Voter Deletion Row: चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस; राहुल गांधी व INDIA गठबंधन की SIR याचिका पर जवाब तलब, एक याचिकाकर्ता के आचरण पर CJI ने जताई कड़ी आपत्ति

मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन और मतदाताओं के कथित तौर पर नाम हटाए जाने के विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और 'इंडिया' गठबंधन के शीर्ष नेताओं द्वारा दायर संयुक्त याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar (Photo Credits: YouTube/Election Commission of India)

नई दिल्ली: देश भर में मतदाता सूची संशोधन और करोड़ों मतदाताओं के नाम कथित तौर पर विलोपित किए जाने को लेकर छिड़ा सियासी घमासान अब देश की शीर्ष अदालत की चौखट पर औपचारिक सुनवाई के चरण में पहुंच गया है.

लाइवलॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन के 9 प्रमुख नेताओं की रिट याचिका पर संज्ञान लेते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त को नोटिस जारी किया है. अदालत ने निर्वाचन आयोग के निर्णय लेने की प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा करने के संकेत दिए हैं.

चुनाव आयोग के शीर्ष नेतृत्व से जवाब तलब, याचिकाकर्ता के आचरण पर CJI की टिप्पणी

शीर्ष अदालत की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग के पूरे शीर्ष नेतृत्व से औपचारिक जवाब मांगा है:

राहुल गांधी और विपक्षी दलों की मुख्य मांगें क्या हैं?

विपक्षी नेताओं ने 12 अक्टूबर को याचिका (W.P.(C) No. 001351/2026) दायर की थी, जिसे प्रारंभिक प्रक्रियात्मक सुधारों के बाद 13 अक्टूबर को विधिवत पंजीकृत किया गया था:

एसआईआर और 13 करोड़ वोटों के कथित विलोपन पर टकराव

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की आड़ में देश भर में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से काट दिए गए हैं.

विपक्ष ने मांग की है कि चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज की गई आपत्तियों, बैठकों के मिनट्स और फाइलों को सार्वजनिक किया जाए. वहीं दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को पारदर्शी, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने के लिए कानूनी प्रावधानों के तहत पूरी तरह नियमों के अनुरूप चलाई जा रही है.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब चुनाव आयोग को अदालत के समक्ष अपना विस्तृत हलफनामा पेश करना होगा.

Share Now