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आदिवासी बनाम बिहारी के झगड़े ने भड़काई असम में हिंसा

अवैध रूप से रहने वाले बिहार के लोगों को आदिवासियों की जमीन से खदेड़ने के मुद्दे पर हुई हिंसा और आगजनी के बाद असम का कार्बी आंग्लांग इलाका सुर्खियों में है.

आदिवासी बनाम बिहारी के झगड़े ने भड़काई असम में हिंसा
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

अवैध रूप से रहने वाले बिहार के लोगों को आदिवासियों की जमीन से खदेड़ने के मुद्दे पर हुई हिंसा और आगजनी के बाद असम का कार्बी आंग्लांग इलाका सुर्खियों में है. अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है और 45 घायल हैं.बुधवार को इलाके के दोनों जिलों में नए सिरे से कोई हिंसा तो नहीं हुई. लेकिन भारी तनाव है. इलाके में कर्फ्यू के बावजूद इसके दोनों पक्ष के लोग विभिन्न इलाकों में जमा हो रहे थे. राज्य पुलिस के अलावा सीआरपीएफ की पांच कंपनियों को भी इलाके में तैनात किया गया है. आतंक कम कर लोगों में भरोसा पैदा करने के लिए सुरक्षा बलों ने आज सुबह फ्लैग मार्च भी किया.

पुलिस के डीजीपी और आईजी (कानून व्यवस्था) अखिलेश सिंह ने पत्रकारों को बताया, "प्रदर्शन करने वालों ने पुलिस के जवानों पर पथराव किया. कुछ लोगों ने तीर-धनुष से भी हमले किए. लेकिन बीती रात से कहीं से किसी हिंसा की खबर नहीं मिली है.

इलाके के दोनों जिलों में अवैध रूप से रहने वाले बाहरी लोगों को खदेड़ने के मुद्दे पर लंबे समय से सामाजिक तनाव रहा है. स्थानीय आदिवासी समूह जमीन पर कब्जे की लड़ाई लड़ते रहे हैं. बाहरी लोगों को उजाड़ने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल इलाकों में कार्बी जनजाति के हितों की रक्षा की मांग में इलाके में बीते करीब पंद्रह दिनों से अनशन जारी था. इसबीच, मंगलवार को अनशन पर बैठे एक आंदोलनकारी की तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया. लेकिन इलाके में अफवाह फैल गई कि पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है. इसके बाद आंदोलनकारियों ने इलाके में कार्बी आंग्लांग स्वायत्त परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य और बीजेपी नेता तुलीराम रोंगहांग के घर और कई दुकानों में आग लगा दी.

मौके पर पहुंचे पुलिस वालों के साथ भी आंदोलनकारियों की भिड़ंत हुई. इसमें 36 पुलिसवालों समेत कम से कम 45 लोग घायल हो गए. हालात बेकाबू होते देख कर जिला प्रशासन ने इलाके में कर्फ्यू जारी कर दिया और इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी.

उग्रवाद के शिकार इलाके

राज्य के उत्तर कछार इलाके में स्थित कार्बी आंग्लांग जिला लंबे समय तक उग्रवाद के लिए सुर्खियों में रहा है. इलाके में सक्रिय विभिन्न उग्रवादी संगठन लंबे समय तक अलग राज्य की मांग उठाते रहे हैं. वर्ष 2021 में केंद्र और राज्य सरकार ने यहां सक्रिय पांच उग्रवादी गुटों के साथ एक तितरफा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. उसके बाद एक हजार से ज्यादा उग्रवादियों ने हथियार डाले. समझौते के तहत केंद्र ने इलाके के विकास के लिए एक हजार करोड़ का विशेष पैकेज देने के सथख ही कार्बी आंग्लांग स्वायत्त परिषद को और ज्यादा वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार सौंपे थे.

इससे पहले वर्ष 2016 में इस जिले को दो हिस्सों में बांटकर वेस्ट कार्बी आंग्लांग नामक एक अलग जिले का गठन किया गया था. असम सरकार ने इसी साल स्वायत्त परिषद से बाहर के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए कार्बी कल्याण स्वायत्त परिषद के गठन को हरी झंडी दिखाई है.

