Sambhal Land Scam: करोड़ों की सरकारी जमीन निजी हाथों में सौंपने का खेल, पूर्व पालिका अध्यक्ष और ईओ सहित 32 लोगों पर एफआईआर दर्ज

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में ग्राम समाज की करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन को फर्जी दस्तावेजों के जरिए निजी मालिकाना हक में ट्रांसफर करने के आरोप में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष और तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (EO) समेत 32 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pexels)

संभल: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के संभल जिले (Sambhal) में ग्राम समाज की करोड़ों रुपये की बेशकीमती सरकारी जमीन (Government Land) को हड़पने का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस भूमि घोटाले में पुलिस ने पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (EO), पालिका कर्मचारियों, जनप्रनिधियों और कुछ निजी व्यक्तियों सहित कुल 32 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है. संभल कोतवाली में दर्ज यह मामला फर्जी दस्तावेजों और कूटरचित पट्टों के आधार पर सरकारी जमीन को अवैध रूप से निजी मालिकों के नाम ट्रांसफर करने और उस पर अतिक्रमण करने से जुड़ा है. यह भी पढ़ें: Haldia Petrochemicals Fire Video: हल्दिया में नैफ्था सप्लाई पाइपलाइन में लगी भीषण आग, कई कर्मचारी झुलसे; घटना का वीडियो वायरल

हसनपुर-मुरादाबाद रोड की जमीन पर हुआ फर्जीवाड़ा

प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचाने वाले इस मामले की एफआईआर के मुताबिक, हसनपुर-मुरादाबाद रोड पर स्थित करीब 2.367 हेक्टेयर (लगभग 38 बीघा) ग्राम समाज की आरक्षित भूमि को सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर करके निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज करा दिया गया था.

शिकायतकर्ता का आरोप है कि करोड़ों रुपये की इस सरकारी जमीन को पूरी योजना के साथ राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से हड़पा गया.

1967 के पट्टे और 2008 के आदेश का खेल

इस पूरे घोटाले की जड़ें दशकों पुरानी हैं। शिकायत के अनुसार, साल 1967 के एक कथित फर्जी पट्टा रिकॉर्ड को आधार बनाकर साल 2008 में इस जमीन का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) आदेश हासिल कर लिया गया. म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी होते ही इस बेशकीमती ग्राम समाज की भूमि को अवैध तरीके से निजी स्वामित्व में बदल दिया गया और बाद में इस पर मेंथा फैक्ट्री तथा बोन मिल जैसी व्यावसायिक गतिविधियों के जरिए अतिक्रमण कर लिया गया.

तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों पर गिरी गाज

एफआईआर में स्पष्ट आरोप है कि सरकारी जमीन को निजी हाथों में सौंपने के इस पूरे षड्यंत्र में नगर पालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर काम किया। नामजद आरोपियों में:

शिकायतकर्ता का मानना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जाती है, तो इस साजिश में शामिल कई अन्य प्रभावशाली चेहरों के नाम भी बेनकाब हो सकते हैं.

पुलिस और प्रशासन की कड़ी कार्रवाई

संभल कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद सभी संबंधित दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड, 2008 के म्यूटेशन आदेश और 1967 के लीज से जुड़े सभी कागजातों की बारीकी से स्क्रूटनी की जा रही है.

प्रशासन ने साफ किया है कि जांच पूरी होते ही सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और जालसाजी करने वाले सभी दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.

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