ED ने पार की हदें, संविधान का किया उल्लंघन, सुप्रीम कोर्ट ने TASMAC केस में मनी लॉन्ड्रिंग जांच पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की शराब कंपनी TASMAC पर ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच पर रोक लगाई है. कोर्ट ने कहा कि ED अपनी सीमाएं पार कर रहा है और संविधान का उल्लंघन कर रहा है. अब ED को बताना होगा कि इस मामले में असली अपराध (predicate offence) क्या है.

Representational Image | Pixabay

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को कड़ी फटकार लगाई और तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन (TASMAC) मुख्यालय पर की गई छापेमारी पर रोक लगा दी. कोर्ट ने कहा कि ED ने अपनी हदें पार कर दी हैं और संविधान का उल्लंघन कर रही है.

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ (Chief Justice BR Gavai) और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, “आपका प्रवर्तन निदेशालय सारी सीमाएं लांघ रहा है. सरकार के अधीन किसी संस्था के खिलाफ आपराधिक मामला कैसे बनता है?”

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें TASMAC में कथित 1,000 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच ED को करने की इजाजत दी गई थी. कोर्ट ने ED से पूछा कि जब अधिकारियों के खिलाफ FIR है, तो सीधे संस्था पर कार्रवाई क्यों की जा रही है.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य बिंदु

क्या है मामला? 

6 मार्च से 8 मार्च के बीच ED ने TASMAC के मुख्यालय में छापेमारी की थी. आरोप था कि अधिकारी शराब की बोतलों की कीमतें बढ़ाकर, टेंडर में हेरफेर करके और रिश्वत लेकर 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की गड़बड़ियों में शामिल हैं. इन आरोपों के आधार पर पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार या TASMAC द्वारा 41 से 46 FIR दर्ज की गई थीं.

ED ने इन्हीं FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की, लेकिन तमिलनाडु की DMK सरकार और TASMAC ने इसे सत्ता के दुरुपयोग का मामला बताया और छापेमारी को अवैध करार दिया. पहले यह मामला मद्रास हाई कोर्ट गया, जहां याचिका खारिज हो गई. इसके बाद यह सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.

ED की दलील 

ED की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि वे कोर्ट में जवाब दाखिल करेंगे. यह मामला केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच अधिकारों की खींचतान का ताजा उदाहरण बन गया है. सुप्रीम कोर्ट की फटकार और कार्रवाई पर रोक से ED की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं, और यह देखने लायक होगा कि आगे कोर्ट किस दिशा में फैसला देता है.

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