Passport Status Clarification: 'पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का प्रमाण नहीं रहा', केंद्र सरकार ने साफ की स्थिति; बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट को कभी भी नागरिकता का अंतिम या निर्णायक प्रमाण नहीं माना गया है. सरकार ने पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 और बॉम्बे हाई कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए इसे एक स्थापित कानूनी स्थिति बताया है, जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं.
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नई दिल्ली, 25 जून: केंद्र सरकार ने गुरुवार को एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि पासपोर्ट को कभी भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना गया है. सरकार ने साफ किया कि इस संबंध में न तो हाल ही में और न ही पिछले 12 वर्षों में कोई नया नीतिगत फैसला लिया गया है. यह स्पष्टीकरण विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) (MEA) द्वारा बुधवार को दिए गए उस बयान के बाद आया है, जिसमें पासपोर्ट को प्राथमिक रूप से एक यात्रा दस्तावेज (Travel Document) बताया गया था. सरकार ने अपनी बात के समर्थन में पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 और साल 2013 के बॉम्बे हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला दिया है.
विपक्ष की आलोचना और कपिल सिब्बल का सवाल
विदेश मंत्रालय के इस रुख के बाद देश के राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है और विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार की आलोचना शुरू कर दी है. राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर विदेश मंत्रालय के बयान पर तीखे सवाल उठाए.
कपिल सिब्बल ने लिखा, "विदेश मंत्रालय, 24 जून 2026: 'पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का दस्तावेज नहीं.' तो फिर नागरिकता का प्रमाण कौन सा दस्तावेज है? बीएलओ (BLO) मेरी नागरिकता पर संदेह कर सकता है, मुझे मेरे वोट से वंचित कर सकता है, जिसका परिणाम यह होगा कि भाजपा चुनाव जीत जाएगी! अब मामला सुप्रीम कोर्ट के पास है."
'यह नई नीति नहीं, स्थापित कानून है': भाजपा
विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता और आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने स्पष्ट किया कि विदेश मंत्रालय ने किसी नई नीति की घोषणा नहीं की है, बल्कि केवल एक लंबे समय से स्थापित कानूनी स्थिति को दोहराया है.
मालवीय ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारतीय अदालतों ने बार-बार यह माना है कि पासपोर्ट नागरिकता का पुख्ता सबूत नहीं है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2013 में यह स्पष्ट किया था और बाद में भी इसी सिद्धांत की पुष्टि की गई कि नागरिकता 'नागरिकता अधिनियम, 1955' के तहत पात्रता और सहायक साक्ष्यों के आधार पर निर्धारित होती है, न कि केवल एक दस्तावेज के पास होने से.
पासपोर्ट अधिनियम की धारा 20 क्या कहती है?
सरकारी स्पष्टीकरण के अनुसार, पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 केंद्र सरकार को यह विशेष शक्ति देती है कि वह सार्वजनिक हित में किसी ऐसे व्यक्ति को भी पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी कर सकती है जो भारत का नागरिक नहीं है.
अधिनियम में साफ लिखा है कि यदि सरकार को लगता है कि जनहित में ऐसा करना आवश्यक है, तो वह गैर-नागरिक को भी पासपोर्ट जारी कर सकती है. कानून खुद इस बात को स्वीकार करता है कि पासपोर्ट का होना और नागरिक होना दो अलग बातें हैं. नागरिकता का निर्धारण पूरी तरह से देश के संविधान और नागरिकता अधिनियम के नियमों के तहत होता है.
नागरिकता स्थापित करने वाले वास्तविक दस्तावेज
भाजपा नेता अमित मालवीय ने उन दस्तावेजों का भी उल्लेख किया जो भारत में नागरिकता स्थापित करने के कानूनी आधार बनते हैं। उन्होंने बताया कि भारत में नागरिकता कई आधिकारिक रिकॉर्ड्स के संयोजन (Combination) के माध्यम से स्थापित होती है, जिसमें शामिल हैं:
- जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)
- माता-पिता के नागरिकता रिकॉर्ड (जहाँ प्रासंगिक हो)
- स्कूल के रिकॉर्ड (School Records)
- मतदाता सूची में नाम (Electoral Roll Entries)
- सरकारी सेवा रिकॉर्ड
- भूमि और निवास से जुड़े दस्तावेज
पासपोर्ट सेवा दिवस की पृष्ठभूमि
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब देश ने 24 जून को 14वां 'पासपोर्ट सेवा दिवस' मनाया है. यह दिवस 24 जून 1967 को पासपोर्ट अधिनियम के लागू होने की याद में मनाया जाता है.
इसी उपलक्ष्य में विदेश मंत्रालय ने हाल ही में 17 से 19 जून 2026 तक नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में तीन दिवसीय वार्षिक क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारियों (RPO) के सम्मेलन का भी आयोजन किया था, जहां देश की पासपोर्ट सेवाओं को और सुदृढ़ बनाने पर चर्चा की गई थी.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 25, 2026 12:43 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

