स्पाइसजेट को मिली राहत, सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर 3 सप्ताह के लिए रोक लगाई
उच्चतम न्यायालय ने स्पाइसजेट को राहत देते हुए शुक्रवार को मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर तीन सप्ताह के लिए रोक लगा दी, जिसमें उच्च न्यायालय ने क्रेडिट सुइस को 24 मिलियन डॉलर का भुगतान करने में विफल रहने पर एयरलाइन को अपना परिचालन बंद करने के लिए कहा था.
नई दिल्ली, 28 जनवरी : उच्चतम न्यायालय ने स्पाइसजेट को राहत देते हुए शुक्रवार को मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर तीन सप्ताह के लिए रोक लगा दी, जिसमें उच्च न्यायालय ने क्रेडिट सुइस को 24 मिलियन डॉलर का भुगतान करने में विफल रहने पर एयरलाइन को अपना परिचालन बंद करने के लिए कहा था. हालांकि, मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की पीठ ने एयरलाइन की खिंचाई करते हुए कहा, "यदि आप एयरलाइंस नहीं चलाना चाहते हैं, तो हम आपको दिवालिया घोषित कर देंगे. यह एयरलाइन चलाने का तरीका नहीं है." कोर्ट ने स्पाइसजेट को क्रेडिट सुइस के साथ समझौता करने की कोशिश करने को भी कहा. क्रेडिट सुइस ने कंपनी अदालत के समक्ष समापन याचिका दायर की थी जिसमें दावा किया गया था कि स्पाइसजेट ज्यूरिख स्थित एमआरओ सेवा प्रदाता एसआर टेक्निक्स के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहालिंग (एमआरओ) के लिए 24 मिलियन डॉलर से अधिक का ऋणी था.
एमआरओ कंपनी ने क्रेडिट सुइस एजी को एसआर टेक्निक्स की ओर से भुगतान प्राप्त करने का अधिकार सौंपा था और कंपनी अदालत ने स्पाइसजेट के समापन को स्वीकार किया था. कंपनी अदालत द्वारा समापन याचिका को स्वीकार करने के बाद, स्पाइसजेट ने इसके खिलाफ मद्रास उच्च न्यायालय में अपील की. हाईकोर्ट ने अपील पर विचार करने से इनकार कर दिया था. सुनवाई के दौरान, स्पाइसजेट का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने शीर्ष अदालत को अवगत कराया कि एयरलाइन कुछ काम करने की कोशिश कर रही है और इस तरह अदालत से तीन सप्ताह की अवधि के लिए सुनवाई स्थगित करने का आग्रह किया. यह भी पढ़ें : Odisha: नाबालिग से बलात्कार के मामले में एक व्यक्ति को 10 वर्ष का कारावास
इससे पहले, स्पाइसजेट ने मद्रास उच्च न्यायालय में तर्क दिया था कि एसआर टेक्निक्स के पास 2009 से 2015 तक नागरिक उड्डयन महानिदेशक (डीजीसीए) से अनुमोदन नहीं था, लेकिन अदालत ने इस तर्क पर ध्यान नहीं दिया और कहा कि एसआर टेकनीक की सेवाओं का एयरलाइन ने लाभ उठाया था. एयरलाइन कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि स्विस कंपनी ने डीजीसीए की मंजूरी होने की 'धोखाधड़ी गलत व्याख्या' की थी और तर्क दिया कि यह भारतीय और अन्य लागू कानूनों के खिलाफ था और इससे पूरा समझौता व्यर्थ या अनावश्यक हो गया है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jan 28, 2022 01:52 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

