Uttarakhand: टिहरी गढ़वाल में एनएच-707A पर भूस्खलन, भरभरा कर ढह गई खाली इमारत; समय रहते सुरक्षित निकाले गए लोग (Watch Video)
उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 707A पर कद्दूखाल के पास एक भीषण भूस्खलन (लैंडस्लाइड) हुआ है. इस घटना में एक पुरानी और खाली इमारत पूरी तरह जमींदोज हो गई. प्रशासन की सतर्कता के कारण समय रहते आस-पास की दुकानों और होटलों को खाली करा लिया गया था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया.
टिहरी गढ़वाल: उत्तराखंड (Uttarakhand) के पर्वतीय क्षेत्रों में मानसून के दौरान भूस्खलन का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. टिहरी गढ़वाल जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 707A (NH-707A) पर कद्दूखाल (Kaddukhal) के पास गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को एक बड़ा भूस्खलन हुआ, जिसके कारण सड़क किनारे बनी एक पुरानी और खाली इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई. टिहरी गढ़वाल के जिला आपदा प्रबंधन विभाग (District Disaster Management Department) के अनुसार, इस घटना में किसी भी प्रकार की मानवीय क्षति या पशुहानि की सूचना नहीं है. स्थानीय प्रशासन ने भूस्खलन की आहट मिलते ही खतरे की जद में आई संरचनाओं को पहले ही खाली करा लिया था, जिससे एक बड़ी त्रासदी होने से बच गई. यह भी पढ़ें: Chamoli Landslide: उत्तराखंड के चमोली में भारी बारिश से नंदप्रयाग-नंदनगर सड़क पर भूस्खलन, मलबे और पत्थरों को खुद हटाते दिखे लोग; VIDEO
होटल निर्माण के लिए हो रही खुदाई बनी हादसे की वजह
प्रारंभिक जांच और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, इस भूस्खलन के पीछे प्राकृतिक कारणों के साथ-साथ मानवीय लापरवाही भी सामने आई है. कद्दूखाल इलाके में एक निजी व्यक्ति द्वारा एक नए होटल के निर्माण के लिए पहाड़ी को काटकर बेसमेंट की खुदाई का काम कराया जा रहा था.
मानसून के कारण पहाड़ी की मिट्टी पहले से ही संवेदनशील थी, और इस निर्माण कार्य (एक्सकवेशन) के चलते नीचे की जमीन पूरी तरह अस्थिर हो गई. संतुलन बिगड़ने के कारण अचानक पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा दरक गया और उसका पूरा मलबा पास में स्थित खाली व्यावसायिक इमारत पर जा गिरा.
प्रशासन की मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा
आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र की भौगोलिक संवेदनशीलता को देखते हुए समय रहते कड़े कदम उठाए थे. मलबे के नीचे आने से पहले ही संभावित डेंजर ज़ोन के दायरे में आने वाले पूरे इलाके को व्यवस्थित रूप से खाली करा लिया गया था.
अधिकारियों ने बताया कि हादसे की जगह के ठीक पास चल रहे दो बड़े रेस्तरां, सड़क किनारे बनी कई अस्थायी दुकानें (कियोस्क) और निर्माण कार्य में लगे मजदूरों की कई झोपड़ियों को पूरी तरह खाली कराकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया था. यही कारण रहा कि इमारत के पूरी तरह मलबे में तब्दील होने के बावजूद कोई हताहत नहीं हुआ.
टिहरी गढ़वाल में नेशनल हाईवे 707A पर भूस्खलन हुआ
मानसून में बढ़े निर्माण संबंधी खतरे
उत्तराखंड में मानसून के सीजन के दौरान इस तरह की घटनाएं अक्सर चिंता का विषय बन जाती हैं. भारी और लगातार होने वाली बारिश के कारण पहाड़ों की चट्टानें और मिट्टी अपनी पकड़ खो देती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मौसम में बिना उचित भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण और सुरक्षा मानकों के की जाने वाली व्यावसायिक खुदाई सीधे तौर पर बड़े हादसों को निमंत्रण देती है.
जिला आपदा प्रबंधन विभाग ने पुष्टि की है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर मलबे को हटाने और सड़क को स्थिर करने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है. पहाड़ी के कमजोर हो चुके हिस्से की निरंतर निगरानी की जा रही है ताकि हाईवे से गुजरने वाले यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और आस-पास की अन्य संपत्तियों को नुकसान होने से बचाया जा सके.