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Punjab Politics: सीएम भगवंत मान का बड़ा दावा; अकाल तख्त द्वारा 'गुरु द्रोही' घोषित किए जाने के बाद वायरल वीडियो को बताया फर्जी और राजनीतिक साजिश

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरु साहिबान की तस्वीरों के कथित अपमान और शराब पीने से जुड़े वायरल वीडियो को सिरे से खारिज कर दिया है. अकाल तख्त द्वारा वीडियो को फॉरेंसिक रूप से असली बताते हुए उन्हें 'गुरु द्रोही' घोषित किए जाने के बाद, मान ने इसे एआई-जनरेटेड और विरोधियों की राजनीतिक साजिश करार दिया है.

Punjab Politics: सीएम भगवंत मान का बड़ा दावा; अकाल तख्त द्वारा 'गुरु द्रोही' घोषित किए जाने के बाद वायरल वीडियो को बताया फर्जी और राजनीतिक साजिश
भगवंत मान (Photo Credits: File Image)

चंडीगढ़/अमृतसर, 17 जून: पंजाब (Punjab) के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Chief Minister Bhagwant Mann) ने सोशल मीडिया (Social Media) पर प्रसारित हो रहे एक बेहद विवादास्पद वीडियो को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे अपने खिलाफ एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश बताया है. इस वायरल क्लिप में कथित तौर पर मुख्यमंत्री से मिलते-जुलते एक व्यक्ति को शराब के नशे में सिख गुरुओं की तस्वीरों का अनादर करते हुए दिखाया गया है. इंटरनेट पर इस वीडियो की विस्फोटक प्रकृति को देखते हुए नेटिजन्स के एक वर्ग द्वारा इसकी तुलना "इंडियाज एप्स्टीन फाइल्स" (India's Epstein Files) से की जा रही है. इस बीच, सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था, श्री अकाल तख्त साहिब ने इस वीडियो को फॉरेंसिक रूप से सही पाते हुए 15 जून 2026 को भगवंत मान को 'गुरु द्रोही' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित कर दिया है, जिसके बाद पंजाब की राजनीति में भूचाल आ गया है. यह भी पढ़ें: Bhagwant Mann Viral Video Row: अकाल तख्त ने सीएम भगवंत मान को घोषित किया 'गुरु द्रोही', मुख्यमंत्री ने वीडियो को फर्जी बताकर फैसले को किया खारिज

अकाल तख्त ने फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर जारी किया हुक्मनामा

इस पूरे विवाद की शुरुआत अक्टूबर 2025 में हुई थी, जब एक एनआरआई (NRI) ने इंटरनेट पर यह वीडियो जारी किया था. इसके बाद जनवरी 2026 में अकाल तख्त ने भगवंत मान को तलब किया था. 15 जनवरी को अकाल तख्त सचिवालय के समक्ष पेश होकर मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि यह वीडियो पूरी तरह फर्जी, एडिटेड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) या डीपफेक तकनीक से तैयार किया गया है.

अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने अमृतसर में पांच सिंह साहबान (मुख्य पुजारियों) की बैठक के बाद प्रेस को संबोधित करते हुए कहा, "मुख्यमंत्री ने अकाल तख्त के सामने झूठ बोला था. हमने उनके दावे के बाद वीडियो की जांच भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त दो प्रतिष्ठित फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं से कराई. दोनों ही लैब की रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है कि वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ या एडिटिंग नहीं की गई है और न ही यह एआई-जनरेटेड है." इसके बाद अकाल तख्त ने हुक्मनामा जारी कर सिख समुदाय (संगत) को मुख्यमंत्री से दूरी बनाने और सामाजिक नाता तोड़ने का आदेश दिया.

'नॉट मी': भगवंत मान ने वायरल वीडियो को फर्जी बताया

'वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मैं नहीं हूँ' — भगवंत मान

अकाल तख्त के इस कड़े फैसले के अगले दिन, 16 जून को चंडीगढ़ से एक लाइव संबोधन में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने वीडियो की प्रामाणिकता को कड़ाई से खारिज किया. उन्होंने कहा, "वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मैं नहीं हूँ. उस व्यक्ति का न तो कद-काठी (Height) मुझसे मेल खाती है और न ही शारीरिक बनावट."

मुख्यमंत्री ने आगे आरोप लगाया कि शिरोमणि अकाली दल (SAD) और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) से जुड़े कुछ लोग अपने राजनीतिक आकाओं (बादल परिवार) के इशारे पर उनके खिलाफ झूठा प्रचार कर रहे हैं. मान ने कहा कि वे अकाल तख्त का सर्वोच्च धार्मिक संस्था के रूप में पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ धार्मिक पदाधिकारियों द्वारा लिए जा रहे राजनीतिक फैसलों से उन्हें दुख पहुंचा है. उन्होंने पंजाब की जनता से अपील की कि वे इस विवाद के बीच राज्य के विकास और सुशासन पर ध्यान केंद्रित रखें.

 

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'इंडियाज एप्स्टीन फाइल्स' और छिड़ी कानूनी व राजनीतिक जंग

इस वीडियो के सामने आने के बाद से सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है. जहां विपक्ष इसे नैतिक पतन बताते हुए मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग कर रहा है, वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं और समर्थकों ने वीडियो की विश्वसनीयता पर कई तकनीकी सवाल उठाए हैं. आप के पंजाब मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने कहा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में यह कहीं नहीं लिखा है कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति वास्तव में भगवंत मान ही है. उन्होंने वीडियो की खराब कैमरा क्वालिटी, कमरे की आधुनिक बनावट और व्यक्ति की उम्र में विसंगतियों को रेखांकित किया.

यह विवाद ऐसे समय में गहराया है जब पंजाब सरकार और सिख धार्मिक निकायों के बीच पहले से ही 'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026' को लेकर तनातनी चल रही है. अकाल तख्त ने इस कानून को लेकर पंजाब कैबिनेट के सभी सिख मंत्रियों और विधायकों को भी 29 जून को पेश होने का आदेश दिया है. पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले उपजा यह धार्मिक और संवैधानिक संकट आम आदमी पार्टी की सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 17, 2026 01:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).