UP Govt Rules: विदेश मंत्रालय के बाद अब यूपी सरकार का बड़ा फैसला; पारिवारिक रिश्तों का कानूनी प्रमाण नहीं होगा 'आधार कार्ड', जारी हुआ सर्कुलर
विदेश मंत्रालय द्वारा पासपोर्ट को लेकर दी गई सफाई के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार ने आधार कार्ड को लेकर एक महत्वपूर्ण सर्कुलर जारी किया है. यूपी सरकार के निबंधन विभाग के अनुसार, आधार कार्ड केवल पहचान और पते का प्रमाण है, इसे पारिवारिक रिश्तों या माता-पिता-पति के नाम के कानूनी साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा.
लखनऊ: विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण न मानने के स्पष्टीकरण के ठीक बाद, अब उत्तर प्रदेश सरकार ने भी आधार कार्ड (Aadhaar Card) के उपयोग को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला लिया है. उत्तर प्रदेश के निबंधन विभाग (Registration Department) ने एक आधिकारिक सर्कुलर जारी कर स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड केवल किसी व्यक्ति की पहचान (Identity) और पते (Address) का प्रमाण है, इसे पारिवारिक संबंधों (Family Relationships) के कानूनी साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है. सरकार ने साफ किया है कि सरकारी योजनाओं, रजिस्ट्रियों और प्रशासनिक कार्यों में रिश्तों के सत्यापन के लिए अब अन्य कानूनी दस्तावेजों को अनिवार्य बनाया जाएगा. यह भी पढ़ें: Passport Status Clarification: 'पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का प्रमाण नहीं रहा', केंद्र सरकार ने साफ की स्थिति; बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
निबंधन महानिरीक्षक ने जारी किया आधिकारिक सर्कुलर
उत्तर प्रदेश के निबंधन महानिरीक्षक (Inspector General of Registration) द्वारा 19 जून 2026 को जारी इस आधिकारिक परिपत्र में राज्य के सभी सहायक निबंधन महानिरीक्षकों को कड़े निर्देश दिए गए हैं. सर्कुलर में कहा गया है कि विभिन्न सरकारी योजनाओं, नागरिक सेवाओं और भूमि या संपत्ति के पंजीकरण (Registration) से जुड़ी प्रक्रियाओं में आधार का उपयोग केवल पहचान स्थापित करने और निवास स्थान की पुष्टि करने के लिए ही किया जाए.
यह आदेश राज्य सरकार और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के बीच हुए हालिया संवाद और दिशानिर्देशों के संदर्भ में जारी किया गया है.
यूपी सरकार का कहना है कि आधार कार्ड पारिवारिक रिश्ते का सबूत नहीं है
'पिता या पति का नाम' केवल सूचनात्मक विवरण, कानूनी सबूत नहीं
इस नए सर्कुलर के तहत यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है कि आधार कार्ड पर छपने वाले पिता, पति, अभिभावक या किसी अन्य रिश्तेदार के नाम केवल 'सूचनात्मक' (Informational) प्रकृति के होते हैं. इसे किसी भी स्थिति में पारिवारिक रिश्ते का अंतिम या कानूनी प्रमाण नहीं माना जा सकता.
विभाग ने अपने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे विभिन्न आवेदनों, वसीयत, बैनामे या अन्य प्रशासनिक कार्यों की जांच के दौरान रिश्तों के सत्यापन के लिए केवल आधार कार्ड पर निर्भर न रहें. आधार पर दर्ज "S/o" (पुत्र), "D/o" (पुत्री), "W/o" (पत्नी) और "C/o" (केयर ऑफ) जैसे विवरणों को महज एक पते के पूरक विवरण के रूप में देखा जाएगा, न कि कानूनी रिश्ते के दस्तावेज के तौर पर.
रिश्तों के सत्यापन के लिए इन वैकल्पिक दस्तावेजों का होगा उपयोग
उत्तर प्रदेश सरकार के नए नियमों के अनुसार, जिन भी प्रशासनिक या कानूनी प्रक्रियाओं में पारिवारिक संबंधों की सत्यता की जांच आवश्यक होगी, वहां अधिकारियों को आवेदकों से अन्य प्रामाणिक और वैध दस्तावेज मांगने होंगे. इन कानूनी दस्तावेजों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
- जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)
- परिवार रजिस्टर की नकल (Family Register Extracts)
- उत्तराधिकार या विरासत से जुड़े कानूनी रिकॉर्ड (Succession Records)
- किसी सक्षम न्यायालय या प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र
- अन्य कोई भी कानूनी रूप से स्वीकृत दस्तावेज
विदेश मंत्रालय के पासपोर्ट संबंधी स्पष्टीकरण की पृष्ठभूमि
उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब हाल ही में विदेश मंत्रालय ने देश में पासपोर्ट को लेकर स्थिति साफ की थी. विदेश मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा था कि यद्यपि भारतीय पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है और यह नागरिकता का एक मजबूत साक्ष्य है, लेकिन प्राथमिक रूप से यह एक यात्रा दस्तावेज (Travel Document) है, न कि नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण.
ठीक इसी तर्ज पर, उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अब आधार कार्ड के मूल उद्देश्य और पारिवारिक संबंधों को साबित करने वाले कानूनी दस्तावेजों के बीच एक स्पष्ट अंतर (Distinction) स्थापित कर दिया है, ताकि भविष्य में होने वाली कानूनी और वित्तीय विसंगतियों से बचा जा सके.