Kota Playschool Incident: कोटा के प्लेस्कूल में 3 साल की मासूम से दरिंदगी की आशंका; पुलिस ने खंगाले 10 दिनों के CCTV फुटेज, 11 लोगों के लिए DNA सैंपल
राजस्थान के कोटा शहर में एक निजी प्लेस्कूल में पढ़ने वाली पौने तीन वर्ष (2 वर्ष 9 माह) की मासूम बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न की गंभीर आशंका का मामला सामने आया है. बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर जब परिजन उसे बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले गए, तो स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान निजी अंगों में चोट और सूजन देखकर डॉक्टर ने उत्पीड़न का संदेह जताया.
कोटा: राजस्थान की कोचिंग व शिक्षा नगरी कोटा में एक निजी प्लेस्कूल में पढ़ने वाली मासूम बच्ची के साथ कथित छेड़छाड़ और यौन शोषण की आशंका ने अभिभावकों और पुलिस-प्रशासन को हिलाकर रख दिया है. बच्ची की उम्र तीन वर्ष से भी कम (करीब 2 साल 9 महीने) होने के कारण वह स्पष्ट रूप से घटना का विवरण देने में असमर्थ है.
कोटा शहर की पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. तेजस्विनी गौतम के निर्देश पर पुलिस ने बाल यौन अपराध संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है. महिला उत्पीड़न अनुसंधान प्रकोष्ठ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) मुकेश सांखला के नेतृत्व में विशेष टीम मामले की पड़ताल कर रही है. यह भी पढ़ें: Pune: पुणे में MPSC की तैयारी कर रहे छात्र ने लगाई फांसी; सुसाइड नोट में ₹2.5 लाख के कर्ज का जिक्र, भर्ती में देरी व पेपर लीक पर गहराया आक्रोश
तबीयत खराब होने पर डॉक्टर के पास ले गए परिजन, तब हुआ खुलासा
इस बेहद संवेदनशील घटना की जानकारी तब सामने आई जब बच्ची अचानक अस्वस्थ हो गई:
- चिकित्सक को हुआ संदेह: परिजन जब बच्ची को नियमित जांच के लिए एक बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) के पास ले गए, तो डॉक्टर ने बच्ची के निजी अंगों में असामान्य सूजन और आंतरिक चोट के निशान देखे.
- उत्पीड़न की आशंका: डॉक्टर ने स्थिति को संदिग्ध मानते हुए परिजनों को सूचित किया कि यह किसी प्रकार के शारीरिक व यौन उत्पीड़न का मामला हो सकता है.
- अस्पताल में जांच और शिकायत: इसके बाद बच्ची को जेके लोन अस्पताल ले जाकर विस्तृत चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। डॉक्टर की राय के आधार पर परिजनों ने स्थानीय पुलिस थाने में शिकायत दी, जिस पर 3 सितंबर को औपचारिक एफआईआर दर्ज की गई.
केवल 'अंकल' बोल पा रही है बच्ची, स्कूल स्टाफ पर शक गहराया
जांच अधिकारियों के अनुसार, पीड़िता की अत्यंत कम उम्र होने के कारण उससे विस्तृत बयान लेना संभव नहीं हो पा रहा है:
- सीमित शब्दावली: पुलिस पूछताछ और परिजनों की बातचीत में बच्ची केवल "अंकल" और "फिंगर" जैसे सीमित शब्द ही दोहरा पा रही है.
- दिनचर्या केवल घर और स्कूल तक सीमित: परिजनों ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि बच्ची घर के अलावा केवल पास स्थित प्लेस्कूल में ही जाती थी और कहीं बाहर उसका आना-जाना नहीं था.
- सफाईकर्मी को देखकर सहमी: परिजनों का कहना है कि जब बच्ची को स्कूल के कर्मचारियों के सामने लाया गया, तो वह विशेष रूप से सफाईकर्मी (स्वीपर) को देखकर अत्यधिक भयभीत हो गई और मां से लिपट गई.
FSL टीम ने जुटाए साक्ष्य; 11 लोगों के DNA सैंपल लैब भेजे गए
घटना की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की टीम को स्कूल और संबंधित स्थानों से भौतिक साक्ष्य संकलित करने के लिए तैनात किया गया:
- डीएनए मिलान: पुलिस ने प्लेस्कूल के सभी पुरुष कर्मचारियों (सफाईकर्मी, चपरासी व अन्य स्टाफ) तथा परिवार के कुछ सदस्यों समेत कुल 11 लोगों के रक्त व डीएनए सैंपल एकत्र किए हैं.
- तुलनात्मक जांच: इन सैंपलों को एफएसएल जांच के लिए भेजा गया है, ताकि बच्ची के कपड़ों और चिकित्सकीय जांच से मिले फॉरेंसिक नमूनों से उनका मिलान किया जा सके.
10 दिनों के CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस; रिपोर्ट का इंतजार
कोटा शहर की एसपी डॉ. तेजस्विनी गौतम ने बताया कि प्लेस्कूल परिसर और आसपास के रास्तों पर लगे सुरक्षा कैमरों के पिछले 10 दिनों के रिकॉर्ड्स खंगाले जा रहे हैं:
- टाइमलाइन की पड़ताल: पुलिस यह पुष्टि करने का प्रयास कर रही है कि स्कूल अवधि के दौरान बच्ची किसके संपर्क में आई और क्या कोई संदिग्ध व्यक्ति गैर-अधिकृत समय पर परिसर में मौजूद था.
- वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई: पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि चूंकि प्रारंभिक मेडिकल रिपोर्ट अनिर्णायक रही है, इसलिए एफएसएल और डीएनए की अंतिम रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही आगे की ठोस वैधानिक कार्रवाई और गिरफ्तारी की जाएगी. पुलिस का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। विस्तृत रिपोर्ट ETV Bharat पर भी उपलब्ध है.