Punjab Government Employees Strike: पेंडिंग डीए और ओपीएस को लेकर पंजाब के सरकारी कर्मचारियों की कलम छोड़ हड़ताल; दफ्तरों में काम ठप, मंत्रियों के घेराव की चेतावनी
पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ते के बकाए, पुरानी पेंशन योजना को पूरी तरह लागू करने और एसीपी लाभों की बहाली को लेकर 'पंजाब सांझा मुलाजिम मंच' के आह्वान पर मंगलवार, 8 सितंबर को राज्यव्यापी कलम छोड़ हड़ताल शुरू कर दी. चंडीगढ़ स्थित निदेशालयों से लेकर जिला प्रशासनिक परिसरों तक मिनिस्ट्रियल स्टाफ ने कंप्यूटर बंद कर काम का पूरी तरह बहिष्कार किया, जिससे आम जनता के प्रशासनिक कार्य ठप हो गए.
चंडीगढ़: बकाया महंगाई भत्ते (DA Arrears) के भुगतान और पुरानी पेंशन योजना की स्पष्ट नियमावली की मांग को लेकर पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने मंगलवार को राज्यव्यापी कलम छोड़ हड़ताल (Pen-Down Strike) शुरू कर दी. पंजाब सांझा मुलाजिम मंच के नेतृत्व में आयोजित इस हड़ताल के कारण राजधानी चंडीगढ़ के प्रमुख विभागाध्यक्ष कार्यालयों सहित राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठप रहा.
दफ्तरों में तैनात कर्मचारियों ने कंप्यूटर बंद रखे और सरकारी फाइलों पर काम करने से मना कर दिया, जिससे रजिस्ट्री, प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक नागरिक सेवाओं के लिए पहुंचे आम लोगों को बिना काम कराए लौटना पड़ा. यह भी पढ़ें: Punjab DA Hike: पंजाब में सरकारी कर्मचारियों को तोहफा, बढ़ेगा DA? कैबिनेट सब-कमेटी ने 60% करने की दी सिफारिश
जिलों में प्रदर्शन और 12 सितंबर से मंत्रियों के घेराव का ऐलान
राज्य के विभिन्न जिलों में कर्मचारी संगठनों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए पंजाब सरकार की नीतियों की आलोचना की:
- होशियारपुर में रोष प्रदर्शन: जिला प्रधान अनिरुद्ध मोदगिल और वरिष्ठ उपप्रधान दीपक त्रिहान के नेतृत्व में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया. कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार 18 प्रतिशत बकाया डीए, एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (ACP) और अन्य भत्ते रोके हुए है. ज्वाइंट कोऑर्डिनेशन कमेटी के निर्णय अनुसार कर्मचारियों ने ऐलान किया कि 12 सितंबर से पंजाब के मंत्रियों के आवासों का घेराव शुरू किया जाएगा.
- फिरोजपुर में प्रदर्शन: जिला प्रशासनिक परिसर में पंजाब स्टेट मिनिस्ट्रियल सर्विसेज यूनियन के जिला प्रधान पिप्पल सिंह की अगुवाई में कर्मचारियों ने धरना दिया. नेताओं ने कहा कि सरकार लगातार केवल आश्वासन दे रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया.
पुरानी पेंशन योजना (OPS) पर स्थिति स्पष्ट न होने का आरोप
यूनियन प्रतिनिधियों ने आम आदमी पार्टी सरकार के चुनावी वादों को याद दिलाते हुए ओपीएस के क्रियान्वयन पर कड़े सवाल उठाए:
- कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकार ने अपने चुनावी घोषणापत्र में पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का वादा किया था और इस संबंध में अधिसूचना भी जारी की गई थी.
- हालांकि, अधिसूचना के बावजूद इसे लागू करने की संपूर्ण कार्यप्रणाली, शर्तें और नियम अभी तक स्पष्ट नहीं किए गए हैं, जिसके चलते 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारी अब भी नई पेंशन प्रणाली के दायरे में ही अटके हुए हैं.
सरकार की 'अवैध' हड़ताल की चेतावनी और टकराव की स्थिति
यह हड़ताल राज्य सरकार की उस कड़ी चेतावनी के बावजूद हुई, जिसमें कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने इस आंदोलन को गैरकानूनी करार दिया था:
- सख्त कार्रवाई की चेतावनी: मंत्री ने कहा था कि यदि आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं में व्यवधान पड़ता है या आम नागरिकों को भारी असुविधा होती है, तो सरकार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी.
- कारण बताओ नोटिस का विवाद: इससे पहले 27 अगस्त को करीब 3 लाख कर्मचारियों द्वारा ली गई सामूहिक छुट्टी के बाद कार्मिक विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी किए थे. मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ कर्मचारी नेताओं की प्रस्तावित बैठक भी इसीलिए नहीं हो सकी थी, क्योंकि प्रशासन ने बातचीत से पहले हड़ताल वापस लेने की शर्त रखी थी.
विवाद की मुख्य जड़: ₹14,191 करोड़ का पेंडिंग डीए और सुप्रीम कोर्ट में मामला
पंजाब सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच सबसे बड़ा टकराव डीए और उसके एरियर को लेकर है:
- कर्मचारियों का विभाजन: सरकार ने 17 जुलाई 2020 के बाद 7वें केंद्रीय वेतन आयोग के पैटर्न पर भर्ती हुए लगभग 85,000 कर्मचारियों का डीए 42% से बढ़ाकर 60% करने की घोषणा की, लेकिन उससे पहले भर्ती हुए लाखों कर्मियों को इससे बाहर रखा गया है.
- हाईकोर्ट बनाम सरकार: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर सभी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित डीए और राहत भत्ते का भुगतान करने का निर्देश दिया था.
- सुप्रीम कोर्ट में याचिका: पंजाब सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए तर्क दिया है कि लगभग ₹14,191 करोड़ की भारी-भरकम देनदारी का भुगतान महज 14 दिनों में करना संवैधानिक और वित्तीय दोनों दृष्टिकोणों से असंभव है.
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी 18% बकाया डीए की किस्तों, ओपीएस की स्पष्ट बहाली और नोटिस वापस लेने की मांग पूरी नहीं होती, उनका आंदोलन चरणबद्ध तरीके से तेज होता रहेगा.