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ये है दिल्ली जिमखाना क्लब खाली कराने के मामले की पूरी कहानी

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने संबंधी आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है.

ये है दिल्ली जिमखाना क्लब खाली कराने के मामले की पूरी कहानी
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने संबंधी आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. हालांकि इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है.दिल्ली के लुटियंस इलाके में स्थित जिमखाना क्लब को खाली कराने के सरकार के आदे पर 26 मई को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने सरकार के आदेश पर रोक लगाने से तो इनकार कर दिया लेकिन इस मामले में सरकार को नोटिस जारी किया है और आठ हफ्ते में जवाब मांगा है.

दिल्ली हाई कोर्ट में इस बारे में दो याचिकाएं दायर की गई हैं जिनमें केंद्र सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें जिमखाना क्लब को 27.3 एकड़ ज़मीन ख़ाली करने को कहा गया है. हाई कोर्ट ने दोनों याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई की. एक याचिका क्लब के पुराने सदस्य विजय खुराना ने दायर की थी और जबकि दूसरी दिल्ली याचिका जिमखाना स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दायर हुई है.

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केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि सरकार दिल्ली जिमखाना क्लब परिसर पर जबरदस्ती कब्जा नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि क्लब यदि पांच जून तक जमीन खाली करने में नाकाम रहता है, तो सरकार कानून के तहत उचित प्रक्रिया का पालन करेगी.

क्या है जिमखाना क्लब का पूरा मामला?

22 मई को दिल्ली के पॉश इलाके में स्थित करीब 113 साल पुराने जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ जमीन को केंद्र सरकार ने पांच जून के भीतर खाली करने का निर्देश दिया. सरकार ने सार्वजनिक उद्देश्य का हवाला देते हुए जमीन वापस लेने का आदेश दिया था.

सोमवार को क्लब के सदस्य और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जस्टिस अवनीश झिंगन के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया और तत्काल सुनवाई की मांग की. अदालत ने अपील स्वीकार करते हुए अगले ही दिन यानी मंगलवार को केस को सूचीबद्ध कर दिया.

मुख्य याचिका जिमखाना क्लब के सदस्य विजय खुराना की ओर से दायर की गई थी. 22 मई को केंद्र सरकार के लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (एलएंडडीओ) ने क्लब को आदेश जारी कर कहा था कि वह 2, सफदरजंग रोड स्थित 27.3 एकड़ परिसर को खाली कर सरकार को सौंप दे.

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सरकार ने अपने आदेश में मूल लीज डीड की धारा चार का हवाला दिया है जिसके तहत सार्वजनिक उद्देश्य के लिए जरूरत पड़ने पर सरकार लीज खत्म कर जमीन का कब्जा वापस ले सकती है.सरकारी आदेश में कहा गया है कि दोबारा कब्जा लेने की स्थिति में जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ की पूरी जमीन और उस पर बने सभी भवन, संरचनाएं, लॉन और अन्य चीजें पूरी तरह से भारत के राष्ट्रपति के माध्यम से एलएंडडीओ की संपत्ति हो जाएंगी. आदेश में कहा गया है कि दिल्ली के बेहद संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाके में स्थित यह परिसर रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बेहद जरूरी है.

सरकार के फैसले की आलोचना

सरकार के इस फैसले के बाद करीब एक सदी तक दिल्ली के प्रभावशाली और अभिजात्य वर्ग के मेल-जोल का केंद्र रहे इस क्लब के बंद होने का खतरा मंडराने लगा. दिल्ली जिमखाना क्लब दिल्ली के लुटियंस इलाके के बीचों-बीच सफदरजंग रोड पर स्थित है. इसके पास में ही लोक कल्याण मार्ग है जिस पर प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास है. यह विशाल परिसर पहले इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड के नाम से जाना जाता था जो बाद में बदलकर दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड हो गया. इस क्लब को यह जमीन सामाजिक और खेल क्लब चलाने के लिए पट्टे पर दी गई थी.

