No UPI Day Called Off: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के बाद व्यापारियों ने वापस लिया 'नो यूपीआई डे' का विरोध; जानें क्या बनी सहमति

देश के प्रमुख खुदरा व्यापारी संगठनों ने आगामी 2 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी 'नो यूपीआई डे' आंदोलन वापस ले लिया है. यह निर्णय बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ व्यापारी प्रतिनिधिमंडल की उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली: आगामी गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को डिजिटल भुगतान बंद करने के व्यापारियों के प्रस्तावित आह्वान पर विराम लग गया है। Outlook Business की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से सकारात्मक वार्ता और आश्वासन मिलने के बाद व्यापारी संगठनों ने 'नो यूपीआई डे' का आह्वान वापस ले लिया है.

ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF) और ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) सहित कई व्यापारिक संगठनों ने चांदनी चौक से सांसद व कैट (CAIT) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल के नेतृत्व में वित्त मंत्री से मुलाकात की थी। बैठक में 20 से अधिक वरिष्ठ व्यापार प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

वित्त मंत्री से बैठक के बाद क्यों वापस हुआ विरोध?

News on AIR की रिपोर्ट के अनुसार, खंडेलवाल ने बैठक के बाद बताया कि वित्त मंत्री के साथ चर्चा बेहद सकारात्मक और रचनात्मक रही:

व्यापारियों ने सरकार के सामने रखीं ये मांगें

बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने प्रस्तावित व्यवस्था में संशोधन के लिए कई व्यावहारिक विकल्प पेश किए:

15 अक्टूबर से क्या बदलेगा? (UPI MDR Framework)

The New Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, विरोध वापस लेने का अर्थ यह नहीं है कि नया नियम रद्द हो गया है। अधिसूचित नियमों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

NPCI का पक्ष: 95% से अधिक लेन-देन पूरी तरह अप्रभावित

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, खुदरा दुकानों और दैनिक जरूरतों में होने वाले 95 प्रतिशत से अधिक P2M यूपीआई ट्रांजैक्शन 2,000 रुपये से कम मूल्य के होते हैं.

चूंकि ₹2,000 तक के सभी लेन-देन पर कोई एमडीआर नहीं लगेगा, इसलिए छोटे किराना दुकानदारों, सब्जी विक्रेताओं और दैनिक खुदरा बाजार पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल रिटेल और आभूषण जैसे कम मार्जिन वाले उच्च मूल्य के कारोबारियों के साथ सरकार का संवाद जारी रहेगा ताकि 15 अक्टूबर से पहले व्यावहारिक समाधान तलाशा जा सके.

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