Punjab Government Employees Strike: पेंडिंग डीए और ओपीएस को लेकर पंजाब के सरकारी कर्मचारियों की कलम छोड़ हड़ताल; दफ्तरों में काम ठप, मंत्रियों के घेराव की चेतावनी

पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ते के बकाए, पुरानी पेंशन योजना को पूरी तरह लागू करने और एसीपी लाभों की बहाली को लेकर 'पंजाब सांझा मुलाजिम मंच' के आह्वान पर मंगलवार, 8 सितंबर को राज्यव्यापी कलम छोड़ हड़ताल शुरू कर दी. चंडीगढ़ स्थित निदेशालयों से लेकर जिला प्रशासनिक परिसरों तक मिनिस्ट्रियल स्टाफ ने कंप्यूटर बंद कर काम का पूरी तरह बहिष्कार किया, जिससे आम जनता के प्रशासनिक कार्य ठप हो गए.

Punjab CM Bhagwant Mann (Photo Credits: Facebook)

चंडीगढ़: बकाया महंगाई भत्ते (DA Arrears) के भुगतान और पुरानी पेंशन योजना की स्पष्ट नियमावली की मांग को लेकर पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने मंगलवार को राज्यव्यापी कलम छोड़ हड़ताल (Pen-Down Strike) शुरू कर दी. पंजाब सांझा मुलाजिम मंच के नेतृत्व में आयोजित इस हड़ताल के कारण राजधानी चंडीगढ़ के प्रमुख विभागाध्यक्ष कार्यालयों सहित राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठप रहा.

दफ्तरों में तैनात कर्मचारियों ने कंप्यूटर बंद रखे और सरकारी फाइलों पर काम करने से मना कर दिया, जिससे रजिस्ट्री, प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक नागरिक सेवाओं के लिए पहुंचे आम लोगों को बिना काम कराए लौटना पड़ा. यह भी पढ़ें: Punjab DA Hike: पंजाब में सरकारी कर्मचारियों को तोहफा, बढ़ेगा DA? कैबिनेट सब-कमेटी ने 60% करने की दी सिफारिश

जिलों में प्रदर्शन और 12 सितंबर से मंत्रियों के घेराव का ऐलान

राज्य के विभिन्न जिलों में कर्मचारी संगठनों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए पंजाब सरकार की नीतियों की आलोचना की:

पुरानी पेंशन योजना (OPS) पर स्थिति स्पष्ट न होने का आरोप

यूनियन प्रतिनिधियों ने आम आदमी पार्टी सरकार के चुनावी वादों को याद दिलाते हुए ओपीएस के क्रियान्वयन पर कड़े सवाल उठाए:

सरकार की 'अवैध' हड़ताल की चेतावनी और टकराव की स्थिति

यह हड़ताल राज्य सरकार की उस कड़ी चेतावनी के बावजूद हुई, जिसमें कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने इस आंदोलन को गैरकानूनी करार दिया था:

विवाद की मुख्य जड़: ₹14,191 करोड़ का पेंडिंग डीए और सुप्रीम कोर्ट में मामला

पंजाब सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच सबसे बड़ा टकराव डीए और उसके एरियर को लेकर है:

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी 18% बकाया डीए की किस्तों, ओपीएस की स्पष्ट बहाली और नोटिस वापस लेने की मांग पूरी नहीं होती, उनका आंदोलन चरणबद्ध तरीके से तेज होता रहेगा.

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