TMC Internal Rift: 'हिम्मत है तो खुलेआम इस्तीफा देकर दिखाओ'; बागी सांसदों पर बरसे कीर्ति आजाद, अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को बताया सर्वोपरि
कीर्ति आजाद (Photo Credits: X)

नई दिल्ली, 9 जून: पश्चिम बंगाल (West Bengal) की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चुनावी नतीजों के बाद उपजा आंतरिक असंतोष अब पूरी तरह सतह पर आ गया है. टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद (Kirti Azad) ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान पार्टी के नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाने वाले असंतुष्ट और बागी नेताओं पर बेहद तीखा और सीधा हमला बोला. वरिष्ठ पार्टी नेता कल्याण बनर्जी (Kalyan Banerjee) की मौजूदगी में आयोजित इस संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में आजाद ने बागी सुर अपनाने वालों को 'गद्दार' (Traitors) करार दिया और कहा कि चुनाव खत्म होने के बाद आंतरिक शिकायतें दर्ज कराना केवल राजनीतिक अवसरवादिता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी के सभी 29 लोकसभा सांसद 'मां, माटी, मानुष' के नारे, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के आशीर्वाद और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के दिशा-निर्देशों के तहत ही जीत दर्ज कर संसद पहुंचे हैं. यह भी पढ़ें: TMC Crisis: ममता बनर्जी को बड़ा झटका, 20 लोकसभा सांसदों ने NDA को समर्थन देने का किया ऐलान, टूट सकती है पार्टी

चुनाव के बाद उठ रहे बागी सुरों की टाइमिंग पर उठाए गंभीर सवाल

मीडिया को संबोधित करते हुए कीर्ति आजाद ने असंतुष्ट पार्टी सदस्यों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों की टाइमिंग पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने पूछा कि अगर इन नेताओं को पार्टी की कार्यप्रणाली या आंतरिक नीतियों से कोई वास्तविक समस्या या शिकायत थी, तो वे मतदान से पहले तक पूरी तरह शांत क्यों बैठे रहे?

आजाद ने कड़े लहजे में कहा, "मैं इन 'गद्दारों' से पूछना चाहता हूँ कि अगर आपको कोई दिक्कत थी, तो आपने चुनाव संपन्न होने का इंतजार क्यों किया? आपको ये सारे मुद्दे और शिकायतें चुनाव से पहले उठानी चाहिए थीं. अब जब चुनाव खत्म हो चुके हैं, तो नेतृत्व पर तरह-तरह के मनगढ़ंत आरोप मढ़े जा रहे हैं, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा." यह भी पढ़ें: TMC Crisis: ममता बनर्जी को बड़ा झटका, 20 लोकसभा सांसदों ने NDA को समर्थन देने का किया ऐलान, टूट सकती है पार्टी

'अगर आपमें राजनीतिक नैतिकता है, तो इस्तीफ़ा दें'

वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे का दिया हवाला

पार्टी के भीतर राजनीतिक मर्यादा और नैतिकता को परिभाषित करने के लिए कीर्ति आजाद ने हाल ही में राज्यसभा और टीएमसी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देने वाले दिग्गज नेता सुखेंदु शेखर रॉय (जिन्हें आजाद ने शुभेंदु शेखर कहकर संबोधित किया) का उदाहरण पेश किया. आजाद ने तर्क दिया कि नीतियां अलग होने पर पद छोड़ना ही सही राजनीतिक शुचिता है.

उन्होंने कहा, "सुखेंदु शेखर रॉय द्वारा उठाए गए आरोप सही थे या गलत, यह एक अलग विषय है.  लेकिन कम से कम उन्होंने एक राजनीतिक नैतिकता और आत्मसम्मान का परिचय दिया. उन्होंने उस पार्टी से इस्तीफा दे दिया जिससे उनके वैचारिक मतभेद थे, और उस राज्यसभा सीट को भी तुरंत त्याग दिया जो उन्हें पार्टी के सिंबल पर मिली थी." आजाद ने वर्तमान में टीएमसी के भीतर रहकर असंतोष फैला रहे नेताओं को चुनौती दी कि यदि उनमें जरा भी आत्मसम्मान बचा है, तो वे तुरंत अपने पदों से खुलेआम इस्तीफा दें और आगामी चुनाव भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर लड़कर देख लें.

जमीनी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा का संकल्प; हार के कारणों पर रखा पक्ष

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंतिम चरण में कीर्ति आजाद ने पार्टी के रैंक एंड फाइल (कॉर्डर) को आश्वस्त करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को किसी भी हाल में अकेला नहीं छोड़ेगा. उन्होंने घोषणा की कि यदि किसी भी संसदीय क्षेत्र में टीएमसी कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने या उन पर हिंसक हमले करने की कोशिश की जाती है, तो कल्याण बनर्जी के मार्गदर्शन में पार्टी के वरिष्ठ नेता स्वयं उन क्षेत्रों का दौरा करेंगे और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए जमीन पर खड़े रहेंगे.

राज्य में पार्टी के प्रदर्शन और हालिया राजनीतिक चुनौतियों पर बात करते हुए आजाद ने निष्कर्ष निकाला कि टीएमसी पश्चिम बंगाल में अपनी योग्यताओं या कमियों के कारण नहीं हारी है. इसके विपरीत, उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को परास्त करने और कमजोर करने के लिए विरोधी ताकतों द्वारा एक सुनियोजित और सामूहिक रणनीतिक षड्यंत्र (Coordinated Effort) रचा गया था, जिसका पार्टी पूरी मजबूती से मुकाबला कर रही है.