MP High Court Judgment: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; खुद मर्जी से घर छोड़ विवाहेतर संबंध बनाने वाली पत्नी को नहीं मिल सकता तलाक
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महिला की तलाक की याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि जो पत्नी अपनी मर्जी से ससुराल छोड़ देती है और विवाहेतर संबंध में लिप्त पाई जाती है, वह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अपनी ही गलती का फायदा उठाकर तलाक की राहत नहीं पा सकती.
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जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने वैवाहिक विवादों और तलाक (Divorce) के मामलों को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था दी है. हाईकोर्ट ने एक महिला की तलाक की अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि कोई भी जीवनसाथी, जो स्वेच्छा से अपना ससुराल छोड़ देता है और बाद में किसी अन्य व्यक्ति के साथ विवाहेतर संबंध (Extramarital Affair) में शामिल पाया जाता है, वह कानूनन तलाक की राहत पाने का हकदार नहीं है.
जस्टिस जी. एस. अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ (Division Bench) ने अपने फैसले में कहा कि पत्नी अपने पति के खिलाफ लगाए गए क्रूरता, दहेज उत्पीड़न और शारीरिक हिंसा के आरोपों को अदालत में साबित करने में पूरी तरह नाकाम रही. यह भी पढ़ें: Violent Sex Case: क्या मैरिटल रेप छूट के बावजूद हिंसक यौन संबंधों के लिए पतियों पर चल सकता है मुकदमा? सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला
हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 23(1)(a) का हवाला
अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act) की धारा 23(1)(a) का विशेष रूप से उल्लेख किया. कोर्ट ने कहा कि यह धारा स्पष्ट करती है कि कोई भी याचिकाकर्ता अदालत से राहत पाने के लिए अपनी ही किसी गलती या गलत आचरण का लाभ (Advantage of one's own wrong) नहीं उठा सकता.
चूंकि महिला ने खुद अपनी मर्जी से वैवाहिक घर छोड़ा था और वह एक अन्य व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध में थी, इसलिए वह कानूनन तलाक की डिक्री पाने के लिए अयोग्य हो जाती है. इस महत्वपूर्ण फैसले को 2026 लाइव लॉ (MP) 276 के रूप में रिपोर्ट किया गया है.
साल 2015 में हुई थी शादी; पत्नी ने लगाए थे गंभीर आरोप
इस मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, जोड़े की शादी साल 2015 में हुई थी और उनकी कोई संतान नहीं है. पत्नी ने पति पर क्रूरता का आरोप लगाते हुए तलाक की अर्जी दाखिल की थी. महिला का दावा था कि उसका पति शराब पीने के बाद उसके साथ मारपीट करता था, दहेज की मांग करता था, उसके चरित्र पर कीचड़ उछालता था और यहां तक कि उसे दूसरों के साथ अवैध संबंध बनाने के लिए मजबूर करता था. महिला ने यह भी कहा कि उसे याचिका दायर करने से तीन साल पहले ही घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया था.
दूसरी ओर, पति ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पति ने अदालत को बताया कि उसकी पत्नी अपने भाई के साथ अपना स्त्रीधन (Stridhan) और अन्य कीमती सामान लेकर अपनी मर्जी से घर छोड़कर चली गई थी. पति ने यह भी रिकॉर्ड पर लाया कि 2019 में जब उसकी पत्नी लापता हो गई थी, तब उसने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट (Missing Person's Report) भी दर्ज कराई थी, क्योंकि वह अपनी पत्नी को वापस लाकर गृहस्थ जीवन को दोबारा शुरू करना चाहता था.
निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट ने रखा बरकरार
पारिवारिक न्यायालय (Trial Court) ने पूर्व में दोनों पक्षों के साक्ष्यों की जांच करने के बाद पत्नी की तलाक याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वह क्रूरता या परित्याग (Desertion) को साबित नहीं कर सकी.
हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के इस फैसले को सही ठहराया. खंडपीठ ने टिप्पणी की कि महिला द्वारा लगाए गए दहेज उत्पीड़न के आरोप बेहद अस्पष्ट (Vague) थे. उसने अपनी शिकायत में यह कहीं नहीं बताया कि दहेज के रूप में किन वस्तुओं की मांग की गई थी और न ही वह क्रूरता की प्रकृति को स्पष्ट कर सकी. कोर्ट ने इन आरोपों को बिना किसी पुख्ता सबूत के केवल "सामान्य और हवा-हवाई" करार दिया.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 17, 2026 03:58 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

