल नहीं कर पाते हैं, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं:

लेट फीस (धारा 234F): तय तिथि के बाद 'विलंबित रिटर्न' (Belated Return) दाखिल करने पर ₹5,000 तक की लेट फीस देनी होगी (यदि कुल आय ₹5 लाख से कम है तो यह शुल्क ₹1,000 होगा).

बकाए टैक्स पर ब्याज (धारा 234A): यदि कोई टैक्स बकाया है, तो 31 जुलाई के बाद से हर महीने 1% की दर से ब्याज लगेगा.

पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) का विकल्प खत्म: समय पर रिटर्न न दाखिल करने पर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था का चयन नहीं कर सकेंगे. ऐसी स्थिति में आपको डिफॉल्ट रूप से नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत ही टैक्स देना होगा.

घाटे को कैरी फॉरवर्ड करने पर रोक: शेयर बाजार या बिजनेस में हुए नुकसान को भविष्य के सालों के लाभ से सेट-ऑफ (Carry Forward) करने का अधिकार समाप्त हो जाएगा.

आईटीआर दाखिल करने की आसान प्रक्रिया

करदाता खुद आयकर विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल (incometax.gov.in) पर जाकर इन स्टेप्स का पालन कर सकते हैं:

अपने पैन (PAN) और पासवर्ड की मदद से पोर्टल पर लॉगिन करें.

ई-फाइल सेक्शन में जाकर Assessment Year 2026–27 का चयन करें.

अपनी आय के स्रोत के अनुसार उपयुक्त ITR फॉर्म (जैसे ITR-1 या ITR-2) चुनें.

अपनी आय, कटौती (Deductions) और व्यक्तिगत विवरण दर्ज कर फॉर्म जमा करें.

ई-वेरिफिकेशन: रिटर्न सबमिट करने के 30 दिनों के भीतर आधार ओटीपी या नेट बैंकिंग के जरिए ई-वेरिफाई जरूर करें, क्योंकि बिना सत्यापन के रिटर्न अमान्य माना जाता है.

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