NDA Government Education Ministry's Transitions: स्मृति ईरानी से लेकर धर्मेंद्र प्रधान तक, जानिए पिछले 12 वर्षों में किसने संभाली देश की शिक्षा मंत्रालय की कमान

नई जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी ने कहा, "मैं इस जिम्मेदारी को कर्तव्य और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं. मैं प्रधानमंत्री का आभारी हूं. पिछले चार-पांच वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति और कई महत्वपूर्ण पहलों को लागू किया. प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मैं पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करूंगा."

NDA Government Education Ministry's Transitions: केंद्र सरकार में शिक्षा मंत्रालय एक बार फिर बड़े बदलाव का गवाह बना है. नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में बढ़ते विरोध और राजनीतिक दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. इसके साथ ही पिछले 12 वर्षों में एनडीए सरकार के दौरान शिक्षा मंत्रालय का नेतृत्व करने वाले मंत्रियों की सूची में एक और नाम जुड़ गया है. List Of Education Ministers Of India: भारत के सभी शिक्षा मंत्रियों की पूरी सूची, कार्यकाल और शैक्षणिक योग्यता; जानें आजादी के बाद किसने कितने समय संभाली जिम्मेदारी

एनडीए सरकार में शिक्षा मंत्रालय का सफर

साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद शिक्षा मंत्रालय, जिसे पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD Ministry) के नाम से जाना जाता था और वर्ष 2020 में आधिकारिक तौर पर शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) नाम दिया गया, कई नेतृत्व परिवर्तन से गुजरा है.

स्मृति ईरानी (2014–2016)

मई 2014 में केंद्रीय मंत्री बनने के बाद स्मृति ईरानी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUP) को वापस लेने का फैसला किया. उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का प्रारंभिक मसौदा तैयार किया गया और वर्ष 2015 में नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) की शुरुआत हुई. हालांकि, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और हैदराबाद विश्वविद्यालय में हुए छात्र आंदोलनों को लेकर उनका कार्यकाल काफी चर्चा में रहा.

प्रकाश जावड़ेकर (2016–2019)

साल 2016 में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रकाश जावड़ेकर के कार्यकाल में भारतीय प्रबंधन संस्थान अधिनियम (IIM Act) 2017 लागू किया गया, जिसके तहत सभी आईआईएम को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया. इसी दौरान 2017 में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की स्थापना भी हुई. हालांकि, 2018 में सीबीएसई प्रश्नपत्र लीक मामले ने सरकार को मुश्किल में डाल दिया था.

रमेश पोखरियाल 'निशंक' (2019–2021)

मई 2019 में शिक्षा मंत्री बने रमेश पोखरियाल 'निशंक' के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को मंजूरी मिलना रही. जुलाई 2021 में कोविड-19 संक्रमण के बाद स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

धर्मेंद्र प्रधान (2021–2026)

धर्मेंद्र प्रधान लगभग पांच वर्षों तक शिक्षा मंत्री रहे और एनडीए सरकार में सबसे लंबे समय तक इस पद पर रहने वाले मंत्री बने. उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए और क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा दिया गया. हालांकि, प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों और पेपर लीक के मामलों को लेकर उन्हें लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. अंततः बढ़ते विवाद के बीच उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

अब प्रह्लाद जोशी के हाथों में जिम्मेदारी

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. वह पहले से ही उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.

नई जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी ने कहा, "मैं इस जिम्मेदारी को कर्तव्य और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं. मैं प्रधानमंत्री का आभारी हूं. पिछले चार-पांच वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति और कई महत्वपूर्ण पहलों को लागू किया. प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मैं पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करूंगा."

अब उनके सामने आगामी परीक्षा सुधारों को लागू करना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन को आगे बढ़ाना और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा दोबारा कायम करना सबसे बड़ी चुनौती होगी.

 

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