लुटियंस दिल्ली में विभिन्न संस्थानों को पट्टे पर आवंटित ज्यादातर जमीन भारत सरकार के स्वामित्व में हैं और सरकार सुरक्षा और राष्ट्रहित में विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए जमीन वापस लेने के लिए अपने अधिकार का इस्तेमाल कर सकती है. लेकिन क्लब की जमीन को अचानक खाली कराने के नोटिस और उसे अधिग्रहीत करने के सरकार के फैसले की काफी आलोचना हो रही है. आलोचना करने वालों में बीजेपी के कई नेता भी हैं. पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर किरन बेदी सरकार के इस फैसले को बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किरन बेदी ने लिखा है, "यह सचमुच बेहद दुखद है. उम्मीद है कि इस प्रस्ताव पर फिर से विचार किया जाएगा. दिल्ली जिमखाना क्लब सिर्फ एक प्रॉपर्टी नहीं है. यह हमारी संस्थागत और खेल विरासत का हिस्सा है. बदलाव जरूरी हो सकता है, लेकिन इतिहास और विरासत को सोच-समझकर सहेजने की जरूरत है.''

यही नहीं, सरकार के इस फैसले से क्लब के करीब छह सौ कर्मचारियों के भविष्य पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे. कई कर्मचारी तो यहां लंबे समय से काम कर रहे हैं जिन्होंने दशकों तक क्लब की सुविधाओं का रखरखाव किया है, लेकिन अब उनके सामने भी रोजी-रोटी का संकट आ पड़ा है.

कब बना जिमखाना क्लब और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

तीन जुलाई 1913 को अस्तित्व में आया दिल्ली जिमखाना क्लब भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित क्लबों में से एक है. दिसंबर 1911 में कलकत्ता की जगह दिल्ली को राजधानी बनाए जाने की घोषणा के साथ ही लुटियंस दिल्ली यानी राजधानी के तौर पर दिल्ली के तमाम भवनों और सड़कों का निर्माण शुरू हुआ. ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुटियंस ने इसका डिजाइन तैयार किया था और उन्हीं के नाम पर इस इलाके का नाम लुटियंस जोन पड़ा. इसे बनाने में करीब बीस साल लगे. लुटियंस जोन का औपचारिक उद्घाटन 10 फरवरी 1931 को हुआ था.

जिमखाना क्लब का भी निर्माण उसी दौर में हुआ और तब इसका नाम 'इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब' था. स्पेंसर हार्कोर्ट बटलर इसके पहले अध्यक्ष थे. हालांकि पहले यह क्लब उत्तरी दिल्ली में था और मौजूदा जगह पर यह क्लब साल 1928 में शिफ्ट हुआ. इस क्लब में उस वक्त ब्रिटिश अफसरों के साथ-साथ सैन्य और पुलिस अफसर और कुछ अभिजात्य वर्ग के लोग भी आते थे. आजादी के बाद इसके नाम से 'इम्पीरियल' शब्द हटा दिया गया और तब से यह सिर्फ 'दिल्ली जिमखाना क्लब' कहा जाने लगा.

अभिजात्य वर्ग का प्रतीक

करीब 1,200 सदस्यों वाले इस क्लब में प्रवेश पाना काफी मुश्किल है और क्लब का सदस्य होना न सिर्फ दिल्ली के बल्कि देश के महत्वपूर्ण लोगों में शुमार होना है. यह क्लब लंबे समय से नौकरशाहों, सेना के बड़े अफसरों, जजों, राजनेताओं, उद्योगपतियों और पुराने कारोबारी परिवारों की पसंदीदा जगह रही है. यहां की सदस्यता को किसी बड़े सरकारी पद जितना प्रतिष्ठित माना जाता है.

बताया जाता है कि यहां सदस्य बनने के लिए आवेदन देने के बाद 20-30 साल तक इंतजार करना पड़ता है. पिछले 113 सालों से यह क्लब समाज के उच्च वर्ग के लोगों की सामाजिक और खेल गतिविधियों का केंद्र रहा है.

दिल्ली जिमखाना क्लब 27.3 एकड़ में बना हुआ है जिसमें कई टेनिस कोर्ट के अलावा स्क्वैश कोर्ट, बैडमिंटन कोर्ट, बिलियर्ड्स रूम, स्विमिंग पूल, तीन लाउंज बार और दर्जनों कॉटेज भी हैं. इस क्लब में टेनिस और बैडमिंटन के कुछ महत्वपूर्ण मुकाबले भी हो चुके हैं. साल 1966 में इस क्लब के टेनिस कोर्ट में भारत और जर्मनी का बेहद चर्चित मुकाबला हुआ था.

(The above story first appeared on LatestLY on May 26, 2026 06:10 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).