Sandeshkhali Violence: चुनाव आयोग की जांच के दायरे में आ सकती है बंगाल पुलिस की भूमिका
संदेशखाली में हाल के घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल में आगामी लोकसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल पुलिस के एक वर्ग की "निष्पक्षता" भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) की जांच के दायरे में आ सकती है.
कोलकाता, 15 फरवरी : संदेशखाली में हाल के घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल में आगामी लोकसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल पुलिस के एक वर्ग की "निष्पक्षता" भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) की जांच के दायरे में आ सकती है. जिला पुलिस प्रशासन के एक वर्ग की भूमिका पर न केवल विपक्षी दलों या विभिन्न राष्ट्रीय आयोगों द्वारा बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा भी सवाल उठाए गए हैं.
सूत्रों ने कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय और राज्यपाल सी.वी.आनंद बोस की प्रतिकूल टिप्पणियों के बाद राज्य पुलिस प्रशासन के एक वर्ग की भूमिका ईसीआई की जांच के दायरे में आ गई है. राज्यपाल बोस संदेशखाली में पुलिस की उसी "तटस्थता" कारक पर सवाल उठा रहे हैं. यह भी पढ़ें : Catfight on Valentine’s Day In Delhi : ‘ वैलेंटाइन डे ‘ के मौके पर दिल्ली के एक मूवी थिएटर में दो महिलाओं के बीच जमकर गालीगलौच और लड़ाई हुईं, देखे वीडियो
भगोड़े तृणमूल कांग्रेस नेता शेख शाहजहां, जो ईडी और सीएपीएफ अधिकारियों पर 5 जनवरी के हमले का आरोपी मास्टरमाइंड भी है, के सहयोगियों द्वारा यौन उत्पीड़न को लेकर स्थानीय महिलाओं के विरोध प्रदर्शन के बाद पिछले हफ्ते से संदेशखाली में उबाल है. इस संबंध में पुलिस प्रशासन में बेचैनी तब कई गुना बढ़ गई, जब कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हाल ही में स्थानीय महिलाओं द्वारा विरोध प्रदर्शन शुरू होने के तुरंत बाद लगभग पूरे संदेशखाली क्षेत्र में अंधाधुंध धारा 144 लगाने की टिप्पणी की.
अदालत की नकारात्मक टिप्पणियों से लैस, विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने धारा 144 लागू करने में प्रशासन की वास्तविक मंशा पर सवाल उठाना शुरू कर दिया, खासकर इस संबंध में कि क्या यह कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया गया था या वास्तव में जमीनी स्तर पर जानकारी बाहरी दुनिया में आने से रोकने के लिए किया गया था.
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि ईसीआई की वास्तविक सोच तब सामने आ सकती है, जब आयोग की पूर्ण पीठ 4 मार्च से मतदान की तैयारी के लिए दो दिवसीय यात्रा पर राज्य का जायजा लेने आएगी. . शीर्ष नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठकें करने के अलावा, आयोग की पूर्ण पीठ राज्य के विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेगी.
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति के बारे में ईसीआई का दृष्टिकोण पहले से ही हालिया घटनाक्रम में परिलक्षित होता है, जहां आयोग ने लोकसभा चुनावों के लिए पश्चिम बंगाल में केंद्रीय सशस्त्र बलों की 920 कंपनियों की तैनाती की मांग की है, जो कि सभी भारतीय राज्यों में सबसे अधिक है.. शहर स्थित एक राजनीतिक पर्यवेक्षक ने कहा, "संदेशखाली घटनाक्रम ने निश्चित रूप से राज्य प्रशासन, विशेषकर पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता के बारे में संदेह बढ़ा दिया है."
(The above story first appeared on LatestLY on Feb 15, 2024 01:11 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

