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West Bengal Politics: टीएमसी को बड़ा झटका; राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने दिया इस्तीफा, बीजेपी में शामिल होने की अटकलें तेज

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा आंतरिक संकट और गहरा गया है. पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने उच्च सदन से आधिकारिक रूप से इस्तीफा दे दे दिया है. एक ही सप्ताह के भीतर टीएमसी के दो बड़े संसदीय चेहरों के बाहर जाने से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

West Bengal Politics: टीएमसी को बड़ा झटका; राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने दिया इस्तीफा, बीजेपी में शामिल होने की अटकलें तेज
सुष्मिता देव (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली/कोलकाता, 10 जून: पश्चिम बंगाल (West Bengal) में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर संगठनात्मक बिखराव का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. पार्टी की राष्ट्रीय चेहरा और राज्यसभा सदस्य सुष्मिता देव (Sushmita Dev) ने उच्च सदन (Upper House) की सदस्यता से अपना विधिक इस्तीफा दे दिया है. एक ही सप्ताह के भीतर संसद के उच्च सदन से टीएमसी का यह दूसरा हाई-प्रोफाइल निकास है, जिसने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की राजनीतिक चिंताओं को गहरा कर दिया है. सुष्मिता देव ने अपना आधिकारिक त्यागपत्र राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन को सौंपकर इसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार करने का अनुरोध किया है. इस बीच, इस्तीफे के तुरंत बाद दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ उनकी संदेहास्पद मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में उनके भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की अटकलों को तेज कर दिया है. यह भी पढ़ें: West Bengal Politics: बंगाल के प्रशासनिक समीकरण में बड़ा शिफ्ट; सीएम शुभेंदु अधिकारी की बैठक में शामिल हुए TMC के दो बागी सांसद और एक विधायक

कौन हैं सुष्मिता देव? असम की राजनीति का एक प्रतिष्ठित चेहरा

सुष्मिता देव पूर्वोत्तर भारत, विशेष रूप से असम की राजनीति का एक अत्यंत प्रतिष्ठित और स्थापित नाम हैं. वे दिग्गज दिवंगत कांग्रेस नेता संतोष मोहन देव की सुपुत्री हैं, जो एक अनुभवी सांसद और केंद्र सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके थे. सुष्मिता ने अपने सक्रिय राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी और वे जल्द ही पूर्वोत्तर में पार्टी की सबसे मुखर महिला नेता के रूप में उभरीं.

साल 2014 के आम चुनाव में उन्होंने असम की सिलचर लोकसभा सीट से जीत हासिल कर संसद में कदम रखा था. संसदीय बहसों में उनकी सक्रिय भागीदारी और महिला अधिकारों व सामाजिक मुद्दों पर उनके कड़े रुख के कारण उन्हें अखिल भारतीय महिला कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी.

साल 2021 में कांग्रेस छोड़ थामा था टीएमसी का दामन

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सिलचर सीट से मिली आंशिक पराजय के बाद, सुष्मिता देव के कांग्रेस नेतृत्व के साथ वैचारिक मतभेद बढ़ने लगे थे. नतीजतन, उन्होंने साल 2021 में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया था.

तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद उनका राजनीतिक ग्राफ तेजी से ऊपर गया. टीएमसी ने उन्हें तुरंत अपना राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया और बाद में पश्चिम बंगाल के बाहर पार्टी के विस्तार के लिए उन्हें राज्यसभा के माध्यम से उच्च सदन भेजा. पिछले कुछ वर्षों में वे दिल्ली के राजनीतिक पटल पर टीएमसी के राष्ट्रीय रुख को रखने वाली एक बेहद प्रमुख रणनीतिकार के रूप में देखी जा रही थीं.

सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे के बाद गहराया टीएमसी का संकट

सुष्मिता देव का यह कदम टीएमसी के एक अन्य वरिष्ठतम नेता और सांसद सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे के ठीक बाद आया है, जिन्होंने पिछले दिनों राज्यसभा और पार्टी दोनों से विधिक रूप से नाता तोड़ लिया था. सुखेंदु शेखर ने ममता बनर्जी को भेजे अपने कड़े त्यागपत्र में पार्टी के सांगठनिक ढांचे पर गंभीर आरोप लगाए थे.

सुखेंदु ने अपने पत्र में लिखा था, "पश्चिम बंगाल की जनता ने पार्टी के भीतर व्याप्त घोर भ्रष्टाचार, महिलाओं के प्रति चरम दमन और शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रोजगार व कानून-व्यवस्था सहित सभी क्षेत्रों में शासन की पूर्ण अराजकता व विफलता को पूरी तरह खारिज कर दिया है." उन्होंने अपने पत्र में राज्य में भाजपा की ऐतिहासिक चुनावी जीत की सराहना करते हुए नई सरकार के पुनर्निर्माण कार्यक्रमों की प्रशंसा भी की थी. यह भी पढ़ें: TMC Crisis: ममता बनर्जी को बड़ा झटका, 20 लोकसभा सांसदों ने NDA को समर्थन देने का किया ऐलान, टूट सकती है पार्टी

भविष्य की रणनीतियां: असम से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की संभावना

राजनैतिक विश्लेषकों और आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सुष्मिता देव का राज्यसभा छोड़ना उनके गृह राज्य असम की राजनीति में एक नए टेकऑफ का संकेत है. कयास लगाए जा रहे हैं कि वे आने वाले दिनों में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर सकती हैं और पार्टी उन्हें असम में किसी महत्वपूर्ण संसदीय या सांगठनिक जिम्मेदारी से नवाज सकती है.

यद्यपि वर्तमान में सुष्मिता देव या भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक पीआर (PR) काउंटर्स की ओर से इस रणनीतिक शिफ़्ट को लेकर कोई विधिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन पूर्वोत्तर के राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इस घटनाक्रम को पश्चिम बंगाल टीएमसी के लिए एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय झटका माना जा रहा है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 10, 2026 02:22 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).