World IVF Day 2025: क्या आईवीएफ बच्चा होने की गारंटी है? फर्टिलिटी एक्सपर्ट से जानें वो बातें जो आपको कोई नहीं बताता
आईवीएफ (IVF) निसंतान जोड़ों के लिए एक मेडिकल प्रक्रिया है, लेकिन यह सफलता की गारंटी नहीं है. इसकी कामयाबी महिला की उम्र, जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत ज़्यादा निर्भर करती है. यह हर किसी के लिए एक व्यक्तिगत सफ़र है जिसमें विशेषज्ञ की सलाह और सही जानकारी बहुत ज़रूरी है.
World IVF Day: आईवीएफ (IVF) का नाम आजकल उन जोड़ों के लिए काफी जाना-पहचाना हो गया है जिन्हें बच्चा पैदा करने में मुश्किलें आ रही हैं. लेकिन आज भी इस प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में पूरी जानकारी नहीं है. लोग अक्सर इसे बच्चा होने की गारंटी मान लेते हैं, जैसे कि बस प्रक्रिया शुरू की और बच्चा गोद में आ जाएगा.
लेकिन सच्चाई यह है कि आईवीएफ एक जटिल मेडिकल सफ़र है. भले ही इसने लाखों लोगों को माता-पिता बनने का सुख दिया है, लेकिन इसके सबसे अच्छे नतीजे तब मिलते हैं जब कपल पूरी जानकारी, मानसिक तैयारी और इसकी संभावनाओं और सीमाओं को समझकर इस प्रक्रिया को अपनाते हैं.
आईवीएफ को समझिए
आसान भाषा में, आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कई स्टेप्स होते हैं और हर स्टेप सही समय पर होना बहुत ज़रूरी है.
- इसकी शुरुआत हॉर्मोन के इंजेक्शन से होती है ताकि महिला के अंडाशय (ovaries) में एक से ज़्यादा अंडे बनें.
- फिर एक छोटी सी प्रक्रिया के ज़रिए इन अंडों को शरीर से बाहर निकाला जाता है. यह प्रक्रिया बेहोश करके की जाती है.
- अंडों को बाहर निकालने के बाद, उन्हें लैब में स्पर्म (शुक्राणु) के साथ मिलाया जाता है, जिससे भ्रूण (embryo) बनता है.
- कुछ दिनों बाद, एक या ज़्यादा स्वस्थ भ्रूण को महिला के गर्भाशय (uterus) में वापस डाल दिया जाता है.
- इसके बाद दो हफ़्तों का इंतज़ार करना पड़ता है, जो भावनात्मक रूप से इस सफ़र का सबसे मुश्किल दौर होता है.
क्या आईवीएफ हमेशा सफल होता है?
आईवीएफ के बारे में सबसे बड़ा मिथक यही है कि यह हमेशा सफल होता है. सच तो यह है कि इसकी सफलता दर कई बातों पर निर्भर करती है. इसमें सबसे बड़ा फैक्टर महिला की उम्र है. उम्र बढ़ने के साथ अंडों की क्वालिटी और संख्या दोनों कम हो जाती है. यही वजह है कि 35 साल से कम उम्र की महिलाओं में सफलता की दर ज़्यादा होती है, जबकि ज़्यादा उम्र की महिलाओं को एक से ज़्यादा बार कोशिश करनी पड़ सकती है या डोनर एग्स (donor eggs) की ज़रूरत पड़ सकती है.
आपकी जीवनशैली का भी बहुत असर पड़ता है. सिगरेट पीना, मोटापा, डायबिटीज़ या थायरॉइड जैसी बीमारियां, और बहुत ज़्यादा तनाव का असर अंडे और स्पर्म दोनों की क्वालिटी पर पड़ता है. हो सकता है कि आपका फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट इलाज शुरू करने से पहले आपको कुछ महीनों के लिए अपनी जीवनशैली सुधारने की सलाह दे. इसे इलाज में देरी न समझें, बल्कि सफलता की संभावना बढ़ाने का एक तरीका मानें.
मानसिक स्वास्थ्य पर इसका क्या असर होता है?
एक और सच्चाई जिसके लिए लोग तैयार नहीं होते, वह है आईवीएफ का मानसिक तनाव. यह प्रक्रिया शारीरिक और मानसिक रूप से थका देने वाली हो सकती है, खासकर तब जब कई बार कोशिश करनी पड़े. ऐसे में कपल्स के लिए यह अच्छा होगा कि वे किसी काउंसलर, सपोर्ट ग्रुप या बस एक-दूसरे का सहारा लें. यह समझना ज़रूरी है कि इस दौरान थका हुआ या निराश महसूस करना बिल्कुल सामान्य है.
हर किसी का सफ़र अलग होता है
आखिर में, यह जानना ज़रूरी है कि आईवीएफ का हर किसी का सफ़र एक जैसा नहीं होता. हो सकता है कि कोई कपल पहली ही कोशिश में गर्भधारण कर ले, तो किसी दूसरे को ज़्यादा समय लग सकता है या ICSI (इक्सी), PGT (जेनेटिक टेस्टिंग) या डोनर आईवीएफ जैसी अतिरिक्त मदद की ज़रूरत पड़ सकती है. यह कोई एक फिक्स इलाज नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति की ज़रूरत के हिसाब से बनाया गया एक पर्सनलाइज्ड प्लान है.
डिस्क्लेमर : इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता, पूर्णता, उपयुक्तता या वैधता के लिए लेटेस्टली ज़िम्मेदार नहीं है. यह जानकारी फर्टिलिटी एक्सपर्ट की राय के आधार पर दी गई है. लेख में दी गई जानकारी, तथ्य या राय लेटेस्टली के विचारों को नहीं दर्शाती है और लेटेस्टली इसके लिए कोई ज़िम्मेदारी या दायित्व नहीं लेता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 25, 2025 10:13 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

