Uttar Pradesh: बाराबंकी में सर्पदंश से 10 वर्षीय मासूम की मौत, स्वास्थ्य केंद्र पर एम्बुलेंस न मिलने का आरोप; परिजनों का हंगामा, जांच शुरू
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo credits: Pixabay)

बाराबंकी: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बाराबंकी (Barabanki) जिले से स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां समय पर एम्बुलेंस और पर्याप्त इलाज न मिलने के कारण सर्पदंश (सांप के काटने) के शिकार एक 10 वर्षीय मासूम बच्चे की जान चली गई. मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (Community Health Centre) (CHC) में डॉक्टरों ने आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में गंभीर कोताही बरती, जिससे मरीज को उच्च केंद्र ले जाने में बेहद कीमती समय बर्बाद हो गया. यह घटना हैदरगढ़ तहसील के त्रिवेदीगंज ब्लॉक अंतर्गत मानोधरपुर गांव में घटी। बच्चे की मौत लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में इलाज के दौरान हुई, जहां उसे निजी वाहन से ले जाया गया था. यह भी पढ़ें: Bulandshahr Shocker: सांप के काटने से 13 साल पहले हुई थी मौत, परिजनों ने शव को गंगा में किया था प्रवाहित; अब जीवित घर लौटा किशोर

दो घंटे तक नहीं आई एम्बुलेंस; एक डोज देकर किया रेफर

पीड़ित परिवार के अनुसार, 10 वर्षीय बालक को 6 जुलाई की शाम करीब 05:30 बजे सांप ने काट लिया था। परिजन उसे तुरंत त्रिवेदीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लेकर पहुंचे. परिजनों का गंभीर आरोप है कि वहां ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने बच्चे को एंटी-स्नेक वेनम (ASV) की केवल एक ही खुराक (डोज) दी और उसकी बिगड़ती हालत को देखते हुए उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर कर दिया.

रेफर किए जाने के बाद, गंभीर रूप से तड़प रहे बच्चे के लिए एम्बुलेंस बुलाई गई, लेकिन वह अस्पताल नहीं पहुंची. पीड़ित बच्चा लगभग दो घंटे तक स्वास्थ्य केंद्र के परिसर में ही तड़पता रहा. अंततः, स्थिति को हाथ से निकलता देख रिश्तेदारों ने मजबूरन अपनी निजी कार का इंतजाम किया और बच्चे को लेकर लखनऊ के लिए रवाना हुए. रात लगभग 10:00 बजे लोहिया संस्थान में इलाज के दौरान बच्चे ने दम तोड़ दिया.

स्वास्थ्य केंद्र पर फूटा गुस्सा; वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

इस दुखद घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने त्रिवेदीगंज सीएचसी पर जमकर हंगामा किया और विरोध प्रदर्शन किया. इस टकराव के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे हैं, जिसमें बच्चे के रोते-बिलखते रिश्तेदार ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों से उनके नाम और विवरण मांगते हुए और सरकारी एम्बुलेंस सेवा के विफल होने पर तीखे सवाल पूछते नजर आ रहे हैं.

पीड़ित परिवार ने लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है. इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि वे इस मामले को लेकर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य स्तरीय आपदा के तहत सर्पदंश से होने वाली मौतों के लिए दिए जाने वाले ₹4 लाख के मुआवजे की मांग करेंगे.

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने दिए जांच के आदेश

मामले के तूल पकड़ने के बाद बाराबंकी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. रंजन गौतम ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं. डॉ. गौतम ने कहा:

"मैने एम्बुलेंस सेवा के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम मैनेजर) से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है और उन्हें रिपोर्ट के साथ कार्यालय तलब किया है. घटनाक्रम की विस्तृत समीक्षा के बाद दोषी कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस (Show-cause notice) भी जारी किया जाएगा. हम इसकी विशेष जांच कर रहे हैं कि एम्बुलेंस समय पर सीएचसी क्यों नहीं पहुंची."

एंटी-स्नेक वेनम (ASV) के प्रशासन पर सफाई देते हुए सीएमओ ने स्पष्ट किया कि जहर रोधी दवा की खुराक मरीज की नैदानिक ​​स्थिति, शरीर में फैले जहर की गंभीरता और घाव की प्रकृति का आकलन करने के बाद ही तय की जाती है. उन्होंने यह भी दावा किया कि बाराबंकी के सभी 15 सीएचसी और 55 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) में एंटी-स्नेक वेनम का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है. बहरहाल, यह जांच ही स्पष्ट करेगी कि इस दर्दनाक घटना में विफलता के लिए वास्तविक रूप से कौन जिम्मेदार है.