Pune AC Trains News: पुणे की एसी ट्रेनों से 5 साल में 2 लाख से ज्यादा चादर-तौलिया गायब, रेलवे को ₹2.81 करोड़ का नुकसान

पुणे रेलवे मंडल से शुरू होने वाली वातानुकूलित (AC) ट्रेनों में पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान 2.06 लाख से अधिक बेडरोल का सामान गायब हो गया है. हालांकि, रेलवे ने ठेकेदारों से 2.81 करोड़ रुपये की पूरी राशि वसूल कर ली है.

(Photo Credits Wikimedia commons)

Pune AC Trains News: पुणे रेलवे स्टेशन से शुरू होने वाली वातानुकूलित (AC) ट्रेनों में यात्रियों को दी जाने वाली चादरों, तौलियों और तकियों के गायब होने का एक बड़ा मामला सामने आया है. पुणे रेलवे मंडल द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वित्तीय वर्षों में ट्रेनों से 2,06,000 से अधिक बेडरोल सामान गायब दर्ज किए गए हैं.

इन गायब हुए सामानों की कुल अनुमानित कीमत लगभग 2.81 करोड़ रुपये बताई गई है. सबसे ज्यादा गायब होने वाली चीजों में बेडशीट (चादरें) शीर्ष पर हैं, जिसके बाद तकिए के कवर, चेहरे के तौलिए, कंबल और तकिए शामिल हैं.  यह भी पढ़े: 26 साल पहले चलती ट्रेन में चोरी हुई थी गोल्ड की चेन; रेलवे पुलिस ने महिला को ढूंढकर वापस की अमानत

दैनिक 30 एसी ट्रेनों में दी जाती है सुविधा

पुणे रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन लगभग 30 एसी ट्रेनों का परिचालन होता है, जिनमें यात्रियों को सफर के दौरान इस्तेमाल के लिए बेडरोल किट दी जाती है. इस किट में दो चादरें, एक तकिया, तकिए का कवर, कंबल और एक फेस टॉवल शामिल होता है.

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कई बार यात्री सफर खत्म होने के बाद इन सामानों को अपने साथ ले जाते हैं. विशेष रूप से देर रात या तड़के जिन स्टेशनों पर ट्रेन रुकती है, वहां जल्दबाजी में उतरते समय यात्री अक्सर बेडरोल का सामान अपने बैग में रख लेते हैं.

निजी ठेकेदारों से की गई 2.81 करोड़ रुपये की वसूली

रेलवे नियमों के तहत, ट्रेनों में बेडरोल का वितरण, उनकी वापसी और स्टॉक का प्रबंधन निजी ठेकेदारों के जिम्मे होता है. ट्रेन के गंतव्य पर पहुंचने के बाद सभी सामान की गिनती की जाती है और कम पाए गए सामान की कीमत ठेकेदार के बिल से काटी जाती है.

पुणे रेलवे मंडल के प्रवक्ता हेमंत कुमार बेहेरा ने बताया कि बीते पांच सालों में गायब हुए सामान के ऑडिट के बाद रेलवे ने ठेकेदारों के बिल से 2.81 करोड़ रुपये की पूरी राशि वसूल कर ली है. इस प्रक्रिया के कारण रेलवे प्रशासन को कोई सीधा वित्तीय नुकसान नहीं हुआ है.

कर्मचारियों पर बढ़ता है अतिरिक्त दबाव

हालांकि रेलवे ने वित्तीय नुकसान की भरपाई ठेकेदारों से कर ली है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि ठेकेदार इस कटौती का बोझ अक्सर ग्राउंड स्टाफ और अटेंडेंट पर डालते हैं. इससे कोच में तैनात कर्मचारियों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता है.

रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे सफर समाप्त होने पर बेडरोल का सामान अटेंडेंट को वापस सौंप दें और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से बचें.

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