PM मोदी ने कर्तव्य भवन का किया उद्घाटन, 7 मंत्रालय पुरानी इमारतों से इस नई बिल्डिंग में होगीं शिफ्ट

PM Modi Inaugurates Kartavya Bhavan: कर्तव्य भवन, दिल्ली के कर्तव्य पथ पर बना एक नया और आधुनिक सरकारी भवन है, जिसका उद्घाटन 6 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया. यह भवन सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका मकसद दिल्ली में सरकारी कामकाज को और बेहतर, तेज, और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है. आइए, समझते हैं कि कर्तव्य भवन क्या है और क्यों खास है.

कर्तव्य भवन का उद्देश्य

कर्तव्य भवन का मुख्य लक्ष्य है कि सरकार के कई मंत्रालय और विभाग, जो अभी दिल्ली में अलग-अलग पुरानी इमारतों में बिखरे हुए हैं, उन्हें एक जगह लाया जाए. इससे मंत्रालयों के बीच आपसी तालमेल बढ़ेगा, काम तेजी से होगा, और जनता को बेहतर सेवाएं मिलेंगी. इस भवन में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, एमएसएमई, डीओपीटी, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के दफ्तर होंगे.

आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल डिज़ाइन

कर्तव्य भवन सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि एक हाईटेक और पर्यावरण के लिए जिम्मेदार ढांचा है. यह भवन करीब 1.5 लाख वर्ग मीटर में फैला है, जिसमें दो बेसमेंट और सात मंजिलें हैं. इसकी कुछ खास बातें इस प्रकार हैं:

ऊर्जा की बचत: यह भवन 30% कम बिजली खर्च करता है. इसमें सोलर पैनल लगे हैं, जो हर साल 5.34 लाख यूनिट बिजली बनाएंगे. इसके अलावा, स्मार्ट लिफ्ट, सेंसर वाली एलईडी लाइट्स, और खास तरह की खिड़कियां हैं जो गर्मी और शोर को कम करती हैं.

पानी का संरक्षण: यह एक जीरो-डिस्चार्ज इमारत है, यानी यहां का गंदा पानी दोबारा इस्तेमाल के लिए प्रोसेस किया जाता है. बारिश का पानी जमा करने की व्यवस्था, ड्रिप इरिगेशन, और सेंसर वाले नल पानी की बर्बादी रोकते हैं.

कचरा प्रबंधन: भवन में रोजाना 1,000 किलो कचरे को कम्पोस्ट में बदलने की व्यवस्था है. साथ ही, निर्माण में रिसाइकिल किए गए सामान का इस्तेमाल हुआ है, जिससे पर्यावरण को नुकसान कम हो.

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सुविधा: यहां 120 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन और 324 ऑटोमेटेड पार्किंग स्लॉट हैं, जो पर्यावरण के अनुकूल यातायात को बढ़ावा देते हैं.

कर्मचारियों के लिए सुविधाएं

कर्तव्य भवन में काम करने वालों के लिए कई आधुनिक सुविधाएं हैं. इसमें 24 बड़े कॉन्फ्रेंस रूम (45 लोगों की क्षमता), 26 छोटे कॉन्फ्रेंस रूम (25 लोगों की क्षमता), और 67 मीटिंग रूम हैं. इसके अलावा, क्रेच, योगा रूम, मेडिकल रूम, कैफे, किचन, और मल्टीपर्पज हॉल भी हैं. सुरक्षा के लिए आईडी कार्ड से एक्सेस, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, और सेंट्रलाइज्ड कमांड सिस्टम है.

पुरानी इमारतों का क्या होगा?

दिल्ली में कई पुरानी सरकारी इमारतें, जैसे शास्त्री भवन, कृषि भवन, और उद्योग भवन, 1950-70 के दशक में बनी थीं. ये अब पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं, जिनमें जगह की कमी, खराब वेंटिलेशन, और आधुनिक सुविधाओं का अभाव है. कर्तव्य भवन और सेंट्रल विस्टा के तहत बनने वाली 10 नई इमारतें इन समस्याओं को दूर करेंगी. इन पुरानी इमारतों को धीरे-धीरे हटाकर नए ढांचे बनाए जाएंगे, और नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को राष्ट्रीय संग्रहालय में बदला जाएगा.

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा

कर्तव्य भवन सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का एक अहम हिस्सा है, जिसके तहत दिल्ली के प्रशासनिक इलाके को आधुनिक बनाया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट में नया संसद भवन, उपराष्ट्रपति एनक्लेव, और कर्तव्य पथ का पुनर्विकास पहले ही हो चुका है. अगले 22 महीनों में 10 नई कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट इमारतें बनकर तैयार होंगी, और जून 2027 तक पूरा प्रोजेक्ट खत्म हो जाएगा.

उद्घाटन और जनसभा

6 अगस्त 2025 को दोपहर 12:15 बजे प्रधानमंत्री ने कर्तव्य भवन का उद्घाटन किया, और शाम 6:30 बजे कर्तव्य पथ पर एक जनसभा को संबोधित किया. इस मौके पर दिल्ली में कई जगहों पर ट्रैफिक प्रतिबंध लगाए गए, क्योंकि उद्घाटन के समय भारी भीड़ और वीआईपी मूवमेंट की उम्मीद थी.

क्यों है खास?

कर्तव्य भवन सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की सोच का प्रतीक है. यह दर्शाता है कि सरकार न सिर्फ कुशल और तेज प्रशासन चाहती है, बल्कि पर्यावरण की रक्षा और कर्मचारियों की सुविधा को भी प्राथमिकता देती है. यह भवन न केवल दिल्ली के पावर कॉरिडोर को नया रूप देगा, बल्कि देश में गवर्नेंस के तरीके को भी बदलेगा.