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Trump Tariff Impact: टैरिफ संबंधी चिंताओं के बीच भारतीय शेयर बाजारों में 2.2 प्रतिशत की गिरावट; पहली तिमाही की जीडीपी वृद्धि से मिलेगी राहत

अमेरिकी टैरिफ संबंधी चिंताओं के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के दबाव के कारण बाजारों में शुरुआती आशावाद कम होने से इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई बेंचमार्क सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स 2.2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए.

Trump Tariff Impact: टैरिफ संबंधी चिंताओं के बीच भारतीय शेयर बाजारों में 2.2 प्रतिशत की गिरावट; पहली तिमाही की जीडीपी वृद्धि से मिलेगी राहत

मुंबई, 30 अगस्त : अमेरिकी टैरिफ संबंधी चिंताओं के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के दबाव के कारण बाजारों में शुरुआती आशावाद कम होने से इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई बेंचमार्क सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स 2.2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए. मेटल, आईटी, रियल्टी और ऑटो शेयरों में मुनाफावसूली साफ देखी गई, जिनमें 0.5 प्रतिशत से 1.5 प्रतिशत तक की गिरावट आई.

इसके विपरीत, कैपिटल गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मीडिया और एफएमसीजी शेयरों में 0.4 प्रतिशत से 1 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई. ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन कमजोर रहा, निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांकों में क्रमशः 0.57 प्रतिशत और 0.39 प्रतिशत की गिरावट आई. प्रस्तावित जीएसटी रेशनलाइजेशन, अनुकूल मानसून आउटलुक और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में कमी तथा सितंबर में फेड दरों में संभावित कटौती जैसे वैश्विक कारकों के कारण इस सप्ताह बाजार सकारात्मक रूप से खुले. हालांकि, अमेरिकी टैरिफ की समयसीमा से पहले सतर्कता बरती गई, जिससे व्यापक स्तर पर बिकवाली हुई और लगातार तीन सत्रों तक बाजार लाल निशान में रहा. विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय वस्तुओं पर बाद में लगाए गए टैरिफ ने विश्वास को कम किया, जिससे सभी क्षेत्रों में मुनाफावसूली को बढ़ावा मिला. यह भी पढ़ें : India-Japan Relation: भारत-जापान का साथ निवेश, स्टार्टअप साझेदारी और कुशल पेशेवरों के लिए नए रास्ते खोलेगा; पीएम मोदी

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, "बड़े शेयरों में गिरावट आई, जबकि मध्यम और छोटे शेयरों में बढ़े हुए मूल्यांकन और बढ़ी हुई अनिश्चितता के कारण भारी गिरावट देखी गई." उन्होंने कहा कि आगे की बात करें तो, सरकारी खर्च और नीतिगत उपायों से प्रेरित भारत का पहली तिमाही का मजबूत जीडीपी आंकड़ा बाहरी चुनौतियों से निपटने में एक सुरक्षा कवच प्रदान कर सकता है, हालांकि राजकोषीय चिंताएं बनी हुई हैं. टैरिफ विवादों के समाधान से मार्केट सेंटीमेंट को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन 25 प्रतिशत का रेसिप्रोकल टैरिफ निकट से मध्यम अवधि तक प्रभावी रहने की संभावना है.

जिन क्षेत्रों पर असर पड़ने की संभावना है उनमें कपड़ा, उपकरण निर्माता, धातु, ऑटो और समुद्री खाद्य शामिल हैं. आईटी और फार्मा क्षेत्र में सेंटीमेंट पर दबाव देखने को मिल सकता है, हालांकि टैरिफ का उन पर सीधा असर नहीं पड़ेगा. भारत की अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून 2025 तिमाही में उम्मीदों से बेहतर 7.8 प्रतिशत की महत्वपूर्ण रियल जीडीपी वृद्धि के साथ बढ़त हासिल की. नायर ने कहा, "निवेशकों को आगे की जानकारी के लिए आगामी घरेलू और अमेरिकी मैक्रो डेटा पर कड़ी नजर रखनी चाहिए."

बजाज ब्रोकिंग रिसर्च ने एक रिलीज में कहा, "निफ्टी का तत्काल समर्थन आधार 24,400-24,350 के स्तर पर है, जो हाल के निचले स्तरों और प्रमुख रिट्रेसमेंट क्षेत्र का संगम है. इस स्तर से ऊपर सूचकांक के बने रहने से 24,400-24,900 के दायरे में कंसोलिडेशन होगा." निकट भविष्य में बाजारों में मिश्रित रुझान दिखने की उम्मीद है. विश्लेषकों का कहना है कि उपभोग और घरेलू विकास पर केंद्रित क्षेत्रों, जैसे कि एफएमसीजी, ड्यूरेबल्स, विवेकाधीन वस्तुएं, सीमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर को जीएसटी में कटौती, मजबूत मांग और सरकारी खर्च में वृद्धि से लाभ होने की संभावना है.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 30, 2025 01:08 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).