Pune Ganeshotsav 2026: लाउडस्पीकर और DJ के ध्वनि प्रदूषण पर कानूनी नोटिस, सख्त नियम लागू करने की मांग
आगामी गणेशोत्सव से पहले पुणे में लाउडस्पीकर और डीजे के ध्वनि प्रदूषण को लेकर कानूनी नोटिस जारी किया गया है. पूर्व उपमहापौर डॉ. सिद्धार्थ धेंडे की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट के वकील जतिन आधव ने प्रशासन से पारदर्शिता और सख्त नियम लागू करने की मांग की है.
Pune Ganeshotsav 2026: आगामी गणेशोत्सव के दौरान डीजे, लाउडस्पीकर और उच्च क्षमता वाले साउंड सिस्टम के उपयोग को लेकर पुणे में चर्चा तेज हो गई है. पीपल वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष और बॉम्बे हाईकोर्ट के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड जतिन एस. आधव ने स्पष्ट किया है कि यह मुद्दा गणेशोत्सव का विरोध करने का नहीं है, बल्कि ध्वनि प्रदूषण से जुड़े कानूनों और अदालती दिशा-निर्देशों को समान और प्रभावी ढंग से लागू कराने का है.
एडवोकेट जतिन आधव ने अपने मुवक्किल, पुणे नगर निगम के पूर्व उपमहापौर और कॉर्पोरेटर डॉ. सिद्धार्थ यशवंत धेंडे की ओर से राज्य के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, पुणे जिला कलेक्टर, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB), पुणे नगर निगम (PMC) और पुणे पुलिस आयुक्त को एक विस्तृत कानूनी नोटिस भेजा है. यह भी पढ़े: Ganesh Visarjan 2026: गिरगांव चौपाटी पर गणेश विसर्जन के लिए इवेंट प्लानर क्यों हायर कर रही BMC? जानें कारण और पूरा प्लान
प्रशासन से मांगी गई अनुमति और ध्वनि सीमा की विस्तृत जानकारी
कानूनी नोटिस में प्रशासन से लाउडस्पीकर की अनुमति देने के मापदंडों, गणेशोत्सव के लिए दी गई या प्रस्तावित अनुमतियों की संख्या, अनुमतियों के साथ लागू शर्तों और ध्वनि स्तर की निगरानी के इंतजामों की जानकारी मांगी गई है.
इसके अलावा, पिछले वर्षों के ध्वनि स्तर के आंकड़े, शिकायत निवारण प्रणाली और नियमों के उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की गई है.
'धार्मिक भावनाएं महत्वपूर्ण, लेकिन कानून सभी पर समान रूप से लागू हो'
एडवोकेट आधव ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन इसके साथ ही नागरिकों के स्वास्थ्य, शांति और कानूनी अधिकारों की रक्षा होना भी उतना ही आवश्यक है.
कानूनी नोटिस में बॉम्बे हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा ध्वनि प्रदूषण पर जारी विभिन्न निर्देशों का हवाला दिया गया है. इसमें विशेष रूप से 'डॉ. महेश विजय बेडेकर बनाम महाराष्ट्र राज्य' मामले में दिए गए अदालती फैसलों का संदर्भ शामिल है.
'अनुमति मिलने का अर्थ नियम तोड़ने का लाइसेंस नहीं'
एडवोकेट आधव ने स्पष्ट किया कि लाउडस्पीकर या साउंड सिस्टम इस्तेमाल करने की अनुमति मिलने का मतलब यह नहीं है कि आयोजकों को असीमित आवाज में डीजे बजाने का अधिकार मिल गया है.
उन्होंने कहा, "लाउडस्पीकर की अनुमति मिलना असीमित शोर मचाने का अनियंत्रित अधिकार नहीं है. अनुमति की सभी शर्तों, निर्धारित ध्वनि सीमाओं और अदालत के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है."
नोटिस में प्रभावी ध्वनि-मापन और निगरानी तंत्र, बार-बार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई, उत्सव से पहले जागरूकता अभियान और हेल्पलाइन/व्हाट्सएप शिकायत सुविधाओं की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई है.
लीगल नोटिस में की गई प्रमुख मांगें
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पारदर्शिता: लाउडस्पीकर अनुमति प्रक्रिया और स्वीकृत साउंड सिस्टम की संख्या पारदर्शी रखी जाए.
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ध्वनि निगरानी: व्हाट्सएप हेल्पलाइन के साथ नियमित ध्वनि-स्तर मापन की व्यवस्था हो.
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शिकायत निवारण: नागरिकों के लिए आसान और सुलभ शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाए.
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समय सीमा का पालन: निर्धारित समय सीमाओं और 'साइलेंस जोन' (शांति क्षेत्रों) के नियमों को सख्ती से लागू किया जाए.
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नोडल अधिकारियों की घोषणा: जिम्मेदार अधिकारियों और पिछले वर्षों के कार्रवाई डेटा की सार्वजनिक घोषणा हो.
नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि संबंधित अधिकारी मांगी गई जानकारी और अनुपालन योजना प्रदान करने में विफल रहते हैं, तो बॉम्बे हाईकोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के समक्ष उचित कानूनी कार्यवाही शुरू की जाएगी.