Delhi Police ने जिस महिला को भेजा Bangladesh, वह निकली भारतीय नागरिक? भारत सरकार पर भड़की Dhaka की कोर्ट
प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credits : X)

Indian Citizen Suneli Khatun Jailed in Bangladesh: बांग्लादेश की राजधानी ढाका (Dhaka News) से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. यहां एक स्थानीय कोर्ट ने भारत सरकार (Indian Government) को 26 वर्षीय सुनेली खातून और उसके परिवार को वापस लाने का आदेश दिया है. सुनेली पर भारत में अवैध रूप से रहने का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद भारतीय अधिकारियों ने उसे और उसके परिवार को जबरन बांग्लादेश भेज दिया था.

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बांग्लादेश की अदालत ने भारत से क्या कहा?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुनेली खातून पश्चिम बंगाल के बीरभूम (Birbhum, West Bengal) की रहने वाली हैं. वह अपने पति दानिश शेख, 8 साल के बेटे साबिर और अपनी रिश्तेदार स्वीटी बीबी और उसके दो बेटों के साथ दिल्ली (Delhi Illegal Immigrants) में रहती थीं. वहां ये कचरा बीनने का काम करती थीं. इसी साल जून में, दिल्ली पुलिस ने उन्हें अवैध प्रवासी करार देते हुए हिरासत में लिया और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के बांग्लादेश भेज दिया.

बांग्लादेश के चपई नवाबगंज (Chapai Nawabganj) इलाके से गिरफ्तार किए गए इन छह भारतीयों के पास Aadhar card और भारतीय पते के प्रमाण मिले. अदालत ने अपने आदेश में साफ तौर पर कहा कि वे सभी भारतीय नागरिक हैं और उन्हें जल्द से जल्द भारत वापस भेजा जाना चाहिए.

दिल्ली पुलिस को कोलकाता HC की फटकार

कोलकाता उच्च न्यायालय (Kolkata High Court) ने केंद्र सरकार को उन्हें चार हफ्तों के भीतर भारत वापस लाने का भी आदेश दिया. अदालत ने दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को फटकार लगाते हुए कहा कि किसी को इतनी जल्दी अवैध घोषित करना गंभीर लापरवाही है.

मानसिक रूप से कमजोर और प्रेगनेंट है पीड़िता

सुनेली की मानसिक स्थिति भी बहुत खराब बताई जा रही है. बीरभूम से आए सामाजिक कार्यकर्ता मोजिफुल शेख ने बताया कि सुनेली जेल में रो रही थी और कह रही थी, "हमारा क्या कसूर है? बस मुझे घर वापस जाने दो." बताया जा रहा है कि वह गर्भवती है और जेल में फिसलकर घायल हो गई थी, लेकिन उसका इलाज नहीं किया गया.

'बंगाली भाषी लोगों को 'बांग्लादेशी' बताया जा रहा'

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद समीरुल इस्लाम (Rajya Sabha MP Samirul Islam) ने पूरे मामले पर केंद्र सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि गरीब बंगाली भाषी लोगों को "बांग्लादेशी" बताकर बेवजह निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा, "बांग्लादेशी अदालत ने खुद उन्हें भारतीय नागरिक माना है, फिर भी उन्हें वापस लाने में देरी क्यों?"

भारतीय अधिकारियों ने अपनी सफाई में क्या कहा?

इस बीच, भारतीय अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया आसान नहीं है. आधार कार्ड नागरिकता (Indian Citizenship) का ठोस सबूत नहीं है. सबसे पहले, पहचान सत्यापन किया जाएगा और फिर बीएसएफ और बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड्स (BGB) के बीच एक फ्लैग मीटिंग के बाद उन्हें वापस भेज दिया जाएगा.