देश

Union Budget 2023-24: केंद्रीय बजट देश को भारी कर्ज में धकेलने का साधन- मनीष सिसोदिया

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को केंद्रीय बजट 2023-24 की जमकर आलोचना की और दावा किया कि यह बजट केवल देश के अति धनाढ्यों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाया गया है, इसमें 'आम आदमी' के लिए कुछ नहीं है.

Union Budget 2023-24: केंद्रीय बजट देश को भारी कर्ज में धकेलने का साधन- मनीष सिसोदिया
Manish Sisodia

नई दिल्ली, 2 फरवरी : दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने बुधवार को केंद्रीय बजट 2023-24 की जमकर आलोचना की और दावा किया कि यह बजट केवल देश के अति धनाढ्यों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाया गया है, इसमें 'आम आदमी' के लिए कुछ नहीं है. सिसोदिया ने कहा कि यह (बजट) देश को केवल अतिरिक्त कर्ज में डुबाएगा जो 15 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है.

उन्होंने कहा, "यह भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का एक और 'जुमला' है. 2014 तक केंद्र सरकार पर 53 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था. लेकिन भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के लगातार दो कार्यकाल में देश 150 लाख करोड़ रुपये के कर्ज में डूब गया और यह बजट देश को और 15 लाख करोड़ रुपये के कर्ज में डुबो देगा." यह भी पढ़ें : Union Budget 2023: मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मनरेगा, खाद्य सुरक्षा के तहत निधि की कटौती पर चिंता व्यक्त की

सिसोदिया ने केंद्र सरकार पर हर बजट में बयानबाजी करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "हमने अतीत में ऐसे कई झूठे वादे सुने हैं, जैसे बुलेट ट्रेन की शुरुआत या किसानों की आय दोगुनी करने या 60 लाख रोजगार सृजित करने का वादा. बजट में रोजगार सृजन या भविष्य की योजनाओं के बारे में कोई उल्लेख नहीं किया गया है."

सिसोदिया ने बजट में दिल्ली के लिए आवंटन के बारे में बात करते हुए कहा, "दिल्ली के लोगों को केंद्र सरकार द्वारा बहिष्कृत माना जाता है. हमारे बार-बार अनुरोध के बावजूद करों के केंद्रीय पूल में दिल्ली का हिस्सा पिछले कुछ समय से 325 करोड़ रुपये पर स्थिर है. दो दशक. दिल्ली को केवल 325 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, हालांकि दिल्ली ने वित्तवर्ष 22 में प्रत्यक्ष करों में 1.78 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया."

उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य को करों के केंद्रीय पूल से 42 प्रतिशत का हिस्सा मिलता है, लेकिन बार-बार अनुरोध के बावजूद दिल्ली का हिस्सा नहीं बढ़ाया गया है. उन्होंने कहा, "केंद्र अपने करों के हिस्से से दिल्ली को प्रति व्यक्ति केवल 611 रुपये देता है. हालांकि, यह महाराष्ट्र को 64,524 करोड़ रुपये (प्रति व्यक्ति 4,963 रुपये), मध्य प्रदेश को 80,183 करोड़ रुपये (प्रति व्यक्ति 9,216 रुपये) और 37,252 करोड़ रुपये देता है. कर्नाटक (5,247 रुपये प्रति व्यक्ति). पूरे भारत में दिल्ली का हिस्सा सबसे कम है."

सिसोदिया ने कहा, "जब भी केंद्र सरकार के मंत्रियों से शिक्षा के क्षेत्र में उनके काम के बारे में पूछा जाता है, तो वे एनईपी 2020 के बारे में शेखी बघारते हैं. शिक्षा नीति पेश किए हुए तीन साल हो चुके हैं. यह सिफारिश करती है कि सरकार को शिक्षा पर बजट का कम से कम 6 प्रतिशत खर्च करना चाहिए." सिसोदिया ने कहा, "उसे भूल जाइए, केंद्र सरकार ने शिक्षा के बजट को कम कर दिया है. वे समावेशी विकास की बात करते हैं, लेकिन बेरोजगारी उनके लिए एजेंडा नहीं है. आज देश में बेरोजगारी दर 8.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है, और शहरी क्षेत्रों में 10 फीसदी लोग बेरोजगार हैं."

(The above story first appeared on LatestLY on Feb 02, 2023 09:57 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).