मुस्लिम वोट बैंक के लिए यूसीसी का पुरजोर विरोध करने के लिए तैयार सपा
भाजपा 2024 के आम चुनाव से पहले यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लाने की तैयारी कर रही है, ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीतिक पेंच एक-दूसरे से टकराने लगे है. इस कड़ी में, उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने कहा है कि वह यूसीसी को लागू करने के कदम का कड़ा विरोध करेगी.
लखनऊ, 17 दिसम्बर : भाजपा 2024 के आम चुनाव से पहले यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लाने की तैयारी कर रही है, ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीतिक पेंच एक-दूसरे से टकराने लगे है. इस कड़ी में, उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने कहा है कि वह यूसीसी को लागू करने के कदम का कड़ा विरोध करेगी. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, भाजपा जानबूझकर समाज में दरार पैदा करने के लिए ऐसे मुद्दे उठाती है. समाजवादी पार्टी सद्भाव की राजनीति करती है, आपस में मेलजोल की राजनीति करती है जो 'नेताजी' (सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव) ने हमें सिखाया है. सपा ऐसे विधेयकों का कभी समर्थन नहीं करेगी और इसका पुरजोर विरोध करेगी.''
मैनपुरी सीट पर उनकी पार्टी की जीत और खतौली विधानसभा सीट पर उनके गठबंधन सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल द्वारा भाजपा को हराने के बाद अखिलेश यादव काफी उत्साहित हैं. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अपने एम-वाई (मुस्लिम यादव) वोट बैंक को बनाए रखने के लिए, सपा यूसीसी का कड़ा विरोध करेगी, जो किसी भी मामले में अल्पसंख्यकों, मुख्य रूप से मुसलमानों के खिलाफ भाजपा का एक और उपकरण है. समाजवादी पार्टी जानती है कि वर्तमान में राज्य के अन्य राजनीतिक दल भाजपा को टक्कर देने की स्थिति में नहीं हैं और अकेले सपा ही इस मुद्दे पर जोरदार लड़ाई लड़ सकती है. यह भी पढ़ें : MP: मध्यप्रदेश भाजपा ने की ‘एक राष्ट्र, एक संविधान’ की वकालत
सपा प्रवक्ता अब्दुल हफीज गांधी ने कहा, भारत एक ऐसा देश है जो अपनी परंपराओं और संस्कृतियों की विविधता के लिए जाना जाता है. हम इस विविधता में एकता लाने के लिए जाने जाते हैं. समान नागरिक संहिता विविधता की एकीकृत अवधारणा के खिलाफ है. अब्दुल हफीज गांधी ने कहा, यूसीसी एक निर्देशक सिद्धांत है. यह बात समझ में नहीं आती कि जब वर्तमान सरकार मौलिक अधिकारों को कुचल रही है तो सरकार संविधान के अनुच्छेद 44 को लागू करने पर इतना जोर क्यों दे रही है, जो न्यायसंगत भी नहीं है.
समाजवादी पार्टी का कहना है कि आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और वंचित वर्गों पर बहुसंख्यक समुदाय के कानूनों और प्रथाओं को थोपना अनुचित है. गांधी ने कहा, हमारा संविधान वर्तमान में पूर्वोत्तर राज्यों की परंपराओं और संस्कृतियों के संरक्षण की अनुमति देता है. यूसीसी में यह मुश्किल होगा और अंत में, मौजूदा व्यवस्था के लिए, यूसीसी ध्रुवीकरण का एक उपकरण है. इसके अलावा, उन्होंने कहा कि एक समान नागरिक कानून क्यों बनाया जाए, जबकि आपराधिक कानून भी समान नहीं हैं, क्योंकि राज्य के विशिष्ट संशोधनों के परिणामस्वरूप विभिन्न राज्यों के लिए अलग-अलग कानून हैं.
जब भी सरकार विधेयक लाएगी, समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर भाजपा के खिलाफ जोरदार लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रही है. एक अन्य सपा नेता ने कहा: हम मानते हैं कि सभी हिंदू यूसीसी का समर्थन नहीं करेंगे, क्योंकि बहुसंख्यक समुदाय का एक बड़ा वर्ग यथास्थिति बनाए रखने और प्रत्येक व्यक्ति को उसकी व्यक्तिगत पसंद के धर्म की अनुमति देने के पक्ष में है. इस बीच, बहुजन समाज पार्टी सहित अन्य दलों ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है, जो सपा के पक्ष में काम कर रहा है, जिसे आम चुनावों में अल्पसंख्यक समर्थन मिलने की उम्मीद है.
(The above story first appeared on LatestLY on Dec 17, 2022 05:13 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

