कोलकाता: पश्चिम बंगाल (West Bengal) के नवनियुक्त और नौवें मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने राज्य के लोकतांत्रिक ताने-बाने को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को कोलकाता में पश्चिम बंगाल विधानसभा (West Bengal Legislative Assembly) के नवनिर्वाचित विधायकों के लिए आयोजित दो दिवसीय ओरिएंटेशन (अभिविन्यास) कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने विपक्ष के विधायकों को सदन और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक लोकतांत्रिक स्थान (Democratic Space) देने का दृढ़ आश्वासन दिया. उन्होंने अपनी पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि पिछले 15 वर्षों के शासनकाल में विपक्ष की आवाज को पूरी तरह से दबा दिया गया था, जिसे अब उनकी सरकार बदलने जा रही है. यह भी पढ़ें: NCRB को भेजें अपराध के बिल्कुल सटीक आंकड़े: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का पुलिस को सख्त निर्देश
पिछली सरकारों की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के पिछले 50 वर्षों के राजनीतिक इतिहास का कूटनीतिक विश्लेषण करते हुए पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों की कड़ी आलोचना की.
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का बयान: "साल 1977 से 2011 तक के 34 वर्षों के वाम मोर्चा (Left Front) शासनकाल में सब कुछ सत्ताधारी दल के कार्यालय से संचालित होता था. इसके बाद 2011 से 2026 तक के पिछले 15 वर्षों में जो कुछ भी हुआ, उसके बारे में जितना कम कहा जाए उतना ही बेहतर है. पूर्ववर्ती शासन में विपक्ष के विधायकों के लिए कोई सम्मान नहीं था. यहां तक कि ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) और थानों के प्रभारी (OC) विपक्ष के विधायकों के फोन तक उठाना जरूरी नहीं समझते थे. किसी भी सरकारी या सार्वजनिक कार्यक्रम में केवल सत्ता पक्ष के विधायकों को ही आमंत्रित किया जाता था. मैं खुद पांच साल तक विपक्ष का नेता (LoP) रहा, लेकिन मुझे एक भी आधिकारिक कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया."
दो महीनों में व्यवस्था बदलने का दावा
मई 2026 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उन्होंने अपने शुरुआती दो महीनों के कार्यकाल में ही इस दमनकारी व्यवस्था को बदलने की ईमानदार कोशिश शुरू कर दी है.
उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ महीने के भीतर उन्होंने पांच महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठकें बुलाई हैं, जिनमें दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के विधायकों को समान रूप से आमंत्रित किया गया. इसके अतिरिक्त, राज्य के बजट निर्माण की प्रक्रिया में भी विपक्ष के रचनात्मक सुझावों को शामिल किया गया है, क्योंकि उनका मानना है कि राज्य का समग्र विकास सबके साथ मिलकर ही संभव है.
विधानसभा के आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे पर जोर
मुख्यमंत्री ने विधानसभा की मौजूदा कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए वाम मोर्चे और तृणमूल कांग्रेस दोनों पर आधुनिक संचार तकनीकों को न अपनाने का आरोप लगाया.
उन्होंने सदन के आधुनिकीकरण के लिए निम्नलिखित कूटनीतिक प्राथमिकताओं को रेखांकित किया:
- इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग प्रणाली: मुख्यमंत्री ने आश्चर्य जताया कि देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होने के बावजूद बंगाल विधानसभा में आज भी मतविभाजन (Voting) कागज के पर्चों के माध्यम से होता है. उन्होंने जल्द ही सदन में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम लागू करने की बात कही.
- बुनियादी ढांचे में सुधार: विधानसभा के भीतर विधायकों के लिए तकनीकी और भौतिक बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को दुरुस्त किया जाएगा, ताकि वे जनता के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा सकें.
- दल से ऊपर जनहित: उन्होंने सभी नवनिर्वाचित विधायकों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर केवल जनता के कल्याण और विकास के लिए समर्पित होकर काम करने का आह्वान किया.













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