VIDEO: रायगढ़ में मंत्री आदिती तटकरे ने पारंपरिक अंदाज में मनाया दही हांडी उत्सव, सोशल मीडिया पर साझा किया वीडियो

रायगढ़ में आयोजित इस दही हांडी कार्यक्रम में विभिन्न गोविंदा पथकों ने पारंपरिक वेशभूषा में शिरकत की. पूरा माहौल पारंपरिक मराठी लोकगीतों और ढोल-ताशों की गूंज से भक्तिमय और ऊर्जावान बना हुआ था.

(Photo Credits Twitter)

 Aditi Tatkare Celebrates Dahi Handi: महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने रायगढ़ जिले में पारंपरिक उत्साह और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के साथ दही हांडी का त्योहार मनाया. इस अवसर पर उन्होंने स्थानीय गोविंदा पथकों के साथ उत्सव में भाग लिया और पारंपरिक धुनों पर नृत्य कर खुशियां बांटीं. मंत्री ने इस उत्सव का एक वीडियो अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर भी साझा किया है, जो तेजी से ध्यान आकर्षित कर रहा है.

पारंपरिक वेशभूषा और लोकगीतों की गूंज

रायगढ़ में आयोजित इस दही हांडी कार्यक्रम में विभिन्न गोविंदा पथकों ने पारंपरिक वेशभूषा में शिरकत की. पूरा माहौल पारंपरिक मराठी लोकगीतों और ढोल-ताशों की गूंज से भक्तिमय और ऊर्जावान बना हुआ था.   यह भी पढ़े:  Dahi Handi 2026 Messages: हैप्पी दही हांडी! प्रियजनों संग शेयर करें ये शानदार हिंदी Shayaris, WhatsApp Wishes, GIF Greetings और Photo SMS

उत्सव के दौरान मंत्री आदिती तटकरे ने स्वयं गोविंदाओं के बीच पहुंचकर उनके उत्साह कावर्धन किया. उन्होंने मराठी लोकगीतों की धुन पर पारंपरिक अंदाज में नृत्य किया और स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के इस पर्व को धूमधाम से मनाया.

आदिती तटकरे ने मनाया दही हांडी उत्सव

सोशल मीडिया पर शेयर की खुशी

मंत्री आदिती तटकरे ने अपने X हैंडल पर इस आयोजन का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, "जल्लोष गोविंदांचा, उत्सव परंपरेचा !!" (गोविंदाओं का उल्लास, परंपरा का उत्सव).

अपने संदेश में उन्होंने कहा कि दही हांडी उत्सव पारंपरिक पद्धति से बेहद उत्साह के माहौल में संपन्न हुआ, जिसमें युवाओं और गोविंदा पथकों ने सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत बनाए रखा.

रायगढ़ में सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा

महाराष्ट्र के कोंकण और रायगढ़ क्षेत्र में दही हांडी का त्यौहार केवल धार्मिक आस्था तक सीमित न रहकर एक बड़े सामाजिक व सांस्कृतिक मेल-मिलाप का प्रतीक माना जाता है. मंत्री तटकरे द्वारा सार्वजनिक रूप से स्थानीय लोगों के साथ इस पर्व को मनाने की पहल को स्थानीय नागरिकों द्वारा काफी सराहा गया है.

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