कोलकाता/नई दिल्ली, 10 जून: पश्चिम बंगाल (West Bengal) की पूर्व सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी भीषण सांगठनिक दरार और अंदरूनी कलह अब पूरी तरह नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है. पार्टी की सबसे मुखर युवा नेता और जादवपुर संसदीय क्षेत्र से पहली बार चुनकर आईं लोकसभा सांसद सायोनी घोष (Saayoni Ghosh) ने वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तिदार के नेतृत्व वाले विद्रोही (बागी) गुट को अपना विधिक समर्थन दे दिया है. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, सायोनी ने व्यक्तिगत रूप से काकोली घोष दस्तिदार से संपर्क साधा, असंतुष्ट समूह की नीतियों के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की और इस बागी गुट को मजबूत करने वाले विधिक दस्तावेजों पर अपने हस्ताक्षर भी दर्ज करा दिए हैं. यदि इन राजनीतिक घटनाक्रमों की पूरी तरह पुष्टि होती है, तो यह पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के नेतृत्व के लिए हाल के वर्षों का सबसे बड़ा आंतरिक संकट साबित होने जा रहा है. यह भी पढ़ें: West Bengal Politics: टीएमसी को बड़ा झटका; राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने दिया इस्तीफा, बीजेपी में शामिल होने की अटकलें तेज
कौन हैं सायोनी घोष? अभिनेत्री से सांसद बनीं टीएमसी की युवा चेहरा
सायोनी घोष पश्चिम बंगाल की राजनीति और मनोरंजन जगत का एक बेहद चर्चित व लोकप्रिय नाम हैं. राजनीति में कदम रखने से पहले उन्होंने बंगाली सिनेमा और टेलीविजन उद्योग में एक सफल अभिनेत्री और टीवी पर्सनैलिटी के रूप में अपनी मजबूत पहचान स्थापित की थी.
इसके बाद वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुईं और बहुत कम समय में अपनी प्रखर वक्तृत्व शैली के कारण पार्टी की एक प्रभावशाली स्टार प्रचारक के रूप में उभरीं, विशेष रूप से युवा मतदाताओं के बीच उनकी गहरी पैठ देखी गई. उनकी इसी सांगठनिक क्षमता को देखते हुए टीएमसी नेतृत्व ने उन्हें पार्टी की प्रतिष्ठित युवा इकाई (Women's/Youth Wing) का प्रमुख नियुक्त किया था, जिसने उन्हें संगठन के भीतर शीर्ष स्तर के नीति-निर्धारकों की कतार में खड़ा कर दिया था.
सायोनी घोष ने कथित तौर पर काकोली घोष दस्तीदार के बागी TMC गुट का समर्थन किया
Big update
Sayoni Ghosh is one of the signatories to join the Kakoli Dastidar block
— 🦏 Payal M/પાયલ મેહતા/ पायल मेहता/ পাযেল মেহতা (@payalmehta100) June 10, 2026
नेतृत्व के खिलाफ गंभीर शिकायतें; चुनाव प्रचार में अकेला छोड़ने का आरोप
सायोनी घोष के करीबी और इस मामले से परिचित सूत्रों का दावा है कि युवा सांसद को अब तृणमूल कांग्रेस के भीतर अपना कोई राजनीतिक भविष्य दिखाई नहीं दे रहा है. उनके इस बड़े रणनीतिक शिफ़्ट के पीछे पार्टी आलाकमान के प्रति गहरी नाराजगी और व्यक्तिगत शिकायतें बताई जा रही हैं.
सायोनी का मानना है कि हालिया चुनाव अभियान (Election Campaign) के दौरान जब वे विपक्षी दलों के कड़े हमलों और चौतरफा आलोचनाओं का सामना कर रही थीं, तब टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें पूरी तरह अकेला (Isolated) छोड़ दिया था और संगठन की ओर से उन्हें कोई विधिक या नैतिक समर्थन प्राप्त नहीं हुआ. इसके अतिरिक्त, एक अन्य विवाद के दौरान पार्टी द्वारा उन्हें अपने निर्धारित चुनावी दौरों और प्रचार गतिविधियों को छोटा (Shorten) करने का निर्देश दिया गया था, जिसने उनके स्वाभिमान को गहरी ठेस पहुंचाई और अंततः उन्होंने विद्रोह का रास्ता चुन लिया. फिलहाल इस विषय पर सायोनी या टीएमसी के पीआर (PR) काउंटर्स ने कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है.
एक ही हफ्ते में सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर के इस्तीफों से बढ़ीं मुश्किलें
सायोनी घोष का यह विद्रोही कदम तृणमूल कांग्रेस के लिए एक ऐसे समय में आया है जब पार्टी पहले से ही दिल्ली से लेकर कोलकाता तक बिखरती नजर आ रही है. बुधवार को ही पूर्वोत्तर की कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने उच्च सदन की सदस्यता से अपना विधिक इस्तीफा सौंप दिया है, जिससे पार्टी की राष्ट्रीय रीढ़ कमजोर हुई है.
उल्लेखनीय है कि सुष्मिता देव का इस्तीफा टीएमसी के एक अन्य वरिष्ठतम सांसद सुखेंदु शेखर रॉय के पार्टी छोड़ने के ठीक बाद आया है. सुखेंदु शेखर ने संसद और पार्टी दोनों से नाता तोड़ते हुए ममता बनर्जी को भेजे अपने कड़े त्यागपत्र में राज्य शासन के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार, महिलाओं के प्रति चरम दमन और प्रशासनिक अराजकता की तीखी आलोचना की थी. संसद के भीतर से एक के बाद एक हो रहे इन हाई-प्रोफाइल निकासों ने टीएमसी के भीतर जारी भारी असंतोष को पूरी तरह सार्वजनिक कर दिया है.
काकोली घोष दस्तिदार बनीं असंतुष्ट खेमे का चेहरा; एनडीए (NDA) से संपर्क के दावे
इस समय तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही इस ऐतिहासिक बगावत के केंद्र में वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तिदार हैं, जो अब आधिकारिक रूप से असंतुष्ट सांसदों और नेताओं के इस बड़े कैंप का मुख्य चेहरा बनकर उभरी हैं. इसी हफ्ते काकोली ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा था कि टीएमसी के लगभग 20 लोकसभा सांसद इस समय राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के शीर्ष नेतृत्व के साथ सीधे संपर्क में हैं और वे जल्द ही एक बड़ा सांगठनिक शिफ़्ट कर सकते हैं.
यद्यपि वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) या एनडीए के रणनीतिकारों की ओर से इन २० सांसदों के विधिक आंकड़ों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सायोनी घोष जैसी सबसे सक्रिय और लोकप्रिय युवा सांसद का इस खेमे में आकर दस्तावेजों पर दस्तखत करना यह साफ संकेत देता है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बहुत बड़ा उलटफेर (Political Churning) होने जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषक अब इस बात पर पैनी नजर रख रहे हैं कि आगामी सत्रों से पूर्व टीएमसी के और कितने सांसद इस बागी गुट में शामिल होते हैं.













QuickLY