वेनेजुएला में भारतीय नाविक राकेश चौहान की संदिग्ध मौत, शव से दिल, दिमाग और फेफड़े समेत सभी मुख्य अंग गायब होने का आरोप

वेनेजुएला में मर्चेंट नेवी जहाज पर ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले भारतीय नाविक राकेश चौहान का शव करीब एक महीने बाद जब उत्तर प्रदेश के देवरिया पहुंचा, तो दोबारा हुए पोस्टमॉर्टम में हैरान करने वाला खुलासा हुआ. परिजनों का आरोप है कि शव के भीतर दिल, दिमाग, फेफड़े और किडनी समेत एक भी मुख्य अंग मौजूद नहीं था, जिसके बाद उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है.

देवरिया/नई दिल्ली: वेनेजुएला (Venezuela) में मर्चेंट नेवी के एक मालवाहक जहाज पर कार्यरत भारतीय नाविक राकेश चौहान (Rakesh Chauhan) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला गहरा गया है. वेनेजुएला से भारत वापस लाए गए नाविक के पार्थिव शरीर का जब उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के देवरिया (Deoria) में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराया गया, तो डॉक्टरों ने पाया कि शव के अंदर एक भी मुख्य आंतरिक अंग मौजूद नहीं था. परिजनों का आरोप है कि राकेश के शरीर से दिमाग, दिल, फेफड़े, लीवर और किडनी जैसे सभी जरूरी अंग गायब कर दिए गए हैं. इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद 'फेडरेशन ऑफ सीफर्स यूनियंस ऑफ इंडिया' (FSUI) ने मामले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्चस्तरीय जांच और विदेश मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. यह भी पढ़ें: National Doctors’ Day: पीएम मोदी ने वेनेजुएला में 'ऑपरेशन अमिस्ताद' के तहत मदद कर रहे भारतीय डॉक्टरों की सराहना की

दोबारा पोस्टमॉर्टम में हुआ सनसनीखेज खुलासा

33 वर्षीय राकेश चौहान उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले थे और नवंबर 2025 में मर्चेंट नेवी में मरीन फिटर के तौर पर काम करने वेनेजुएला गए थे। मई 2026 में वेनेजुएला में उनकी मौत की खबर आई। वेनेजुएला प्राधिकारियों की ओर से बिना किसी विस्तृत पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट या आधिकारिक चिकित्सा दस्तावेजों के करीब एक महीने बाद 4 जून को शव परिजनों को सौंपा गया।

जहाज कंपनी के बयानों में विसंगति के कारण संदेह होने पर परिवार ने स्थानीय जिला मजिस्ट्रेट (DM) से दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग की। भारत में हुई इस जांच रिपोर्ट में सामने आया कि शव पर सिर से लेकर पैर तक (गर्दन से प्यूबिक सिम्फिसिस तक 22 टांके और एक कान से दूसरे कान तक 21 टांके) गहरे टांके लगे हुए थे, लेकिन अंदरुनी हिस्से पूरी तरह खाली थे। डॉक्टरों के मुताबिक, शरीर में टेस्ट के लिए कोई अंग न होने के कारण फिलहाल मौत के सही कारणों का पता लगाना नामुमकिन हो गया है.

भारतीय नाविक राकेश चौहान के परिवार का आरोप है कि शव से अंग गायब हैं

शिपिंग कंपनी के दावों पर उठे सवाल

राकेश के परिवार का कहना है कि शिपिंग कंपनी ने उन्हें शुरुआत में सूचित किया था कि राकेश जहाज पर चक्कर खाकर गिर गए थे और इलाज के दौरान दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई.  हालांकि, कंपनी की ओर से दी गई जानकारियों में काफी विरोधाभास था.

परिजनों ने आरोप लगाया कि कंपनी ने शव को एक हफ्ते में भारत भेजने का वादा किया था, लेकिन उसे लगभग एक महीने तक डीप फ्रीजर में रखा गया. इसके अलावा, शव की सुपुर्दगी से जुड़े दस्तावेजों पर भी राकेश की पत्नी के नाम के फर्जी हस्ताक्षर होने का दावा किया जा रहा है. नाविक के पिता राम देव चौहान ने आशंका जताई है कि यह एक सोची-समझी साजिश हो सकती है, जिसमें अंग तस्करी का एंगल भी शामिल हो सकता है.

सरकार और कूटनीतिक स्तर पर जांच की मांग

सीफर्स यूनियन (FSUI) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक विस्तृत बयान जारी कर वेनेजुएला प्रशासन की इस गोपनीयता और लापरवाही पर कड़े सवाल उठाए हैं. यूनियन का कहना है कि बिना परिवार की सहमति या पूर्व सूचना के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंगों को इस तरह हटा देना बेहद गंभीर कृत्य है. विशेषज्ञ मानते हैं कि कुछ फॉरेंसिक जांचों में अंग निकाले जाते हैं, लेकिन विस्तृत रिपोर्ट और दस्तावेजों का न होना इस मामले को पूरी तरह संदिग्ध बनाता है.

यूनियन ने भारत सरकार, वेनेजुएला में मौजूद भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय (MEA) से अपील की है कि वे इस मामले को कूटनीतिक स्तर पर उठाएं. पीड़ित परिवार ने घटना की निष्पक्ष जांच कराने, वेनेजुएला सरकार से मूल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मंगवाने और उचित मुआवजे की मांग की है. फिलहाल इस मामले पर विदेश मंत्रालय या संबंधित विदेशी शिपिंग कंपनी की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

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