ताजा विवाद

इलाके में बाहरी लोगों के कथित अतिक्रमण और जमीन संबंधी विवाद लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है. सोमवार को भड़की हिंसा भी अवैध रूप से रहने वाले बिहार के लोगों के लोगों के अतिक्रमण हटाने की मांग में भड़की. यह मांग लंबे समय से उठ रही थी. इसके समर्थन में कार्बी समुदाय के लोग बीते छह दिसंबर से ही अनशन पर बैठे थे.

कार्बी समुदाय के लोगो ने विरोध जताने के लिए सोमवार को बिहारी समुदाय के लोगों की कुछ दुकानों में आग लगा दी थी. उसके विरोध में मंगलवार सुबह बिहारी समुदाय के लोग भी सड़कों पर उतर आए और कई स्थानीय लोगों के घरों और दुकानों में आग लगा दी. उसके बाद दोनो पक्षों के बीच हिंसक झड़प शुरू हो गई.

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पुलिस ने दोनों पक्षों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से एक इमारत में आग लगाने के कारण सुरेश दे नामक एक दिव्यांग की जलकर मौत हो गई. इसी तरह हिंसा में घायल अथिक तिमुंग नामक एक और युवक ने भी दम तोड़ दिया. लेकिन एक प्रत्यक्षदर्शी ने डीडब्ल्यू को बताया, "पुलिस ने फायरिंग भी की. अथिक तिमुंग नामक युवक की मौत पुलिस की गोली लगने से हुई." उसका दावा था कि पुलिस की गोली से कम से कम चार लोग घायल हो गए हैं.

कार्बी समुदाय के लोगों का आरोप है कि बाहरी लोग इलाके की जमीन पर लगातार कब्जा कर रहे हैं. खासकर बिहार से रोजगार के सिलसिले में जिले में आने वालों ने जानवरों की चारागाह वाली जमीन पर कब्जा कर लिया है. बार-बार कहने के बावजूद प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है.

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दूसरी ओर, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने पत्रकारों से कहा, "अदालत ने इलाके में बाहरी लोगों को उजाड़ने पर रोक लगाई है. हम अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं."

सोमवार की हिंसा के बाद मंगलवार को असम के आदिवासी कल्याण मंत्री रनोज पेगु मौके पर पहुंचे. उनसे बातचीत और समस्या के समाधान के लिए बातचीत का आश्वासन मिलने के बाद अनशन पर बैठे लोगों ने अपना आंदोलन खत्म कर दिया. लेकिन उस दिन दोनों पक्षों के बीच हिंसा और तेज हो गई.

इस विवाद को सुलझाने के लिए 26 दिसंबर को स्वायत्त परिषद और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच बैठक होनी है. लेकिन उससे पहले ही हिंसा भड़क गई. अब इस बैठक में मुख्यमंत्री के भी शामिल रहने की संभावना है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर डीडब्ल्यू को बताया, "इलाके में कार्बी और बिहारी समुदाय के बीच जमीन के मुद्दे पर लंबे समय से तनाव चल रहा है. यही तनाव इस हिंसा की मूल वजह बना."

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट में कार्बी आंग्लांग की स्थिति को 'बेहद संवेदनशील' बताते हुए कहा है कि वो वेस्ट कार्बी आंग्लांग की परिस्थिति पर करीबी निगाह रख रहे हैं. सरकार सभी संबंधित पक्षों के साथ मिल कर सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिश कर रही है. तमाम मुद्दे बातचीत के जरिए हल किए जाएंगे.

राजनीतिक विश्लेषक सुमन गोस्वामी डीडब्ल्यू से कहते हैं, "कार्बी आंग्लांग में स्थानीय लोगों और बाहर से जाकर वहां बसने वाले बिहार के लोगों के बीच जमीन पर विवाद काफी पुराना है. इस मुद्दे पर अक्सर तनाव पैदा होता रहा है. अब इसी तनाव ने हिंसक रूप ले लिया. फिलहाल तो इलाका शांत है. लेकिन इस मुद्दे के नहीं सुलझने तक यह आग आगे भी रह-रह कर भड़कती रहेगी."

(The above story first appeared on LatestLY on Dec 24, 2025 08:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).