Punjab Stray Dog Crackdown: पंजाब में आवारा कुत्तों के खिलाफ बड़ा एक्शन, संवेदनशील सार्वजनिक स्थलों से 21 दिन में हटाए जाएंगे कुत्ते
पंजाब में आवारा कुत्तों के आतंक से निपटने के लिए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाया है. स्थानीय निकाय विभाग ने एक सर्कुलर जारी कर संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों से 21 दिनों के भीतर आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया है. इसके तहत स्कूलों, अस्पतालों और पार्कों को 'नो-रिलीज जोन' घोषित किया गया है.
Punjab Stray Dog Crackdown: पंजाब में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और आतंक से आम जनता को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है. मुख्यमंत्री भगवंत मान की घोषणा के बाद, स्थानीय निकाय विभाग (Department of Local Government) ने हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुपालन में राज्य भर में 'स्ट्रे एनिमल कंट्रोल टास्क फोर्स' (Stray Animal Control Task Force) के गठन के आदेश जारी किए हैं. सरकार ने एक निश्चित समय-सीमा (टाइम-बाउंड एक्शन प्लान) तय की है, जिसके तहत अगले 21 दिनों के भीतर सभी संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को पूरी तरह हटा दिया जाएगा.
संवेदनशील क्षेत्र घोषित हुए 'नो-रिलीज जोन'
सरकार द्वारा जारी आधिकारिक सर्कुलर के अनुसार, राज्य के सभी स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, धार्मिक स्थलों और पार्कों जैसे उच्च-आवाजाही (High-footfall) वाले क्षेत्रों को 'नो-रिलीज जोन' (No-Release Zones) घोषित किया गया है.
इसका सीधा मतलब यह है कि इन निर्दिष्ट क्षेत्रों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को नसबंदी या टीकाकरण के बाद दोबारा इसी इलाके में वापस नहीं छोड़ा जाएगा. यह आदेश राज्य के सभी नगर निगमों, नगर कौंसिलों और नगर पंचायतों पर तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है.
टास्क फोर्स का गठन और चरणबद्ध कार्ययोजना
इस अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने एक कड़ा प्रशासनिक ढांचा तैयार किया है, जिसकी निगरानी सीधे कमिश्नर या कार्यकारी अधिकारी करेंगे.
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3 दिन के भीतर: हर शहरी स्थानीय निकाय में 'स्ट्रे एनिमल Control टास्क फोर्स' का गठन अनिवार्य किया गया है.
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7 दिन के भीतर: संवेदनशील क्षेत्रों और वहां मौजूद आवारा कुत्तों की संख्या व उनकी नसबंदी की स्थिति का पूर्ण सर्वेक्षण (Survey) पूरा करना होगा.
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10 दिन के भीतर: समर्पित शिकायत हेल्पलाइन, नियंत्रण कक्ष (Control Rooms) और रैपिड रिस्पांस टीमें पूरी तरह सक्रिय कर दी जाएंगी.
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15 दिन के भीतर: कुत्तों को रखने के लिए शेल्टर होम (Shelters) के लिए भूमि की पहचान की जाएगी और होल्डिंग सुविधाएं स्थापित की जाएंगी.
21 दिनों में स्थानांतरण और नसबंदी का वैज्ञानिक प्रोटोकॉल
इस नीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 21 दिनों के भीतर सभी संवेदनशील सार्वजनिक क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को पूरी तरह हटाना है. इन जानवरों को 'पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम, 2023' और 'पशु क्रूरता निवारण अधिनियम' (Prevention of Cruelty to Animals Act) के नियमों के तहत सुरक्षित शेल्टर होम में स्थानांतरित किया जाएगा.
वर्तमान में पंजाब के 23 जिलों में केवल 18 पशु जन्म नियंत्रण केंद्र काम कर रहे हैं, जो हर महीने लगभग 3,500 कुत्तों की नसबंदी करते हैं. सरकार ने अब इन केंद्रों का विस्तार सभी जिलों में करने का प्रस्ताव रखा है. सामान्य क्षेत्रों में कुत्तों के प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक "पकड़ो-नसबंदी करो-टीका लगाओ-छोड़ो" (Catch-Sterilise-Vaccinate-Release) प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा, लेकिन 'नो-रिलीज जोन' में यह नियम लागू नहीं होगा.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और जन सुरक्षा का संवैधानिक कर्तव्य
पंजाब सरकार का यह सख्त कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा 19 मई 2026 को दिए गए हालिया फैसले और इससे पहले अगस्त व नवंबर 2025 में की गई टिप्पणियों के संदर्भ में आया है. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21 - जीने का अधिकार) के तहत स्थानीय अधिकारियों का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें.
न्यायालय ने सार्वजनिक सुरक्षा के लिए बेहद आक्रामक, लाइलाज रूप से बीमार या रेबीज से पीड़ित हिंसक कुत्तों को मानवीय तरीके से इच्छामृत्यु (Euthanasia) देने की भी अनुमति दी है.
राज्य में तेजी से बढ़े डॉग बाइट के मामले
यह कार्रवाई पंजाब में डॉग बाइट (कुत्तों के काटने) के लगातार बढ़ते और डराने वाले मामलों को देखते हुए की गई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में राज्य में करीब 3.35 लाख डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए थे. वहीं, इस साल अप्रैल महीने तक ही यह आंकड़ा 1.37 लाख को पार कर चुका है, जो औसतन 1,100 से अधिक मामले प्रतिदिन बैठता है. हाल ही में लुधियाना में आवारा कुत्तों के झुंड द्वारा एक किशोर को नोच-नोच कर मार डालने की घटना के बाद जनता में भारी आक्रोश था.
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD), परिवहन विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और पुलिस को भी शामिल किया गया है. ये एजेंसियां राजमार्गों के आसपास आवारा पशुओं के मूवमेंट कॉरिडोर की मैपिंग करेंगी और संवेदनशील हिस्सों पर 24 घंटे गश्त दल तैनात करने के साथ आपातकालीन हेल्पलाइन के साइनबोर्ड लगाएंगी. सभी स्थानीय निकायों को 15 दिनों के भीतर पहली अनुपालन रिपोर्ट और उसके बाद हर महीने कैप्चरिंग व नसबंदी का पूरा डेटा जमा करना होगा.